झारखंड: 1.47‌ लाख करोड़ के 2000 के ‌नोटों की जमाखोरी; बैंक से निकाले, लेकिन 70% वापस नहीं आए

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देश के कई राज्यों की तरह झारखंड में भी कैश की जबर्दस्त किल्लत हो गई है. यहां बैंक के कुछ अफसरों का कहना है कि राज्य में नोटबंदी के बाद 2000 के जितने नोट आए उनमें से 70% बाजार में लौटे ही नहीं. यह रकम करीब 1.47 लाख करोड़ रुपए है. नाम उजागर न करने की शर्त उन्होंने कहा कि यह पैसा लोगों ने अपने घरों में जमा कर रखा है. इन्हें ब्लैकमनी के रूप में छिपाया जा रहा है.

एक बैंक अधिकारी ने बताया कि ATM में पहले से कम कैश डाला जा रहा है. नोटबंदी से पहले राज्य में 2.97 लाख करोड़ रुपए के नोट बाजार में थे. अब 3.47 लाख करोड़ रुपए के हैं. फिर भी कैश की कमी है. इसकी सबसे बड़ी वजह नोटों का रोटेशन ना होना.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक दयाशंकर ने बताया कि 2000 के नोट बैंकों में नहीं लौटने की वजह से ATM में इसके स्लॉट खाली रह रहे हैं. ATM में दो से चार ट्रे होती हैं. अगर 2000 के नोट डाले जाते तो ज्यादा कैश मिलता, लेकिन 100, 200 और 500 के नोट ही डाले जा रहे हैं. इससे कम कैश ATM में रहता है. वैसे भी 40% ATM ही 200 के नोट के लिए कैलिब्रेट हुए हैं. ज्यादातर बैंकों की एनपीए की वजह से हालत ठीक नहीं है. नए ATM भी नहीं लग रहे हैं, इसलिए ऐसी दिक्कत है.

रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा है कि देश में करेंसी की कमी नही है. बिहार और झारखंड के सभी करेंसी चेस्ट को उनकी जरूरत के हिसाब से करेंसी दी जा रही है. जनता से अपील है कि अपनी जरूरत के हिसाब से ही पैसा निकालें. बेवजह इसे इकट्ठा न करें. वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल करें...देश की चार प्रेस में दिन-रात नोट छप रहे हैं, जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा.



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