भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा से विवाह रचाया नेत्रहीन युवती ने, देखें तस्वीरें

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बुंदेलखंड के टीकमगढ़ में एक नेत्रहीन लड़की ने 'मीरा' की तरह श्रीकृष्ण के गले में वरमाला डालकर गंधर्व विवाह किया। लड़की का भगवान श्रीकृष्ण के साथ अनोखा विवाह को देखने पूरा गांव उमड़ पड़ा।

दूल्हा बने श्रीकृष्ण बारात लेकर शालिनी के दरवाजे पर पहुंचे तो पिता मुन्नालाल ने अपना सिर उनके चरणों में रख दिया। शालिनी ने श्रीकृष्ण के गले में वरमाला पहनाकर जन्म-जन्म का साथ मांगा। यह अद्भुत नजारा देखकर गांव की महिलाएं और लड़कियां रो पड़ीं।

रविवार सुबह 11 बजे ऐतिहासिक किला में बने गोपाल मंदिर से दूल्हा बनाकर श्रीकृष्ण की गाजे बाजे के साथ बारात निकाली गई। गांव की गलियों से होकर बारात 1 किमी दूर स्थित बीघा के हनुमान मंदिर पहुंची जहां लगुन पत्रिका हनुमान जी महाराज को भेंट की गई। लौटकर बारात शालिनी के दरवाजे पर पहुंची। महिलाओं सिर पर कलश रखकर मंगल गीत गाए। दूल्हा बने श्रीकृष्ण की आरती उतारी गई। पिता मुन्नालाल बिदुआ ने दूल्हा का तिलक किया। सिर पर उठाकर घर के अंदर ले गए। आंगन में दूल्हा और दुल्हन के लिए दो कुर्सियां रखी गई थीं। एक कुर्सी पर श्रीकृष्ण को विराजमान किया गया। दूसरी पर सज धजकर दुल्हन बनकर शालिनी बैठी।

शालिनी की शादी से पूरे मोहल्ले में उत्सव का माहौल रहा। शादी के बाद माता किरण कुंवर और पिता मुन्नालाल बिदुआ ने कहा कि बेटी ने हमारा जीवन धन्य कर दिया। शिवानी के नेत्रहीन होने के कारण उसके विवाह की चिंता सता रही थी। अब श्रीकृष्ण के रूप में हमें अविनाशी दामाद मिल गया है। हमारी बेटी सदा सुहागन रहेगी।

जय गोपाल, जय श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ वरमाला की रस्म कराई गई। शालिनी ने श्रीकृष्ण के गले में वरमाला पहनाई। पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीकृष्ण के हाथों में वरमाला देकर शालिनी के गले में पहनाया। विवाह में मौजूद गांव के लोगों की आंखों से खुशी के आंसू झरने लगे। महिलाओं ने भरे गले से इस चिरंजीवी जोड़े को शुभाशीष दिया। इसके बाद जनेऊ, भांवर की रस्में पूरी कराई गई। शादी में दूसरे गांवों के लोग भी शामिल हुए।



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