राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका, जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह ने थामा कांग्रेस का हाथ

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पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह का आखिरकार बीजेपी से नाता टूट गया. उन्होंने आज कांग्रेस ज्वाइन कर ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आवास पर कांग्रेस का खेस पहना कर मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई. पार्टी के प्रभारी सचिव विवेक बंसल ने यह जानकारी दी. इस दौरान मानवेंद्र सिंह ने राजस्थानी पोशाक में पंचरंगी साफा पहना था. अशोक गहलोत, सचिन पायलट, अविनाश पांडे, भंवर जितेंद्र सिंह और हरीश चौधरी जैसे पार्टी के वरिष्ठा नेता मौजूद रहे.

मानवेंद्र सिंह के अलावा महाराष्ट्र से भाजपा के विधायक आशीष देशमुख भी कांग्रेस में शामिल हुए. दोनों नेताओं का कांग्रेस में स्वागत करते हुए अशोक गहलोत ने कहा, मानवेंद्र सिंह और आशीष देशमुख बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. देश में तानाशाही चल रही है. सिर्फ दो लोगों...अमित शाह और नरेंद्र मोदी का शासन चल रहा है. बीजेपी में लोग परेशान हैं. बीजेपी के बहुत सारे नेता कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं. गहलोत ने आरोप लगाया कि जसवंत सिंह का भाजपा ने अपमान किया है.

अगले महीने होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इससे पहले बगावत के तेवर दिखाते हुए मानवेंद्र ने पिछले ही महीने बाड़मेर में स्वाभिमान रैली की और 'कमल का फूल, बड़ी भूल' कहते हुए बीजेपी से अलग होने का ऐलान किया था. बीजेपी और खासकर सीएम वसंधुरा राजे से लंबे समय से असंतुष्टब चल रहे मानवेंद्र ने 2013 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट से लड़ा और जीता था.

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मानवेंद्र के पार्टी में आने का फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में मिलेगा क्योंकि इससे राजपूत मतदाताओं के वोट पार्टी को मिलेंगे, वहीं बीजेपी के अनुसार यह मानवेंद्र सिंह का 'राजनीतिक रूप से गलत फैसला' है और इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, राजपूत मतदाता पार्टी के साथ ही रहेंगे.

कांग्रेस के बाड़मेर जिला अध्यक्ष फतेह खान ने कहा कि राजपूत समुदाय बीजेपी से खुश नहीं था और मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में आने से पार्टी के लिए जीत की राह और मजबूत होगी. उन्होंने कहा, राजपूतों का बड़ी संख्या में वोट हैं जो वसुंधरा राजे सरकार से नाखुश चल रहे थे. मानवेंद्र के आने से कांग्रेस को फायदा होगा. पश्चिमी राजस्थान में अनेक सीटों पर राजपूत मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते आ रहे हैं. दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानवेंद्र के आने से राजपूतों के साथ साथ राजपुरोहित, चारण व प्रजापत मतदाताओं का समर्थन भी कांग्रेस को मिल सकता है.

वहीं भाजपा का कहना है कि मानवेंद्र के इस कदम का पश्चिमी राजस्थान में पार्टी की संभावनाओं पर कोई असर नहीं होगा. संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने संवाददाताओं से कहा, मानवेंद्र सिंह का यह राजनीतिक रूप से गलत फैसला है जिसका पार्टी पर कोई असर नहीं होगा. राजपूत मतदाता भाजपा के साथ रहे हैं और भाजपा के ही साथ रहेंगे. राठौड़ ने कहा कि मानवेंद्र को यह फैसला करने से पहले सोचना चाहिए था. इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि कांग्रेस में उनके साथ बड़ा धोखा हो सकता है.

उन्होंने दावा किया कि राजपूत बीजेपी के पारंपरिक मतदाता रहे हैं और मानवेंद्र के जाने से इस पर कोई प्रभाव नहीं पडेगा. राजपूत वोट केवल बीजेपी के साथ ही रहेंगे. बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह ने 2013 के विधानसभा चुनाव में 31 हजार 425 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी.



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