अगर गूगल यह काम नहीं करता तो कभी नहीं खुलती फ्लिपकार्ट, बिन्नी बंसल ने किए चौकाने वाले खुलासे

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देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर बिन्नी बंसल ने दो बार गूगल से नौकरी मांगी थी, दोनों बार रिजेक्ट हो गए थे. इसके बाद कुछ बड़ा करने की ठानी और फ्लिपकार्ट बना दी. एक कार्यक्रम में उन्होंने करियर के कई किस्से साझा किए. उन्होंने बताया कि पत्नी को फ्लिपकार्ट से खरीदारी के लिए राजी करना उनके लिए बड़ी चुनौतियों में से एक है. हर रोज वे बिगबास्केट से फल और सब्जियां खरीदती हैं और मैं कहता हूं कि फ्लिपकार्ट के नए फीचर्स ट्राई करो.

2006 में बिन्नी अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गए. सचिन बंसल (फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर) के रेफरेंस से उन्हें नौकरी मिली. इससे जुड़ा दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए बिन्नी ने कहा, मेरा रेफरेंस देने के लिए सचिन को अमेजन से बोनस के तौर पर मोटी रकम मिली थी, लेकिन 8 महीने बाद ही मैंने नौकरी छोड़ दी और सचिन को बोनस के पैसे लौटाने पड़े. सचिन और बिन्नी ने मिलकर अमेजन में साथ काम करते हुए फ्लिपकार्ट की प्लानिंग की और 2007 में इसे लॉन्च कर दिया.

फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डे सेल्स से जुड़े किस्से सुनाते हुए बिन्नी ने बताया, ग्राहकों को अच्छी तरह समझने के लिए सचिन और मैंने घर-घर जाकर सामान डिलीवर किया. कुछ लोगों ने हमें पहचाना तक नहीं. जिन्होंने पहचान लिया, उन्होंने हमारे फोटो लिए. इस दौरान एक ऐसा ग्राहक मिला जो मुझे जाने नहीं दे रहा था. उसके परिवार के सदस्य भी मुझसे बातचीत करने के लिए उत्साहित थे. इसके बाद चाय और मिठाई का दौर चला. तब से मैंने समझ लिया कि ग्राहक सब कुछ है. उसे मना नहीं किया जा सकता.

बिन्नी ने शुरुआती जिंदगी के बारे में बताया कि स्पोर्ट्स उनका पैशन था. पढ़ाई में ठीक-ठाक थे. ऐसे में आईआईटी में जाना आश्चर्यजनक रहा, लेकिन आईआईटी दिल्ली का दौर उनकी जिंदगी के सबसे अच्छे दिनों में शामिल रहा. वहां का हॉस्टल कल्चर बेहद खास है. वे अपने डिपार्टमेंट, पढ़ाई और साथियों की तुलना में हॉस्टल के प्रति ज्यादा वफादार थे. स्पोर्ट्स ईवेंट और कल्चरल शो के वक्त दूसरे हॉस्टल के स्टूडेंट्स से तगड़ा कॉम्पीटिशन रहता था. बिन्नी दिल्ली आईआईटी के शिवालिक हॉस्टल में रहते थे. इससे जुड़ी यादें उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं.



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