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तीन तलाक को अपराध करार देने वाला बिल आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इसकी पुष्टि पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर अनंत कुमार ने मंगलवार को की. उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं. उम्मीद है बिल राज्यसभा में भी पास हो जाएगा. मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल को लोकसभा पिछले हफ्ते ही पास कर चुकी है. बिल को लेकर CPI, CPIM, DMK, AIADMK, BJD, AIADMK और सपा ने मंगलवार को राज्यसभा के सभापति के साथ मुलाकात की. इन पार्टियों ने बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग की है. 

मंगलवार को अनंत कुमार ने कहा कि हम ट्रिपल तलाक बिल पर कांग्रेस और बाकी दूसरी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं. उम्मीद करते हैं कि राज्यसभा में इसे पास कराने में दिक्कत नहीं होगी.

लोकसभा में आसानी से यह बिल पास करवाने वाले सत्ता पक्ष को बहुमत नहीं होने के चलते राज्यसभा में मुश्किल हो सकती है. फिलहाल, राज्यसभा में एनडीए और कांग्रेस दोनों के ही पास 57-57 सीटें हैं. सरकार के सामने दिक्कत ये है कि बीजू जनता दल और एआईएडीएमके जैसी पार्टियां इस सदन में मोदी सरकार की मदद करती रही हैं लेकिन ट्रिपल तलाक बिल का विरोध कर रही हैं. 

ऐसे में अगर यह बिल स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाता है तो इसक मतलब यह हुआ कि सरकार इसे विंटर सेशन में पारित नहीं करवा पाएगी. यह सेशन इस हफ्ते के आखिर में खत्म हो जाएगा. यह बिल कानून बने, इसके लिए दोनों सदनों से इसका पास होना जरूरी है.

इंडिपेंडेंट और नॉमिनेटेड मेंबर्स को छोड़ दें तो राज्यसभा में 28 पार्टियों के मेंबर्स हैं. तृणमूल कांग्रेस के 12, समाजवादी पार्टी के 18, तमिलनाडु की एआईएडीएमके के पास 13, सीपीएम के 7, सीपीआईए के 1, डीएमके के 4, एनसीपी के 5, पीडीपी के 2, हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल के 1 , शिवसेना के 3 , तेलगुदेशम के 6, टीआरएस के 3, वाएसआर के 1, अकाली दल के 3, आरजेडी के 3, आरपीआई के 1, जनता दल (एस) के 1, केरल कांग्रेस के 1, नगा पीपुल्स फ्रंट के 1 और एसडीएफ का 1 सांसद हैं. इनके अलावा 8 नॉमिनेटेड और 6 इंडिपेंडेंट मेंबर भी राज्यसभा में हैं. 

भाजपा को मिलाकर एनडीए के कुल 88 सांसद हो रहे हैं. यह बिल पास कराने के आंकड़े से 35 कम है.

गौरलतब है कि लोकसभा में यह बिल 28 दिसंबर को पेश किया गया था. 1400 वर्ष पुरानी ट्रिपल तलाक प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत के खिलाफ यह बिल लोकसभा में 7 घंटे के भीतर पास हो गया था. कई संशोधन पेश किए गए, लेकिन सब खारिज हो गए. इनमें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भी 3 संधोधन थे, लेकिन ये भी खारिज हो गए.

बता दें कि इस मसौदे के मुताबिक , एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी तौर पर गैरकानूनी ही होगा. जिसमें बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सऐप, ईमेल, एसएमएस) के जरिये भी एक बार में तीन तलाक देना शामिल है.

ऑफिशियल्स के मुताबिक, हर्जाना और बच्चों की कस्टडी महिला को देने का प्रोविजन इसलिए रखा गया है, ताकि महिला को घर छोड़ने के साथ ही कानूनी तौर पर सिक्युरिटी हासिल हो सके. इस मामले में आरोपी को जमानत भी नहीं मिल सकेगी.



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