नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, बुजुर्ग माता-पिता की सेवा नहीं करने वाले जाएंगे जेल, पुलवामा हमले में शहीदों के परिजन को मिलेगी सरकारी नौकरी

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बिहार में अब अपने बूढे माता-पिता की सेवा नहीं करने पर जेल भी जाना पड़ सकता है. बिहार मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में फैसला किया गया कि बिहार में रहने वाली संतानें अगर अब माता-पिता की सेवा नहीं करेंगी तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है. माता-पिता की शिकायत मिलते ही ऐसी संतानों पर कार्रवाई होगी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में कुल 15 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई.

हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट मीटिंग के बारे में बताते हुए प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि यह कानून 2007 में ही बना. इसके तहत अब तक एसडीओ ऐसे मामलों की सुनवाई करते रहे हैं. लेकिन अब इसमें डीएम को भी शामिल किया गया है. अगर कोई बेटा या बेटी अपने बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करता है, उनकी सेवा नहीं करता है या उनकी संपत्ति पर कब्जा करता है तो ऐसी संतानों के खिलाफ इस कानून के तहत सजा का प्रावधान है. कैबिनेट फैसले के बारे में बताते हुए बिहार के समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने कहा कि डीएम ऐसे मामलों में बेटे द्वारा संपत्ति के हस्तांतरण (ट्रांसफर) या निबंधन (रजिस्ट्री) पर पूरी तरह से रोक लगा सकते हैं.

बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी घटनाओं में शहीद बिहार के जवानों के आश्रितों को बिहार सरकार ने नौकरी देने का भी फैसला किया है. बैठक में राज्य के वृद्घजन पेंशन योजना को भी बिहार लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम 2011 के दायरे में लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. अब किसी भी बुजुर्ग द्वारा दिए गए आवेदन का निपटारा प्रखंड विकास पदाधिकारी को 21 दिनों के अंदर करना होगा. इसके अलावा भागलपुर में गंगा नदी पर एक नया पुल बनाने का निर्णय लिया गया है.



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