भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीमकोर्ट ने 17 सितंबर तक बढ़ाई आरोपी कार्यकर्ताओं की नजरबंदी

महाराष्ट्र विधानसभा में पास हुआ बिल, मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण

मुंबई के बांद्रा में शास्त्री नगर की झुग्गियों में लगी भीषण आग, मौके पर दमकल की गाड़ियां पहुंची

26/11 मुंबई हमले की बरसी पर सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत नेताओं और अधिकारियों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

मुंबई 26/11 आतंकी हमला: आरोपियों का सुराग देने पर अमेरिका देगा 50 लाख डॉलर का इनाम, पाकिस्तान पर बनाएगा दबाव

महाराष्ट्र: सड़कों पर उतरे 20 हजार अन्नदाता, आजाद मैदान की ओर बढ़ रहा मार्च

मालेगांव विस्फोट मामले में कर्नल पुरोहित को नहीं मिली राहत, ट्रायल पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार

2018-09-12_bhimakoreganvactivits.jpg

उच्चतम न्यायालय ने कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले के संबंध में गिरफ्तार किये गये पांच कार्यकर्ताओं की घरों में नजरबंदी की अवधि बुधवार को 17 सितंबर तक के लिये बढ़ा दी. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ को सूचित किया गया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को बहस करनी थी परंतु वह एक अन्य मामले में व्यस्त होने की वजह से उपलब्ध नहीं है. पीठ ने इसके बाद पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य की याचिका पर सुनवाई 17 सितंबर के लिये स्थगित कर दी. 

इससे पहले, सिंघवी पीठ के समक्ष पेश हुये और उन्होंने थापर की याचिका पर दोपहर 12 बजे के बाद सुनवाई करने का अनुरोध किया क्योंकि वह एक अन्य मामले में पेश हो रहे थे. न्यायालय इस मामले में वरवरा राव, अरूण फरेरा, वरनान गोन्साल्विज, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. 


महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को ऐलगार परिष्द कके बाद कोरेगांव-भीमा गांव में हुयी हिंसा के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर इन सभी को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था. शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को इन कार्यकर्ताओं को छह सितंबर तक अपने घरों में ही नजरबंद करने का आदेश देते हुये कहा था, लोकतंत्र में असहमति सेफ्टी वाल्व है.
 



loading...