Movie Review: बहन होगी तेरी

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प्रोड्यूसर : अमूल मोहन, टोनी डिसूजा
डायरेक्टर : अजय पन्नालाल
स्टार कास्ट : राजकुमार राव, श्रुति हासन, गौतम गुलाटी, दर्शन जरीवाला, हेरी टेंगरी, गुलशन ग्रोवर
म्यूजिक डायरेक्टर : हनी सिंह, जयदेव कुमार
रेटिंग ***

दो बच्चे एक ही मोहल्ले में रहते हैं. निक्कर पहन कर कंचे खेलते हैं. साथ -साथ जवान होते हैं. सुख- दुख बांटते हैं. फिर दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है. दोनों ही अपनी-अपनी  छत्तों से आंख मिचौली खेलते हैं. ये अलग बात है कि एक ही मुहल्ले में रहने वाले लड़के लड़की को एक बहन भाई के तौर पर देखा जाता है. पर क्या ये जरूरी है कि हमेशा इस रिश्ते पर बस एक ही मुहर लगे. क्या ये रिश्ता भाई-बहन से अलग एक प्रेमी-प्रेमिका का नहीं हो सकता?? ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब ढूंढती है राजकुमार राव की फिल्म ‘बहन होगी तेरी’.

कहानी
यह कहानी गट्टू (राजकुमार राव) और बिन्नी (श्रुति हासन) की है जो बचपन से ही एक ही कॉलोनी में पले बढ़े हैं। दोनों के घर एकदम अगल-बगल रहते हैं, लेकिन जब बिन्नी बड़ी होती है तो उसके घर में एक सिलसिला शुरू हो जाता है कि अगर कोई भी लड़का छेड़खानी करने की कोशिश करे तो उसको राखी बांधकर भाई बना दिया जाता था। गट्टू को बिन्नी से प्यार होता है, पर घरवाले उन दोनों को भाई-बहन ही समझते हैं। कहानी में ट्विस्ट आता है जब बिन्नी की सगाई राहुल(गौतम गुलाटी) से हो जाती है। फिर उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार नतीजा निकलता है जिसका पता थिएटर तक जाकर ही चल पाएगा।

फिल्म का म्यूजिक
फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड ठीकठाक है। जिसे और बेहतर किया जा सकता था।

अगर फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो लखनऊ के छोटे से शहर में रहने वाले लड़के के किरदार को राजकुमार ने बखूबी निभाया है. वैसे भी जिस फिल्म में राजकुमार हों उस फिल्म में एक्टिंग के बारे में बात करना बेमानी लगता है. निसंदेह वे कमाल के कलाकार हैं. वहीं उनके दोस्त के रूप में हैरी टेंगरी ने बढ़िया काम किया है, गुलशन ग्रोवर का रोल बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन दमदार है. श्रुति हासन ने ठीक-ठाक अभिनय किया है. गौतम गुलाटी का भी सहज अभिनय है. दर्शन जरीवाला के बारे में कहना ही क्या. उनके अभिनय ने लोगों को गुदगुदाया है.

डायरेक्टर अजय पन्नालाल ने इस साधारण सी लव स्टोरी को अच्छे ढंग से दर्शकों के सामने पेश करने की कोशिश की है. जिसमें वो सफल भी हुए हैं. इस फिल्म में खास बात है कि आप खुद को कहानी के साथ कनेक्ट कर पाते हैं. और मेरे ख्याल से किसी भी फिल्म की सफलता का पैमाना भी यही होना चाहिए. कहीं भी जबरदस्ती का कुछ घुसाने की कोशिश नहीं की गई है. वो चाहे को संगीत हो. या कोई फालतू का एक्शन सीन. फिल्म के कुछ मोमेंट्स आपको अंत तक याद रह जाएंगे. जैसे मोहल्ले के दोस्त. क्रिकेट मैच. जागरण मंडली. औरतों का आपस में कटोरी का लेन देन. और भी बहुत कुछ.

अगर हल्की फुल्की मोहल्ले वाली कहानियां आपको देखनी पसंद है, तो एक बार जरूर देख सकते हैं। जहां तक मुझे लगता है राजकुमार राव की ये फिल्म लोगों के दिलों को छू जाएगी।



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