अयोध्या विवाद: SC में 14वें दिन सुनवाई पूरी, हिंदू पक्षकार के वकील बोले- तीन गुंबद वाली इमारत नहीं थी मस्जिद

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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में 14वें दिन की सुनवाई पूरी. रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा- विवादित इमारत बनवाने वाला कौन था, इस पर संदेह है. मीर बाकी नाम का बाबर का कोई सेनापति था ही नहीं. 

रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने कहा कि तीन गुंबद वाली वो इमारत मस्ज़िद नहीं थी. मस्ज़िद में जिस तरह की चीज़ें ज़रूरी होती हैं, वो उसमें नहीं थी. रामजन्म भूमि पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने अपनी दलीलें रखीं. उन्‍होंने तीन किताबों का ज़िक्र करते हुए कहा कि आईने अकबरी, हुमायूंनामा में बाबर द्वारा बाबरी मस्जिद बनने की बात नहीं है. तुर्क-ए-जहांगीरी किताब में भी बाबरी मस्जिद के बारे में कोई जिक्र नही हैं.

अयोध्या मामले में मंगलवार को नया मोड़ तब आया जब कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने में मुगल बादशाह बाबर की कोई भूमिका नहीं थी. इसे किसी मीर ताश्कंदी या मीर इस्पहानी ने किया था मीर बकी ने नहीं.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की विशेष पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब रामजन्मस्थान पुनरोध्दार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि तमाम दस्तावेजों, गजेटियर तथा फिरंगी यात्रियों के विवरण में इस स्थान पर प्राचीन मंदिर होने का जिक्र है, लेकिन मस्जिद बनी होने की इन्होंने अलग अलग तारीखें बताई हैं.

उन्होंने कहा कि विद्वान एलेक्जेंडर फ्यूरर ने 1888 में प्रकाशित अपनी पुस्तक में कहा है कि मस्जिद मीर खां ने 1523 में तामीर करवाई थी. उसने कहा है कि यहां एक भव्य मंदिर था. लेकिन मीरखां 1523 से बहुत पहले अफगानिस्तान में मारा गया था.
 



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