NRC में नाम जोड़ने के लिए 10 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़े गए 2 अधिकारी, कोर्ट में किए जायेंगे पेश

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एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में नाम जोड़ने की एवज में रिश्वत लेते हुए दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. टीम ने गुरुवार को 48 साल के सैयद शाहजहां और 27 साल के राहुल पाराशर को 10 हजार रुपये बतौर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है. इन दोनों को गुवाहाटी स्थित दिसपुर एनआरसी केंद्र नंबर आठ के कार्यालय से दोनों को गिरफ्तार किया गया है.

एसीबी के निदेशक ने कहा, 'सैयद शाहजहां फील्ड लेवल अधिकारी और राहुल पराशर असिस्टेंट लोकल रजिस्ट्रार ऑफ सिटिजन रजिस्ट्रेशन के पद पर तैनात हैं. दोनों के खिलाफ दिसपुर जिले की आनंद नगर निवासी कजरी घोष ने शिकायत की थी. महिला के अनुसार उसका नाम एनआरसी के ड्राफ्ट में शामिल नहीं हैं. शिकायतकर्ता ने जब एनआरसी ड्राफ्ट में नाम शामिल करने के लिए आवेदन दिया, तो अधिकारियों ने उससे 10 हजार रुपए बतौर रिश्वत मांगे.

निदेशक ने बताया, ‘आरोपियों के पास से रुपए और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर लिए गए हैं. एनआरसी सेवा केंद्र पर भी जांच की जा रही है. महिला के आवेदन में दोनों आरोपियों ने गलतियां निकाली थीं. इन्हीं गलतियों को दूर करने के एवज में महिला से 10 हजार रुपए की मांग की गई थी. दोनों को फिलहाल अदालत में पेश किया जाएगा.

पिछले साल जुलाई में जब एनआरसी की सूची आई थी तब 40 लाख लोगों का नाम सूची में शामिल नहीं था. जिससे कि उनकी नागरिकता पर खतरा पैदा हो गया था. इसके बाद पूर्वोत्तर के दो राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में काफी हंगामा हुआ था. उस समय एनआरसी में 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल थे जबकि 3.29 करोड़ लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था.

उच्चतम न्यायालय ने आठ मई को सुनवाई करते हुए एनआरसी की समय सीमा बढ़ाने से साफ मना कर दिया था। अदालत ने आदेश दिया था कि एनआरसी का अंतिम प्रकाशन 31 जुलाई तक हो जाना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एनएफ नरीमन की बेंच ने एनआरसी सूची में छूटे लोगों की नागरिकता के दावों को वंशावली और भूमि के रिकॉर्ड के आधार पर शामिल करने पर कहा था.



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