आम्रपाली ग्रुप के CMD और दो निदेशकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दिल्ली पुलिस को दी गिरफ्तारी की इजाजत

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आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट मामले में कंपनी के सीएमडी और दो निदेशकों की मुश्किलें और बढ़ गई है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इजाजत दी है कि वो आम्रपाली के सीएमडी और दो निदेशकों को गिरफ्तार कर सकती है. दिल्ली पुलिस ने आपराधिक मामले में गिरफ्तारी की इजाजत मांगी थी. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने फॉरेंसिक एडिटर को सहयोग न करने पर करीब 200 कंपनी के लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. आम्रपाली के सीएमडी और दो निदेशक फिलहाल नोएडा पुलिस की हिरासत में हैं ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस को इजाजत मिलने के बाद अब आपराधिक मामले में इन लोगों की गिरफ्तारी हो सकेगी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के फाइव स्टार होटल, लग्जरी कारें, मॉल, FMCG कंपनी, फैक्टरी कॉरपोरेट ऑफिस और होमबॉयर्स के पैसे से खरीदी गई अन्य संपत्ति को अटैच करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल को ये संपत्ति बेचने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने आम्रपाली के सीएमडी और निदेशकों को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ आपराधिक केस शुरू किए जाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप से जुड़े लोगों को कहा था कि होम बायर्स के पैसे जो भी मिले हैं वो सुप्रीम कोर्ट के खाते में सोमवार तक जमा कर दें.  कोर्ट ने कहा कि जो ये नहीं करेगा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2015 से 2018 तक के बीच के कागजात सोमवार तक फोरेंसिक ऑडिटर्स को दिए जाए. सुप्रीम कोर्ट ने NBCC से भी पूछा था कि किस तरह आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट कैसे पूरे होंगे. आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा की और से माना गया था कि होम बॉयर्स के 2900 करोड़ रुपये दूसरी कंपनियों व अफसरों को बतौर गिफ्ट व अन्य तरीके से दिए गए.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि तीनों निदेशक पुलिस निगरानी मे रहकर अपने ग्रुप की 46 कंपनियों के दस्तावेज़ों का केटलाग तैयार करके फ़ारेंसिक आडिटर्स को सौंपेंगे. कोर्ट ने कहा था कि तीनों निदेशक रोज़ सुबह 8 से शाम 6 बजे तक दस्तावेज़ों का केटलाग बनवाएंगे. इसके बाद पुलिस निगरानी मे नोएडा के सेक्टर-62 स्थित होटल में रहेंगे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीनों निदेशकों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था. तीनों निदेशकों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार फॉरेंसिक ऑडिट के लिए अपने प्रोजेक्टों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न कराने का आरोप है.



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