ताज़ा खबर

असम विवाद के चलते अमित शाह ने पश्चिम बंगाल जाने की ठानी, कहा- जरुर जाऊंगा, दम है तो गिरफ्तार कर लें

2018-08-02_AmitShahandMamta.jpg

असम नागरिकता विवाद पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच पहले से ही 'तू-तू,मैं-मैं' जारी है. अब शाह ने ममता बनर्जी को चुनौती दी है कि वो रैली के लिए कोलकाता जरूर जाएंगे, अगर दम है तो ममता बनर्जी उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं.
 
आपको बता दें कि अमित शाह 11 अगस्त को पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं. इस दौरान वो पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे. उन्होंने कहा 'यह मायने नहीं रखता है कि मुझे अनुमति मिलती है या नहीं, मैं कोलकाता जरूर जाऊंगा. अगर राज्य सरकार चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. 

हालांकि ममता बनर्जी ने भाजपा अध्यक्ष की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कोलकाता पुलिस ने तुरंत एक बयान जारी करते हुए घोषणा की कि उन्होंने रैली के लिए अमित शाह को पहले से ही अनुमति दे दी है. दरअसल, सोशल मीडिया में अनचाहे अटकलों को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने फिर से स्पष्टीकरण जारी किया है. आपको बता दें कि अमित शाह का ये बयान असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर भाजपा पर ममता बनर्जी के कथित हमले के एक दिन बाद आया है, जिसमें 40 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं. मंगलवार को ममता बनर्जी ने चेतावनी दी थी कि सरकार के इस कदम से गृह युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं. उन्होंने कहा था कि भाजपा लोगों को तोड़ने का प्रयास कर रही है. यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है. 

इस पर अमित शाह ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा था कि अलग-अलग प्रकार की भ्रांतियां फैलायी जा रही हैं. प्रांत-प्रांत के बीच झगड़े जैसा माहौल खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है. ममता बनर्जी बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों को 'वोट बैंक' की तरह देखती हैं. मैं इसकी घोर निंदा करता हूं.

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पर भी पलटवार करते हुए कहा है कि नागरिकता कोई उपहार नहीं है जिसे दिया या वापस लिया जा सके. दरअसल, जेटली ने कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मुद्दे पर देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ कर रही हैं. 

तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने जेटली की आलोचना करते हुए कहा कि संप्रभुता बेशक भारत की आत्मा है, धर्मनिरपेक्षता देश का आंतरिक विवेक है, लेकिन एक के बिना दूसरा अर्थहीन है. नागरिकता मूलभूत अधिकार है कोई उपहार या खिलौना नहीं. कृपया इस प्रकार विभाजनकारी खेल मत खेलिए और कृपया आप अपनी सेहत का ध्यान रखें. आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. 

वहीं, माकपा ने भी एनआरसी के मुद्दे पर कहा है कि असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी से जुड़ी सभी शिकायतों की गहनता से जांच होनी चाहिए और किसी भी भारतीय को सूची से बाहर नहीं छोड़ा जाना चाहिए.



loading...