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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया है. ये प्रस्ताव अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने पेश किया है. आपको बता दें आतंकी मसूद अजहर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना है. वह भारत में हुए पुलवामा आतंकी हमले के साथ-साथ अन्य कई हमलों का जिम्मेदार है.

ये प्रस्ताव बुधवार को पेश किया गया है. इससे पहले चीन ने वीटो का इस्तेमाल करते हुए मसूद अजहर को बचा लिया था. प्रस्ताव में अजहर को ब्लैक लिस्ट में डालने की मांग की गई है. राजनयिकों का कहना है कि ये देश चाहते हैं कि अजहर की संपत्ति जब्त हो और उसकी यात्राओं पर प्रतिबंध लगाया जाए. करीब दो हफ्ते पहले चीन ने वीटो लगाते हुए इसे टेक्निकल होल्ड पर डाल दिया था. चीन के इस कदम पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. इस मामले पर चीन ने कहा था कि मसूद आजहर पर प्रतिबंध से पहले जांच के लिए उसे समय चाहिए ताकि सभी पक्ष ज्यादा बातचीत कर सकें और एक अंतिम निर्णय पर पहुंचे जो सभी को स्वीकार्य हो.

वहीं जैश-ए-मोहम्‍मद 2001 से ही संयुक्‍त राष्‍ट्र की आतंकियों की सूची में शामिल है. चीन संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्‍थायी सदस्‍यों में से एक हैं. उसके अलावा अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन इसके स्‍थायी सदस्‍य हैं. इनमें से फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन अब तक मसूद को बैन करने के लिए यूएनएससी में प्रस्‍ताव रख चुके हैं.

इसके साथ ही अमेरिका ने चीन को इस मामले पर फटकार भी लगाई है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि चीन ने अप्रैल 2017 से उइगर समेत अन्‍य मुस्लिम अल्‍पसंख्‍यकों को हिरासत में रखा हुआ है. इनकी संख्‍या करीब 10 लाख है. चीन उन्‍हें रिहा करे. उन्‍होंने कहा कि मुस्लिमों के साथ चीन का यह पाखंड विश्‍व हरगिज बर्दाश्‍त नहीं करेगा. एक ओर चीन अपने यहां करीब 10 लाख मुस्लिमों का शोषण कर रहा है, दूसरी ओर इस्‍लामिक आतंकी समूहों को संयुक्‍त राष्‍ट्र में बैन करने से बचा रहा है.



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