दुष्कर्म के आरोपी फलाहारी बाबा दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा और 1 लाख का जुर्माना

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दुष्कर्म के आरोप में फंसे फलाहारी बाबा की किस्मत का फैसला हो चुका है. खबर के मुताबिक फलाहारी बाबा को बिलासपुर की 21 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया है, फलाहारी बाबा को अदालत ने दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही अदालत ने 1 लाख का जुर्माना भी लगाया है.

आपको बता दें कि 9 मार्च 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के बयान दर्ज हुए थे. अलवर के अरावली विहार थाना पुलिस ने फलाहारी बाबा के द्वारा विलासपुर की युवती से रेप किए जाने के मामले में 15 दिसम्बर 2017 को 84 दिन बाद एसीजेएम कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी थी. पुलिस ने कोर्ट में 40 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी. जिसमें पुलिस ने बाबा को दोषी मानते हुए धारा 506 ओर 376 (2एफ) के तहत आरोप लगाए गए थे.

आरोपी कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य उर्फ फलाहारी बाबा के बयान अपर जिला एवं सेशन जज संख्या-1 राजेंद्र शर्मा की अदालत में दर्ज किए गए. इस दौरान फलहारी बाबा से कोर्ट ने 88 लिखित सवाल किए गए थे. हालांकि इन सब के बावजूद मामले को लेकर फलारी बाबा के वकील अशोक शर्मा ने दावा किया था कि फलाहारी बाबा निर्दोष है और उनके बचाव के लिए सभी साक्ष्य अदालत के सामने रख दिए हैं, उन्हें पूरा भरोसा है कि अदालत के अंतिम फैसले में बाबा निर्दोष बरी होंगे.

अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर दर्ज करवाए गए 30 अभियोजन साक्ष्यों की गवाही के आधार पर कोर्ट ने लिखित रूप में 24 पेजों पर तैयार 88 सवालों के जवाब आरोपी फलाहारी बाबा से पूछे. इस दौरान आरोपी बाबा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से झूठा बताते हुए कहा था कि मैं निर्दोष हूं. अपर लोक अभियोजक योगेंद्र सिंह खटाना ने बताया कि इस मामले में अंतिम बहस 18 सितंबर को की गई लेकिन अदालत का समय समाप्त होने के बाद बहस को अंतिम नहीं सुनाया जा सका था. 

आपको बता दें कि 11 सितम्बर 2017 को बिलासपुर की 21 वर्षीय पीड़िता ने छत्तीसगढ़ के महिला थाना में जीरो एफआईआर दर्ज करवाई थी और बाबा के खिलाफ रेप का आरोप लगाया था. छत्तीसगढ़ पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद पीड़िता का मेडिकल और 164 के बयान दर्ज कर रिपोर्ट बनाया और अलवर पुलिस को फाइल भिजवा दी थी. जिसके बाद अलवर पुलिस ने अरावली विहार थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

इसी दौरान फलाहारी बाबा बीमारी का बहाना बना कर एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गया था. जहां डॉक्टरों के द्वारा उसको फिट घोषित किये जाने के बाद पुलिस ने 23 सितम्बर को अस्पताल से गिरफ्तार कर एसीजेएम कोर्ट 3 में पेश किया. जिसके बाद कोर्ट ने बाबा को 16 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.



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