पुरानी परमपराओं से मनाएं रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार, ध्यान रखें इन 5 बातों का

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इस साल रक्षाबंधन का अटूट श्रधा का त्यौहार 26 अगस्त को मनाया जायेगा, जिस कारण बाज़ार में भिन्न-भिन्न प्रकार की राखियाँ दिखाई देने लगी हैं. आधुनिकरण के कारण परम्पराओं में भी ख़ासा बदलाव देखा जा रहा है. 26 अगस्त को मनाया जायेगा. यह भी पढ़े: इस रक्षाबंधन बहनें रखें इन बातोँ का ध्यान

पुरानी परम्पराओं से रक्षाबंधन से इस त्यौहार को मनाने के लिए इन 5 चीज़ों का रखें ध्यान. दूर्वा-दूर्वा जो की गणेश जी को प्रिय है अर्थात इसका प्रयोग हम जिसे राखी बांध रहें है उसके विघ्नों का नाश हो तथा घर में बरक्कत करने के लिए करते हैं। जिस प्रकार इसका एक अंकुर बोने से हजारों संख्या में तेजी से अंकुर उगते है। उसी प्रकार से भाईयों के वंश की वृद्धि होती है। सद्गुणों का विकास होकर समृद्धि आती है।

अक्षत- चावल और हल्दी को मिलाकर अक्षत तैयार किया जाता है, जो देव गुरू बृहस्पति से सम्बन्धित है। गुरू देव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत न हो और सदा अक्षत रहे इसी लिए इसका प्रयोग किया जाता है.

केसर- केसर में उर्जा और शक्ति प्रचुर मात्रा में पायिजाती है। केसर का सीधा सम्बन्ध भी बृहस्पति ग्रह से होता है | केसर का प्रयोग करने से व्यक्तित्व में निखार आता है और पूरे वर्ष भर बृहस्पति देव आपकी रक्षा करते है

चन्दन- जीवन में सदाचार व और संयम की सुगंध फैलती रहे इस लिए चन्दन का प्रयोग बहने भाइयों को राखी बांधते वक्त करें, जो तन मन को शांत कान्तिमय रखता है.

सरसों के दाने- तीक्ष्ण बनने की सीख देने वाले सरसों के दानों का प्रयोग करने से बहने अपने भाइयों की कुशल कामन करसकती हैं. इन सभ 5 चीज़ों से बनी राखी बहने सर्वप्रथम भगवान् के चरणों में रख कर भाइयों कि लम्बी उम्र की कामना करें. इन पांच वस्तुओं को रेशम के कपड़े में रखकर सिलाई कर दे तत्पश्चात उसे कलावा में पिरो दे। इस प्रकार वैदिक राखी तैयार होती है। इस प्रकार से बनी हुयी वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमा अनुसार बांधने से पूरे वर्ष हमारी रक्षा होती है।

राखी बांधते वक्त इस मंत्रो का उच्चारण करें बहनें - येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल।।

शिष्य अपने गुरू को रक्षा सूत्र बांधते समय निम्न मंत्र का उच्चारण- येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां रक्षबन्धामि रक्षे मा चल मा चल।



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