बाबरी मस्जिद बनाने की लड़ाई जारी रहेगी, जमीन तोहफे में नहीं देंगे: मुस्लिम लॉ बोर्ड

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) का कहना है कि बाबरी मस्जिद की लड़ाई जारी रहेगी. न तो मस्जिद की जगह बदली जाएगी और न ही जमीन किसी को गिफ्ट में दी जाएगी. बोर्ड का कहना है कि अयोध्या मसले पर उसका रुख नहीं बदलेगा. एक बार मस्जिद बन गई तो फिर वहां हमेशा मस्जिद ही रहेगी. AIMPLB के सदस्य कमाल फारुखी ने रविवार को कहा कि बाबरी मस्जिद इस्लाम में विश्वास का अहम हिस्सा है. मुस्लिम मस्जिद को न तो मर्जी से छोड़ेंगे और न ही उसकी जमीन को बदलेंगे. मस्जिद की जमीन को तोहफे में भी नहीं दिया जाएगा. बाबरी मस्जिद, एक मस्जिद है और ये हमेशा यही रहेगी. इसे खत्म करने से हमारी पहचान खत्म नहीं होती. बाबरी मस्जिद दोबारा बनाने की लड़ाई जारी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट में भी हम ताकत से लड़ेंगे.

इससे पहले अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए वहां से मस्जिद को कहीं और ले जाने की बात करने वाले मौलाना सलमान नदवी को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की सदस्यता से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. 9 फरवरी को बोर्ड के कार्यकारी सदस्य सलमान नदवी ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में राम मंदिर का फॉर्मूला बताया था. यह बयान उन्होंने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के साथ बैठक के बाद दिया था. हालांकि, बोर्ड और इसके अन्य सदस्यों ने खुद को इस बयान से दूर कर लिया था. उन्होंने पहले ही कहा था  कि वह AIMPLB भी छोड़ भी सकते हैं. इसी को आधार बनाकर AIMPLB ने उन्हें बोर्ड से बाहर कर दिया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक AIMPLB की बैठक में कहा गया कि बोर्ड के सभी सदस्यों को वही बातें कहनी चाहिए जो बोर्ड का आधिकारिक स्टैंड होता है.

AIMPLB के सदस्य कासिम इलयास ने मौलाना नदवी को निकाले जाने की जानकारी देते हुए बताया कि समिति ने ऐलान किया कि AIMPLB अपने पुराने रुख पर कायम रहेगा कि मस्जिद को न तो गिफ्ट किया जा सकता है, न बेचा जा सकता है और न शिफ्ट किया जा सकता है. क्योंकि सलमान नदवी इस एकमत रुख के खिलाफ गए, इसलिए उनको बोर्ड से निकाला जाता है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की हैदराबाद में शुक्रवार को तीन दिवसीय बोर्ड मीटिंग शुरू हुई. बोर्ड मीटिंग में मौलाना नदवी की आलोचना की गई. मौलाना नदवी भी  हैदराबाद में गए थे और उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड मीटिंग में उनका अपमान किया गया. उन्होंने कमाल फारूकी और एस. क्यू. आर. इलयास पर अपने अपमान का आरोप लगाया था. मौलाना नदवी ने अपने फॉर्म्युले के बचाव में कहा कि वह शांति और सांप्रदायिक सौहार्द्र सुनिश्चित करना चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि AIMPLB में कुछ लोगों की तानाशाही चल रही है.

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