भारत में शादी के बाद जुर्म नहीं मैरिटल रेप, जबरन सेक्स के बाद पत्नी ने खटखटाया कोर्ट का दरवाज़ा

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जबरदस्ती अपनी पत्नी के साथ हो या फिर किसी और की पत्नी के साथ, गलत ही कहलाती है. एक शख्स ने इसे सही ठहराया है और दिल्ली हाई कोर्ट में ये दलील दे डाली, कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती क्‍योंकि ‘मैरिटल रेप’ भारत में अपराध नहीं है. 2013 में खान ने एक 20 साल की महिला से शादी की. बाद में महिला ने अपनी पति के खिलाफ बलात्‍कार और अननैचुरल सेक्‍स की FIR दर्ज करा दी. उसके बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए खान को 2014 में पत्‍नी के साथ जबदस्‍ती unnatural sex करने की शिकायत पर गिरफ्तार कर लिया था.

याचिकाकर्ता ने 2013 में महिलाओं के खिलाफ सेक्‍सुअल अपराधों को सख्त किए जाने के तहत हुए संशोधनों पर भी कानूनी स्थिति साफ करने की मांग की है. अपनी याचिका में, अब्‍दुल्‍ला खान ने दावा किया है कि बलात्‍कार से जुड़े IPC सेक्‍शंस में संसद द्वारा बदलाव किए जाने के बाद कानूनी ‘असंगति’ है. उन्‍होंने तर्क दिया कि IPC का सेक्‍शन 377 (Unnatural sex) सजा के योग्‍य है, 2013 के विशेष संशोधन मैरिटल सेक्‍स की रक्षा करते हैं चाहे वे बिना मर्जी ही क्‍यों न बनाये गए हों.

यानि बिना मर्जी के ज़बरदस्ती सेक्स करने में कोई सज़ा का प्रावधान नहीं है. लेकिन अननैचुरल सेक्‍स में सज़ा का प्रावधान है. दिल्ली हाई कोर्ट बेंच ने केन्‍द्रीय विधि मंत्रालय और दिल्‍ली सरकार से खान की इसी याचिका पर जवाब मांगा है. खान ने सेक्‍शन 377 के तहत साकेत कोर्ट में चल रहे अपने ट्रायल को चुनौती दी है. खान को 2014 में उनकी पत्‍नी की जबदस्‍ती unnatural sex करने शिकायत पर पुलिस ने गिरफ्तार किया था. चीफ जस्टिस जी रोहिणी और जस्टिस संगीता ढींगरा ने मामले की सुनवाई के लिए 29 अगस्‍त का दिन तय किया है.

अपनी पत्नी पर ज़बरन शारीरिक सम्बन्ध बनाने के आरोप से तो खान बरी हो गए थे. कोर्ट ने भी रेप के सभी आरोपों को खारिज़ कर दिया था और जनवरी 2015 में हाई कोर्ट से उसे ज़मानत भी मिल गई थी, लेकिन लेकिन अननैचुरल सेक्‍स के मामले में ट्रायल जारी है. इसमें सज़ा का प्रावधान भी है.
 



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