फर्जी स्टांप पेपर घोटाले के दोषी अब्दुल करीम तेलगी की मौत, अस्पताल में था भर्ती

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फर्जी स्टांप पेपर घोटाले के दोषी अब्दुल करीम तेलगी की गुरुवार को बेंगलुरु में मौत हो गई। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मौत की वजह मल्टीपल ऑर्गन फैल्योर है। तेलगी को 2001 में अजमेर से गिरफ्तार किया गया था। तब से वो जेल में था। उसे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत थी। कोर्ट ने उसे फर्जी स्टांप पेपर घोटाले में 30 साल की सजा सुनाई थी। वो बेंगलुरु के पाराप्पाना अग्रहारा सेंट्रल जेल में सजा काट रहा था। कई दिनों से तेलगी वेंटिलेटर पर था। जांच के दौरान, एजेंसियों को 18 शहरों में तेलगी के 123 बैंक अकाउंट्स का पता चला था।

इसी साल जुलाई में बेंगलुरु की डीआईजी डी. रूपा ने कहा था कि जेल में तेलगी को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जाता है। रूपा ने कहा था कि तेलगी को मसाज के लिए तीन या चार लोग दिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेलगी एचआईवी पॉजिटिव भी था। उसका इलाज चल रहा था।

तेलगी को 2007 में फर्जी स्टांप घोटाले में दोषी करार दिया गया था। उस पर 202 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।

तेलगी ने कर्नाटक के खानपुर रेलवे स्टेशन पर एक वेंडर के तौर पर कारोबार शुरू किया था। 1993 में भी उसे धोखाधड़ी के एक छोटे मामले में सजा हुई थी। कई साल बाद उसे हजारों करोड़ रुपए के फेक स्टांप पेपर घोटाले का मास्टर माइंड बताया गया। अजमेर से उसकी गिरफ्तारी हुई। 

स्टांप पेपर घोटाला 1993 से 2002 के बीच हुई। वो जाली स्टांप्स को हैवी डिस्काउंट पर बेचता था। देशभर में उसके कई एजेंट्स थे जो कमीशन पर काम करते थे। 2001 में जब उसकी गिरफ्तारी हुई तो कुछ और लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। जांच के दौरान कुछ नेताओं और पुलिस अफसरों के नाम भी सामने आए। तेलगी के खिलाफ 11 राज्यों में करीब 40 केस दर्ज किए गए थे।



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