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पश्चिम बंगाल

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के ममता के फैसले को HC ने किया रद्द, लगाई राज्य सरकार को फटकार

कोलकाता हाई कोर्ट ने आज दुर्गा विसर्जन मामले पर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उसका फैसला पलट दिया. अदालत ने मुहर्रम के दिन दुर्गा विसर्जन पर रोक का फैसला खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि 30 सितंबर को रात 12 बजे तक विसर्जन किया जा सकेगा.

हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार न पैदा करे ममता सरकार : हाईकोर्ट

पश्चिम बंगाल में विसर्जन को लेकर चल रहे विवाद के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई. बुधवार को कोर्ट ने सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप दो समुदायों के बीच दरार पैदा क्यों कर

कोलकाता मेट्रो कोच के दरवाजे नहीं खुले, भीतर के यात्री हुए परेशान, मेट्रोसेवा बाधित

दमदम जानेवाली नॉन एसी मेट्रो ट्रेन के दरवाजे शहीद खुदीराम स्टेशन पर नहीं खुलने से कोलकाता मेट्रो रेल सेवा आज(16 सितंबर) को कुछ समय के लिए व्यस्त समय में प्रभावित हो गई. मेट्रो रेलवे प्रवक्ता ने कहा कि जैसे ही ट्रेन शहीद खुदीराम स्टेशन पर पहुंची . यात्री बाहर निकलन

कोलकाता: रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में हुई ज़ोरदार रैली, जलाया सान सू की का पुतला

कोलकाता में 10 मुस्लिम कल्याण संगठनों ने एक रैली का आयोजन कर म्यांमार में रोहिंग्याओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को बंद करने की मांग की और म्यांमार की स्टेट काउंसलर एवं नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की का पुतला जलाया. इस रैली के चलते शहर करीब चार घंटे के लिये

3 दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह

रविवार की रात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पश्चिम बंगाल में पार्टी का विस्तार करने के लिए 3 दिवसीय यात्रा के तहत कोलकाता पहुंच गए हैं. शाह यहां करीब रात 11 बजे पहुंचे. वे सोमवार को पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे. भाजपा बीजेपी B

बंगाल के कॉलेजों में लगाईं ममता बनर्जी ने मोदी की स्पीच के टेलिकास्ट पर रोक, BJP ने बताया कदम को दुर्भाग्यपूर्ण

नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को देश की सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के स्टूडेंट्स को स्पीच देंगे। इसके लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने इसके लाइव टेलिकास्ट का ऑर्डर दिया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया है। उन्होंने राज्य की सभी यूनिवर

अमीर हैदर जैदी को आरएसएस नेता राकेश सिन्हा के समर्थन में ट्वीट करना पड़ा महंगा

सीपीआई नेता अमीर हैदर जैदी को आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा के समर्थन में किया गया ट्वीट महंगा पड़ता दिखाई दे रहा है। सीपीआई ने अपनी पार्टी के नेता के इस कदम पर उन्हें नोटिस थमा

कोलकाता: रद्द हुआ RSS प्रमुख मोहन भागवत का प्रोग्राम, भड़के संघ प्रवक्ता ने की निंदा

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी की सरकार और आरएसएस आमने-सामने आ गए हैं. कोलकाता के महाजाति सदन ऑडिटोरियम में आरएसएस की बुकिंग कैंसल कर दी गई है. इस ऑडिटोरियम में आरएसएस प्रमुख मोह

TMC सांसद सुल्तान अहमद का हुआ निधन, ममता बनर्जी ने सीबीआई पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व केंद्रीय मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद की मौत को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ममता ने कहा कि सुल्तान की उम्र अभी इतनी भीनहीं थी कि उनकी मौत हो जाए. उनका आरोप है किसुल्तान की मौत

मोहर्रम के दौरान नहीं होगा दुर्गा विसर्जन, ममता सरकार का आदेश

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने दुर्गा मुर्ति विसर्जन पर एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मोहर्रम के जुलूसों के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी है। कोलकाता में इस बारे में दुर्गा पूजा के आयोजकों के साथ मुख्यमंत्

पश्चिम बंगाल के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी को मिली बड़ी हार

पश्चिम बंगाल में सात स्थानीय निकायों के लिए हुए चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने क्लीन स्वीप किया है. इन चुनावों में राज्य में दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए बीजेपी नंबर दो पर रही. राज्य में एक तरह से मुख्य विपक्ष ओपोज़ि

कोलकाता: शिलॉन्ग की रहने वाली एयरहोस्टेस की बॉडी सुबह अपार्टमेंट के बाहर मिली, रहस्यमय हालत में मौत

इंडिगो एयरलाइन्स की एक एयरहोस्टेस की रहस्यमय हालत में मौत हाे गई। शिलॉन्ग की रहने वाली क्लारा खोंगशीक (22) की बॉडी बुधवार सुबह अपार्टमेंट के बाहर सड़क पर सेमी न्यूड हालत में मिली। एयरहोस्टेस ने मंगलवार रात अपार्टमेंट के चौथी मंजिल पर स्थित अपने फ्लैट पर बर्थडे पार्टी दी थी। पु

पश्चिम बंगाल : फेसबुक पोस्ट पर उत्तरी 24 परगना में भड़की सांप्रदायिक हिंसा, फेंके बम, घरों में तोड़फोड़

समाज बेहद संवेदनशील होता जा रहा है. थोड़ी सी कहा-सुनी भी बड़े झगड़े में तब्दील हो जाती है. वहीं, अब खबर है कि फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई. जिसके बाद राज्य सरकार ने स्थिति पर काबू पान


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.