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तमिलनाडु

कमल हासन से मिले केजरीवाल, दोनों ने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ेंगे

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आज चेन्नई में फिल्म अभिनेता कमल हासन से मुलाकात की. कमल हासन के घर पर हुई इस मुलाकात के दौरान केजरीवाल के साथ आशुतोष और संजय सिंह भी थे. मुलाकात कमल हासन के चेन्नई स्थित आवास पर हुई. कमल हासन ने केजरीवाल से मीटिंग के बाद सांप्रदायिकता और भ्रष्ट

तमिलनाडु : दिनाकर गुट को बड़ा झटका, पलानीसामी को हटाने की मांग कर रहे 18 विधायक अयोग्य करार

तमिलनाडु स्पीकर ने टीटीवी दिनाकरन ग्रुप के 18 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया है. ये 18 विधायक मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी को हटाए जाने की मांग कर रहे थे. तमिलनाडु के स्पीकर पी धनपाल ने AIADMK के 18 विधायकों को 1986 तमिलनाडु असेंबली म

तमिलनाडुः AIADMK की बैठक में बड़ा फैसला, जेल में बंद शशिकला को पार्टी से निकाला

एआईएडीएमके ने आज अहम फैसला लेते हुए पार्टी की महासचिव वीके शशिकला को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. बता दें कि वीके शशिकला फिलहाल जेल में बंद है. आज पार्टी कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई जिसमे यह बड़ा फैसला लिया गया. तमिलनाडु के मंत्री आर

कोयंबटूर में बस स्‍टैंड की छत गिरने से 9 लोगों की मौत, कई जख्‍मी

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में गुरुवार को बड़ा हादसा हुआ. कोएंबटूर के सोमानुर में बस स्टैंड की छत गिरने से 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए. पुलिस और प्रशासन ने मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है.प्रशासन के अनुसार अभी मलबे में कुछ और

तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी के द्वारा बुलाई बैठक में पहुंचे केवल 111 विधायक

तमिलनाडु विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराए जाने की विपक्षी दलों की मांग के बीच राज्य में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के 111 विधायक मंगलवार को चेन्नई मेंमुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी द्वारा बुलाई गई विधायकों की बैठक में शामिल हुए. राज्य के मत्स्यपालन मंत्री और वरिष्ठ अन्नाद्रमुक ने

मद्रास हाई कोर्ट ने दिए ब्लू व्हेल गेम को बैन करने के तरीके ढूंढने के आदेश

जानलेवा ब्लू व्हेल गेम पर मद्रास हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने सोमवार को सरकार से कहा कि वो इस गेम को बैन करने का तरीका खोजे। हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को इस बारे में डाइरेक्शंस भी जारी किए। बता दें कि करीब एक हफ

सुसाइड कर चुकी NEET पिटीशनर के पिता ने उठाया सवाल, मेरी बेटी ने क्या गलत किया था?

नेशनल एलिजिबिलिटी एंड एंट्रेस टेस्ट (NEET) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर करने वाली दलित स्टूडेंट एस. अनिता के सुसाइड करने के बाद उनके पिता ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने क्या गलत किया था, जो हुआ उसका जवाब कौन देगा? बता दें कि अनिता ने शुक्रवार

NEET के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन, अनिश्चतकालीन भूख हड़ताल पर बैठे 14 छात्र

मेडिकल कॉलेज में दाखिला ना मिलने के कारण आत्महत्या करने वाली अनीता की मौत के बाद तमिलनाडु में नीट के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हो रहा है. नीट को हटाने की मांग को लेकर त्रिची के 14 छात्रों अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. चेन्नई में विपक्षी पार्टियों के करीब 1500 कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग जगहों प

शर्मनाक: पीरियड्स को लेकर टीचर की पड़ी डांट,छात्रा ने की सुसाइड

यहां स्कूल की एक टीचर ने ऐसी शर्मनाक हरकत कीजिसके बाद छात्रा ने आत्महत्या कर ली.तमिनलाडु के तिरुनेलवेली जिले में 12 साल की लड़की ने छत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. दरअसल लड़की जब क्लास में थी तो उसके यूनिफॉर्म पीरियड का दाग लगा था, जिसे देख टीचर ने लड़की को फटकारा. लड़क

नहीं थम रहा है ब्ल्यू व्हेल गेम खेलने से होनी वाली मौतों का सिलसिला, तमिलनाडु के एक छात्र ने लटकाया खुद को फांसी पर

तमिलनाडु में जानलेवा गेमब्लू व्हेलसे मौत का पहला मामला सामने आया है. इस ऑनलाइन गेम से मदुरई में 19 वर्षीय कॉलेज छात्र विग्नेश की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक , बी.कॉम के द्वितीय वर्ष के छात्र विग्नेश ने बुधवार शाम को आत्महत्या कर ली. विग्नेश के पिता को उसका

दिनाकरण के 19 विधायकों ने समर्थन वापस लिया, मुश्किल में तमिलनाडु सरकार

तमिलनाडु में एक बार फिर सियासी संकट गहरा गया है. टी. टी. वी. दिनाकरण के वफादार 19 AIADMK विधायकों ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल सी.एच. विद्यासागर राव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी को पद से हटाने की मांग की. बताया जा रहा है कि पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम के नेतृत्व वाले धड़ों के

AIADMK के दो गुटों का हुआ विलय, पन्नीरसेल्वम बने डिप्टी सीएम और पलानीसामी रहेंगे CM

AIADMK के दो गुट के.पलानीसामी और ओ.पन्नीरसेल्वम एक हो गए हैं। दोनों नेताओं ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। पहले दोनों ने हाथ मिलाया। इस मौके पर सीएम पलानीसामी ने कहा कि पार्टी को 11 मेंबर वाली कोऑर्डिनेंस कमेटी चलाएगी। पन्नीरसेल्वम

शशिकला हो सकती हैं AIADMK से बाहर, अगले प्रमुख हो सकते हैं पन्नीरसेल्वम

बीते सोमवार को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की एक ज़रूरी बैठक संभावित है. खबरों के मुताबिक इस बैठक में शशिकला नटराजन को पार्टी महासचिव के पद से बर्खास्त का फैसला हो सकता है. इसके


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.