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राजस्थान

गणतंत्र दिवस मना रहे बच्चों पर गिरी आसमानी बिजली, 2 बच्चेां की मोैत

जिले में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरवर स्थित एक स्कूल में बिजली गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई आधा दर्जन स्कूली बच्चे झुलस गए। जिसमें से 6 बच्चे और चार शिक्षक हैं। सभी लोग स्कूल में गणतंत्र दिवस मना रहे थे।बस्सी व केकड़ी में आकाशीय बिजली गिरने के समाचार है। इनमें बस्सी में बिजल

अगली बार से JLF में नहीं बुलाई जाएंगी तस्लीमा, मुस्लिम संगठनों ने किया विरोध

सोमवार को जयपुर साहित्य सम्मेलन में बांग्लादेशी लेखिका और कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन के खिलाफ अचानक विरोध प्रदर्शन हो गया. जिसके बाद उन्हें आयोजनकर्ताओं ने अगले वर्ष से सम्मेलन में नहीं बुलाने का निर्णय लिया है. जानकारी के मुताबिक, JLF के आयोजनकर्ता संजय के

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में तस्लीमा बोलीं, भारत में तुरंत लागू हो यूनिफॉर्म सिविल कोड, मुस्लिम महिलाओं को मिले बराबरी का हक

बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) की पैरवी की है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत कर रहीं तस्लीमा ने सोमवार को कहा कि भारत में फौरन यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाना चाहिए। नसरीन पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से भी नारा

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में गाँधी परिवार पर गरमाए ऋषि कपूर, कहा- हर इम्पोर्टेंट एसेट इनके नाम पर ही क्यों?

जयपुर में चल रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में ऋषि कपूर गरमा गए हैं. फेस्टिवल के दूसरे दिन बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा ये कोई जरूरी नहीं कि देश का हर इम्पोर्टेंट एसेट एक ही फैमिली के नाम पर हो. देश में और भी ऐसे लोग हैं जि

सलमान को बड़ी राहत, आर्म्स एक्ट के 18 साल पुराने केस में जोधपुर कोर्ट ने किया बरी

बॉलीवुड के दबंग सलमान खान चार्टर प्लेन से अपनी बहन अलवीरासंग जोधपुर पहुंचे। जहां आज उनके किस्मत का फैसला होना था। जोधपुर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में गत 18 सालों से विचाराधीन मुकदमे में 18 जनवरी को फैसले की तारीख मुकर्रर किया था। कोर्ट के आस पास की सुरक्षा को बढ़

आर्म्स एक्ट केस में कोर्ट आज सुनाएगी फैसला, जोधपुर पहुंचे सलमान

नया साल सुपरस्टार सलमान खान के लिए मुसीबत भरा हो सकता है. बुधवार को हिरण शिकार से जुड़े 18 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में जोधपुर की अदालत सलमान खान को लेकर अहम फैसला दे सकती है. अगर वे इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 3 से लेकर 7 साल तक की सजा हो सकती है. ज

ATS के ASP की सुसाइड, पहले महिला फ्रेंड को मारी गोली

गुरुवार की रात जयपुर के जगतपुरा रोड पर बॉम्बे अस्पताल के सामने सरकारी कार में एक शख्स ने खुद को गोली मारकर सुसाइड कर ली. ये शख्स ATS में तैनात एडिशनल ASP आशीष प्रभाकर थे. खुद को गोली मारने से पहले उन्होंने उनके साथ बैठी महिला फ्रेंड को गीली मारकर मौत के घाट उतार दिया. <

प्रसिद्ध मैडम तुसाद म्यूजियम की तर्ज पर पिंक सिटी में खुला देश का पहला वैक्स म्यूजियम

वैसे तो जयपुर कई ख़ास बातों से जाना जाता है. राजा-महाराजा के महल, उनकी शान-ओ-शौकत, उनका रख-रखाव इत्यादि. लेकिन अब ये और भी किसी बात के लिए जाना जायेगा. जी हाँ! देश को मिल गया है उसका पहला वैक्स म्यूजियम.जयपुर में लंदन के प्रसिद्ध मैडम तुसाद म्यूजियम की तर्ज पर आज से वैक्स

अब मिलेगा 5 रुपए में नाश्ता और 8 रुपए में खाना, अन्नपूर्णा रसोई योजना का शुभारंभ

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य में आम नागरिकों को सस्ती एवं रियायती दरों पर पौष्टिक और स्वच्छ आहार उपलब्ध कराने की शुरूआत की है। मुख्यमंत्री ने इस योजना का नाम अन्नपूर्णा रसोई रखा है, जिसकी टैगलाइन है: सबके लिए भोजन, सबके लिए सम्मान। योजना के तहत 5

'अंबानी-अडानी को पहले से पता था नोटबंदी के बारे में' : भाजपा विधायक

अब तक तो विपक्ष मोदी सरकार पर यह आरोप लगा रहा था कि PM नरेंद्र मोदी के करीबियों को नोटबंदी के बारे में पहले से ही पता था, लेकिब अब भाजपा के ही एक एमएलए ने अपनी सरकार के खिलाफ यह दावा किया है. भाजपा विधायक भवानी सिंह राजावत ने अपने इस दावे से अपनी ही सरकार को कटघरे में खड


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  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.
     

  • स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    कहते हैं जिसने अपनी मातृभाषा में पकड़ मजबूत करली वही इंसान जीवन में सफल है और मातृभाषा के उत्थान के लिए हमें ही कदम उठाने पड़ेंगे. 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा हासिल है और हिंदी भारत में बोलचाल के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया था. हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 

    1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी को जनमानस की भाषा बताया था. साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि ‘संघ की राज-भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था. इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी लागू की गई तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोगों के बीच से विरोध के सुर भी उठने लगे और फिर अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. यही कारण रहा है कि हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा.

    आज पूरा विश्व ग्लोबल हो गया है. इस दौर में भाषा ने भी अपना रूप बदल लिया है. हिंदी की जगह अंग्रेजी हो गया है. मज़े की बात है जिसे हिंदी नहीं बोलनी आती उसे भी अच्छी नौकरी मिलती है क्यूंकि उसे अंग्रेजी बोलनी आती है. हिंदी आये या न आये, लेकिन “इंग्लिश” आनी ज़रूरी है. अपनी ही भाषा का अपने ही देश में इस तरह से ह्रास होना निंदनीय है.

    1991 के बाद भारत में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. नई प्रौद्योगिकी और इससे उपजते हुये सेवा और उद्योग देश की अर्थ, नीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव हुए. इस बदलाव का भाषा पर भी जबरदस्त असर पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई को समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से मातृभाषा उजड़ने लगी है. इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाया जाने लगा. इस पूरे सप्ताह सरकारी विभागों और विद्यालयों में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ताकि हिंदी को बढ़ावा दिया जा सके और ज़्यादा लोग इसका प्रयोग उतने ही स्वाभिमान से करे जैसे इंग्लिश का करते हैं. 

    आज सभी जगहों पर इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी का चलन भी बढ़ा है. लेकिन नई पीढ़ी कहीं इससे पूरी तरह से वंचित न रह जाए इसलिए समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए प्रयास कर रहा है. हर तबका अपने-अपने हिसाब से हिंदी का उत्थान करने का प्रयास कर रहा है. कवि अपनी कविताओं के ज़रिये, साहित्यकार अपने साहित्य के ज़रिये, शिक्षक अपनी विद्या के ज़रिये और घर में माता-पिता अपने संस्कारों के ज़रिये. ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है और आगे भी करता रहूँगा. मैं राज महाजन अपने तरीके से हिंदी के उत्थान में जुड़ा हूँ. हो सकता है मेरा करना काफी नहीं होगा. लेकिन मैंने अपने ही बूते पर एक शुरुआत की है जिससे मैं आने वाली पीढ़ी को हिंदी का महत्व समझा सकूँ. मेरा मानना है अगर समाज को उन्नत और उत्कृष्ट बनाना है तो पहले अपनी जड़ों को मजबूत और संमृद्ध बनाना होगा. इसके लिए भाषा को पतन से बचाना होगा. ज़रूरी नहीं कि उत्थान तभी होगा जब हम रोज हिंदी बोलेंगे. उत्थान तब होगा जब हिंदी बोलने पर शर्म महसूस नहीं करेंगे. पूरी आत्मीयता से हिंदी को अपनाएंगे, हिंदुत्व का विकास हिंदी से ही होगा. आज हिंदी दिवस पर मैं सभी को इस ओर प्रेरित करता हूँ और आने वाली पीढ़ी से एक 
    गुज़ारिश करता हूँ कि अंग्रेजी का प्रयोग तो करें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें जिनमें  हिन्द और हिंदी समाई है. हिंदी से जुड़ना मेरे लिए गौरव का विषय है.    

  • श्रद्धा और उल्लास का प्रतीक है जन्माष्टमी

    आज है गोकुल के नटखट ग्वाले कृष्ण का जन्मदिन यानि “जन्माष्टमी”. कहते हैं जब नन्हे कान्हा ने मामा कंस के  कारागार में जन्म लिया था तब वहां मौजूद सभी पहरेदारों को निद्रा ने अपने वश में कर लिया था. उनके जन्म लेते ही उस कारागार में एक आलौकिक प्रकाश पुंज छा गया था जिससे सभी की आँखे कुछ पलों के लिए चुंधिया गईं थीं. नन्हे कान्हा के तेज के आगे समस्त भू लोक नमन करने लगा था. जैसे-जैसे कान्हा बढ़े होते गए वैसे-वैसे उनकी लीलाएं भी बढ़ती चली गई. जब-जब उनके भक्तों को उनकी आवश्यकता पड़ी, तब-तब भगवान कृष्ण ने सहारा दिया. कभी द्रौपदी का भाई बनकर, कभी अर्जुन का सखा बनकर, कभी सुदामा से अपनी मित्रता निभाकर, कभी डूबते का सहारा बनकर, कभी गोवर्धन उठाकर भक्तों का तारक बनकर, तो कभी कर्तव्य का मोल बताने के लिए महाभारत के युद्ध का आगाज़ कराकर. एक वही इस समस्त जगत में हर रूप में, कण-कण में विद्यमान है. आज का दिन उन्हीं की भक्ति में रमने का है. "गोविन्द मेरो है गोपाल मेरो है, समस्त जगत में इक तू ही मेरो है”  

    भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के ही अवतार हैं जिन्हें सोलह कलाएं प्राप्त हैं. उन्होंने ही प्राणीमात्र को संदेश दिया कि फल की इच्छा रखना व्यर्थ है सिर्फ कर्म ही मनुष्य का अधिकार है. जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जनमोत्स्व और मैं राज महाजन इस पावन पर्व पर कुछ कहना चाहता हूँ जन्माष्टमी की रात्रि को मोह-रात्रि भी कहा गया है क्यूंकि इस रात्रि में मनुष्य मोह-माया के बंधन से मुक्त हो जाता है. ऐसी मान्यता है जन्माष्टमी के दिन व्रत-उपवास रखने से हर मनोकामना पूरी होती है. बाल गोपाल के जन्म से समस्त संसार तर गया था. भगवान श्री कृष्ण ने कर्म को प्रधान कहा था लेकिन आज कलियुगी युग में कर्म की प्रधानता कहीं खो सी गई है, इसलिए भी जन्माष्टमी का महत्व यहाँ और भी ज़्यादा बढ़ गया है. मेरा भी मानना यही है कि कर्महीन मनुष्य को फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए. तो आईये नन्हे गोपाल की भक्ति में आज का यह शुभ दिन अर्पण करदें. सर्वगुण संपन्न मोहन की भक्ति कीजिये क्यूंकि भक्ति में ही शक्ति है. बाल गोपाल को अपने मन में बिठाईये और इस जगतमय बंधन से मुक्त हो जाईए. श्रद्धा और उल्लास से भरे इस पर्व का आनंद उठाईये. एक बार फिर मेरी यानि राज महाजन की तरफ़ से इस पावन पर्व की हार्दिक बधाई.