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उड़ीसा

भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जज और चार अन्य गिरफ्तार

सीबीआई के सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के एक मामले में ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व जज इशरत मसरूर कुद्दुसी और चार अन्य को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी कल आठ स्थानों पर वि

सीशोर चिटफंड मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, बीजेडी विधायक प्रभात विस्वाल को किया गिरफ्तार

मंगलवार सुबह सीबीआई ने सीशोर चिटफंड मामले में ओड़िशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल के विधायक को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार विधायक का नाम प्रभात विस्वाल है. सीबीआई ने विस्वाल और उनकी पत्नी पर सीशोर ग्रुप से 29 लाख रुपये के हेराफेरी का आरोप लगाया है. बताया जा रहा

ओडिशा: बीजेडी नेता ने की अमित शाह पर बयानबाज़ी, कहा शाह हैं राजनितिक ‘ब्लू व्हेल’

ओडिशा की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेडी ने अमित शाह पर हमला करते हुए उनकी तुलना जानलेवा आनलाइन गेम ब्लू व्हेल चैलेंज से की है. बीजेडी महासचिव एवं पूर्व मंत्री अरुण साहू ने ओडिशा के युवाओं से अपील की कि वे अमि

केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा सांसद को लिखा हिंदी में पत्र, उड़िया में मिला जवाब

केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेद्र सिंह तोमर ने ओडिशा के ढेंकानाल सीट से बीजू जनता दल के सांसद तथागत सत्पथी को हिंदी में पत्र लिखा तो सत्पथी ने लिखकर भेजाकिमाननीय केंद्रीय मंत्री जी ने हिंदी म

ओडिशा : विपक्ष पर केंद्रीय मंत्री सुप्रियो का तंज, कहा- वे अंडे फेकेंगे तो मैं ऑमलेट बना लूंगा

ओडिशा के दौरे पर गए केंद्रीय मंत्रीबाबुल सुप्रियोका जब वहां कुछ पॉलिटिकल वर्कर्स ने विरोध किया तो उन्होंने कहा- आप की मर्जी। आप चाहें तो मुझ पर अंडे फेंक सकते हैं, मैं नॉन वेजिटेरियन हूं और उनका आमलेट बनाकर खा लूंगा। यूनियन मिनिस्टर बाबुल सप्रियो ओडिशा के दौरे पर आए हैं। यहा

कृषि मंत्री राधामोहन के काफिले पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने फेंके अंडे, 5 गिरफ्तार

किसानों का आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है. केंद्र सरकार का कहना है कि कांग्रेस इस आंदोलन को आग दे रही है. वहीं, प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शांति बहाली करने की अपील कर रहे हैं और अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे हैं. इसी बीच खबर मिल रही है कि केंद्र

ओडिशा: जगतसिंहपुर जिले में ट्रक- ऑटो की भिड़ंत, 8 की मौत, 2 घायल

ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में शनिवार को एक ऑटो रिक्शा और एक ट्रक के बीच टक्कर में एक नाबालिग समेत आठ लोगों की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए. पुलिस ने कहा कि दुघर्टना जगतसिंहपुर जिले में चंदोल स्क्वेयर के पास जगतसिंहपुर-माछगांवसड़क पर हुई. जगतसिंहपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक (आईआ

परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम स्वदेशी पृथ्वी-2 मिसाइल का परीक्षण सफल

भारत ने देश में निर्मित एवं परमाणु हथियारले जाने में सक्षम पृथ्वी 2 मिसाइल का ओडिशा में एक परीक्षण रेंज से सफल पायलट परीक्षण किया. सेना ने इस्तेमाल के दौरान इसका परीक्षण किया. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सतह से सतह पर मार करने में सक्षम और 350 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली इस मिसाइल का परीक

PM मोदी का भुवनेश्वर में रोड शो, बीजेपी की बैठक में लेंगे हिस्सा

बीजेपी की नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग में शामिल होने के लिए नरेंद्र मोदी शनिवार दोपहर को यहां पहुंचे. एयरपोर्ट से निकलने के बाद उन्होंने रोड शो शुरू किया. इस रोड में वे करीब 8 किमी तक लोगों से मिलेंगे. बता दें कि बीजेपी आलाकमान को लगता है कि जिन राज्यों में 2019 तक चुनाव होने हैं वहां पर पार्टी

ओड़िशा: भगवान राम के ऊपर विवादित fb पोस्ट लिखने पर दंगा, भद्रक में लगा कर्फ्यू

भुवनेश्वर से लगभग 114 किमी दूर, ओडिशा के भद्रक शहर में सैकड़ों दुकानों को आग लगा दी गई और सड़कें बंद कर दी गईं. वहां दो समुदाय के बीच हिंसा के बाद ऐसा हुआ है. कल भगवान राम और सीता पर फेसबुक पर कथित अपमानजनक टिप्पणी से उत्पन्न होने वाली लड़ाई को हल करने में विफल रहने के बाद भद्रक में कर्

ओडिशा में SBI एटीएम खुद ही उगलने लगा कैश, बैंक को मैलवेयर अटैक का शक

एसबीआई एटीएम से बिना कार्ड स्वाईप किए ही पैसे निकलने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा का एक एसबीआई बैंक का एटीएम में बिना कार्ड स्वाईप किए ही पैसा उगलने लगा। जानकारी मिलने के बाद बैंक ने इसके फॉरेंसिंक ऑडिट का आदेश दे दिया है लेकिन एटीएम का अपने आप ही पैसे उगलने का यह इकलौता मामला नही

ओड़िशा नक्सली हमला: 30 हमलावरों ने डोयकल्लू रेलवे स्टेशन पर किया हमला, 2 बम धमाके भी किये

ओड़िशा से इस वक्त नक्सली हमले की बड़ी ख़बर आई है. जिससे वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया है. ओडिशा में नक्सलियों ने एक रेलवे स्टेशन पर हमला बोल दिया है. एएनआई के हवाले से आई ख़बर के मुताबिक, 30 से ज़्यादा नक्सलियों ने डोयकल्लू रेलवे स्टेशन पर हमला किया है. यह हमला शुक्रवार सुबह हुआ है. हमले के दौरान रे

झाँसी में ट्रेन से कटकर हुई महिला की मौत, पानी भरने ट्रेन से उतरी थी

झाँसी में ट्रेन के नीचे आने से एक महिला की मौत हो गयी है. महिला और उसका परिवार उत्कल एक्सप्रेस से सफ़र कर रहे थे. रेल्वे स्टेशन प्लेटफार्म 4 पर जैसे ही ट्रेन रुकी महिला पानी भरने उतरी. महिला उतरी ही थी और इतने में गाड़ी चला दी. गाड़ी को चलता देख महिला ने उसमें चढ़ने की कोशिश की और इसी


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.