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मणिपुर

मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स ने बनाई पानी पुरी वेंडिंग मशीन

भला पानीपुरी खाना किसे पसंद नहीं, मगर कई बार हाइजिन के चलते लोग इसका सेवन ठेले या नुक्कड़ पर किसी दुकान से करने मेंपरहेज ही करते है. लोगों के इसी समस्या का समाधान निकाला है मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों ने. वहां के स्टूडेंट्सछात

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं का केस दर्ज

मणिपुर के पूर्व सीएमओकराम इबोबी सिंहऔर अन्य के खिलाफ सरकारी फंड्स के कुप्रबंधन और गलत इस्तेमाल के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। अन्य जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, उनमें तीन पूर्व चीफ सेक्रेटरी डीएस पूनिया, पीसी लॉमकुंगा और ओ. नबाकिशोर सिंह शामिल हैं। खबरो

इरोम शर्मीला जल्द बंधेगी शादी के बंधन में, स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत करेंगी रजिस्ट्रेशन

आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मीला ने अपने जिंदगी से जुड़ा बहुत अहम फैसला लिया है जी हाँ इरोम शर्मिला जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं. इरोम एक ब्रिटिश नागरिक से शादी करने जा रही है जिसके लिए उन्होंने बुधवार को अपनी शादी के लिए सभी जरूरी कागजा

मणिपुर में बम धमाका, असम राइफल्स का एक जवान शहीद, 3 जवान गंभीर रूप से घायल

मणिपुर के उखरूल जिले में आज सुबह एक बम धमाका हुआ. जिसमें असम राइफल्स का 1 जवान शहीद हो गया. इस ब्लास्ट में तीन जवान घायल भी हुए. घायल जवानों को तुरंत नजदीक के अस्पताल ले जाया गया जहां उनका इलाज चल रहा है. धमाके के बाद पुरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घे

मणिपुर में कांग्रेस को झटका, 4 विधायक बीजेपी में शामिल

मणिपुर में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस के 4 विधायक सत्ताधारी पार्टी बीजेपी शामिल हो गए हैं. कांग्रेस के दो विधायक पहले ही पार्टी को अलविदा कह चुके हैं. आज जिन 4 विधायकों ने बीजेपी ज्वाइन की है उनमें वाई सुचंद्र भीऔर नगाथम होकिम शामिल हैं. मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह

मणिपुर: CM बीरेन सिंह ने विधानसभा में साबित किया बहुमत

भाजपा की मणिपुर में अग्निपरीक्षा सफल रही। बीरेन सिंह ने आज मणिपुर विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। बता दें कि मणिपुर विधानसभा चुनाव में दूसरे नबर पर रहने के बावजूद 32 विधायकों के समर्थन से भाजपा ने मणिपुर में सरकार बनाई है। मणिपुर में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है। 11 मार्च को घोषित

मणिपुर में पहली बार बनी BJP सरकार, बीरेन सिंह ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

मणिपुर में भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनगई है। बीरेन सिंह ने राज्य में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। राज्यपाल नजमा हेप्तुल्ला ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बीरेन सिंह ने चार महीने पहले ही कांग्रेस छोड़ी है। एन बीरेन को सोमवार को सर्वसम्मति से बीजेपीविधायक दल का ने

मणिपुर : पहली बार भाजपा की बनेगी सरकार, बीरेन सिंह 1 बजे लेंगे CM पद की शपथ

गोवा में भाजपा की सरकार बनने के बाद आज मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला एन बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगी और इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार भाजपा गठबंधन की सरकार बन जाएगी. जानकारी के मुताबिक, राज्यपाल ने बीजेपी विधायक दल के नेता बीरेन सिंह को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित

मणिपुर में भी बन सकती है बीजेपी की सरकार, एमएलए ने भी दिया सपोर्ट, गवर्नर से की मुलाकात

मणिपुर में सरकार बनाने का दावा कर रही बीजेपी को नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के चार विधायकों ने मंगलवार को सपोर्ट का एलान कर दिया है. विधायकों ने गवर्नर नजमा हेपतुल्ला से मुलाकात कर अपना समर्थन जाहिर किया है. बीजेपी लीडरशिप के साथ उनके 21, NPP प्रेसिडेंट और उनके चार एमएलए, एक कांग्रेस और एक एलज

मणिपुर के चुनावी नतीज़ो में कांटे की टक्कर, इरोम शर्मिला हारीं मिले गिनती के वोट

आज आ रहे हैं पांच राज्यों में हुए चुनावों के परिणाम. जिसमें मणिपुर भी शामिल है. मणिपुर में पिछले 15 सालों से कांग्रेस की सरकार है. मणिपुर विधानसभा की 60 सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव कराए गए, जिसमें पहले चरण में 38 सीटों के लिए 4 मार्च को जबकि दूसरे फेज में 22 सीटों के लिए 8 मार्च को वोट डाले ग

मणिपुर विधानसभा चुनाव : दुसरे चरण के लिए 22 सीटों पर मतदान शुरू

आज मणिपुर में को दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है. मतदाता 22 सीटों पर 98 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला कर रहे हैं. ये सीटें छह जिलों की हैं. इस चरण में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. उनके अलावा 24 और उम्मीदवार मैदान में हैं. चुनाव के लिए सुरक्षा की कड़ी तै

इंफाल में बीजेपी हेडक्वॉर्टर पर हमला, कांग्रेस का बताया हाथ

मणिपुर में चुनाव से पहले राजधानी इंफाल में बीजेपी हेडक्वॉर्टरपर हमले की खबर है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि इंफाल स्थित पार्टी के हेडक्वॉर्टर पर हुए हमले के पीछे कांग्रेस का हाथ है। एक अंग्रेजी टीवी चैनल की फुटेज में पार्टी के दफ्तर में तोड़फोड़ दिखाई दे रही है। वीडियो फुटेज में बिखरी-टूटी क

राहुल ने मोदी पर साधा निशाना, कहा- 'नागा समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करें पीएम'

चुनाव उत्तर प्रदेश में हो या अन्य किसी राज्य में भाजपा और कांग्रेस में टकरार देखने को मिलती है. अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस नागा शांति समझौते पर दस्तखत किए हैं, उसकी विषय-वस्तु को सार्वजनिक किया जाए. मणिपुर में एक च


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.