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महाराष्ट्र

इंडिया लौटना चाहता है अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, मोदी सरकार से कर रहा है 'सेटिंग'- राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चीफ राज ठाकरे ने नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को अपना फेसबुक पेज लॉन्च किया। सोशल मीडिया से दूरी रखने वाले राज ने पार्टी को बढ़ाने और युवाओं में पैठ बढ़ाने के लिए फेसबुक पेज लॉन्च किया। इस मौके पर राज ठाकरे ने कहा, मेरे पास खबर

बारिश से बेहाल मुंबई, स्कूल बंद, प्लेन रनवे से फिसला, 56 फ्लाइट डाइवर्ट

सोमवार देर रात से महाराष्ट्र के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इसके चलते बुधवार को शहर के सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे. जानकारी के मुताबिक

इकबाल कासकर की गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा, रैकेट के पीछे हो सकते है बड़े नेता शामिल

दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कासकर की गिरफ्तारी के बाद ठाणे पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मुंबई पुलिस कमिश्नर सीपी परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि इकबाल कासकर को रंगदारी मांगने के आरोप में धर-दबोचा गया है। कमिश्रर के मुताबिक कासकर को उसकी बहन हसीना

मुंबई में एक बार फिर भारी बारिश के कहर की चेतावनी जारी

मुंबई में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है. इस कारण मुंबई में घने बादल छा गए हैं. मंगलवार दोपहर कोजमकर बारिश हुई. बारिश अभी भी झमाझम हो रही है. भारी बारिश के कारण लो लाइन इलाकों में पानी भरने की खबरें आ रहीं हैं. हालांकि वेस्टर्न लाइन पर कोई दिक्कत पर

मुंबई : दाऊद का भाई इक़बाल कासकर गिरफ्तार, व्यापारी से की थी फिरौती की मांग

भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम के छोटे भाई इक़बाल कासकर को मुंबई पुलिस के थाणे क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी की कार्रवाई को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने अंजाम दिया. इक़बाल पर बिल्डर को धमकाने और फिरौती मांगने का आरोप

महाराष्ट्र : 8 साल के बच्चे पर 12 अवारा कुत्तों ने किया हमला, हुई मौत

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में एक 8 वर्षीय बच्चे पर 12 अवारा कुत्तों ने हमला कर दिया. इससे बच्चे की मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक , पूरी घटना शहर के कमातघर इलाके की है. बच्चे पर तकरीबन 2 घंटे तक कुत्तों ने हमला किया. बच्चे क

RK स्टूडियो: धुंआ-धुंआ हुआ मुंबई का 67 साल पुराना स्टूडियो

शहर के चेम्बूर इलाके में बने आर के स्टूडियो में आग लग गई। मौके पर फायर ब्रिगेड की 4 गाड़ियां आग बुझाने के काम में जुटी हुई हैं। स्टूडियो के इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रिक इंस्टालेशन, डेकोरेशन इक्विपमेंट विंग में आग लगी। आग से स्टूडियो को काफी नुक्सान

बॉम्बे हाई कोर्ट में बम होने की अफवाह के बाद खाली हुआ कोर्ट रूम, रेयान स्कूल मामले की होने वाली थी सुनवाई

बॉम्बे हाई कोर्ट के कमरा नंबर 51 में बम की खबर के बाद हड़कंप मच गया। बम की खबर मिलते ही बम निरोधक दस्ता कोर्ट परिसर पहुंच गया है। बताया जा रहा है बॉम्बे कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश को फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। मामले की जानकारी के बाद क

लड़की क पेट से मिला बालों का गुच्छा डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर निकाले बाल

मायानगरी मुंबई से ऐसी घटना सामने आई है जिसे सुनकर सब हैरान है. यहां एक लड़की के पेट से डॉक्टरों ने 750 ग्राम बाल निकाले हैं. एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के अनुसार लड़की को अपने ही बाल खाने की आदत थी. 20 साल की लड़की रेपेन्जल सिंड्रोम बीमारी से ग्रसित थी. लड़की का इलाज पूर

नासिक के अस्पताल में वेंटिलेटर-ऑक्सीजन की कमी से अगस्त में 55 बच्चों की मौत

सिविल हॉस्पिटल में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के चलते अगस्त में 55 बच्चों की मौत हो गई. सिविल सर्जन सुरेश जगदाले ने कहा कि इन बच्चों में से ज्यादातर तब लाए गए थे, जब उनके बचने की उम्मीद बेहद कम थी. इस हॉस्पिटल में अप्रैल से अब तक 187

नांदेड़ में बोले राहुल गांधी- महाराष्ट्र में 3 सालों में 9 हजार किसानों ने किया सुसाइड

शुक्रवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी महाराष्ट्र पहुंचे. उन्होंने मराठवाड़ा के नांदेड़ में किसानों की रैली को संबोधित किया. राहुल ने कहा कि देश को उद्योगपतियों के साथ किसानों की भी जरूरत है. महाराष्ट्र में बीते 3 वर्षों में 9 हजार किसानों न

सजा के वक़्त नहीं दिखी अबू सलेम के चेहरे पर एक भी शिकन, हंस रहा था फैसले के दौरान

1993 के मुंबई ब्लास्ट मामले में टाडा कोर्ट ने 24 साल बाद गुरुवार को दूसरा फैसला सुनाया। इसमें 7 आरोपी थे। मो. ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान को फांसी की सजा हुई, लेकिन पुर्तगाल से प्रत्यर्पण कर लाए गए अबू सलेम को उम्रकैद हुई है। करीमउल्ला को भी उम्रकैद की सजा स

टाडा कोर्ट ने अबु सलेम को सुनाई उम्र कैद की सजा, कौन है अबू सलेम

मुंबई की विशेष टाडा कोर्टआज 1993 मुंबई ब्लास्ट के दोषियों को सजा सुना दी. कुख्यात डॉन अबू सलेम को उम्रकैद की सजा मिली है. 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में पुर्तगाल से


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.