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झारखंड

झारखंड के दुमका में जनजातीय लड़की के साथ युवकों ने किया सामूहिक दुष्कर्म

झारखंड पुलिस ने एक जनजातीय लड़की से 6 सितम्बर की रात किए गए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 16 युवकों को गिरफ्तार किया है. दुमका पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि कुल 16 युवकों को गिरफ्तार किया गया है. सात ने लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया

झारखंड : एक दर्जन से अधिक बदमाशों ने किया गैंगरेप, निर्वस्त्र कर बनाया वीडियो

झारखंड के दुमका में एक लड़की से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है. आरोपियों ने पहले लड़की को निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया और फिर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया. पीड़ित फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही है. दिल दहला देने वाली यह घटना जिले के मुफ्

झारखण्ड के CM ने कहा-खजाने का एक-एक पैसा जनता और राज्य के विकास के लिए खर्च होगा

जनता और सरकार के बीच कोई दूरी ना हो. सरकार के खजाने का एक-एक पैसा जनता और राज्य के विकास के लिए खर्च होगा. इसके लिए सरकार आपके द्वारा कार्यक्रम का आयोजन राज्य के विभिन्न प्रमंडलों में किया जा रहा है. इस कार्यक्रम से जनता और सरकार के बीच

जमशेदपुर : MGM सरकारी अस्पताल में 30 दिनों में 52 बच्चों की मौत

झारखंडके महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएम) में पिछले एक माह में 52 शिशुओं की मौत हो गई. वहीं बच्चों की मौत का कारण कुपोषण बताया जा रहा है. एक जांच रिपोर्ट के अनुसार 16 बच्चों की मौत अंडर वेट के कारण हुई. समान्य नवजात का वजन जन्म के दौरान 2.5 किलो तक ठीक माना जाता है. लेकिन मरने वालों में

बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने, 3 कमरों वाले घर के मालिक को थमाया 38 अरब का इलेक्ट्रिसिटी बिल

जरा सोचिए, किसी आम आदमी के घर कितना बिजली का बिल आ सकता है ? हजारों का या अधिक से अधिक लाखों रुपए का लेकिन झारखंड में एक शख्स को बिजली विभाग ने अरबों रुपए का बिल थमा दिया है। इतना ही नहीं बिल नहीं भरने के नाम पर विभाग ने उसके घर का कनेक्शन तक काट डाला। 38

बड़ी लापरवाही : स्टेडियम में करंट लगने से हुई युवा रेसलर की मौत, जांच में जुटी पुलिस

झारखंड में प्रशासनिक लापरवाही ने एक भारतीय रेसलर की जान ले ली है. खबर है कि राष्ट्रीय स्तर के रेसलल विशाल कुमार वर्मा की झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में करंट लगने से मौत हो गई है. इस स्टेडियम में पिछले कई दिनों से जल-जमाव हुआ था और इसी म

लड़कियों ने अपनी दोस्त को पीट कर दी न्यूड तस्वीर वायरल करने की धमकी

संथाल परगना महिला कॉलेज के हॉस्टल में एक लड़की को उसकी फ्रेंड्स ने नेकेड करके बेरहमी से पीटा। उसका न्यूड फोटो लिया, फिर उसे वायरल कर दिया। विक्टिम पर हॉस्टल की ही एक लड़की का मोबाइल चोरी करने का शक था। मामला विधानसभा में गूंजा तो पुल

Video: झारखण्ड के रजरप्पा मंदिर में आयी अचानक बाढ़, हालत हुए बेकाबू

रामगढ़.जिले केचितरपुर थानाक्षेत्र में रजरप्पा मंदिर परिसर में अचानक बाढ़ आ गई. जिससे श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई. अचानक आई इस बाढ़ से प्रसाद की कई दुकानें बाढ़ में डूब गईं. इस घटना का कारण सिकिदिरी डैम से पानी खोला जाना था. इससे गोला की ओर से मंदि

विडियो: मांगो को पूरा कराने के लिए बुकारो में किया गया अर्ध-नग्न आन्दोलन

आपने कई तरह के आन्दोलन देखे होंगे, लेकिन अपने कभी अर्ध- नग्न आन्दोलन न देखा होगा. ये आन्दोलन काफी अजीबो गरीब है ये आन्दोलन झारखंड में स्थित बुकारो में प्रदर्शित किया जा रहा हैं इस आन्दोलन को करने की मुख्य वजह आश्रित नियोजन की मांग को पूरा करना हैं. बोकारो में आज आन्दोलन का पांचवा दिन हैं इस आन्

फर्जी कंपनियों और हवाला रैकेट को लेकर सीबीआई ने रांची, कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की

फर्जी कंपनियों और हवाला रैकिट में शामिल होने वालों के खिलाफ सीबीआई देशभर में ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई कर रही है। पश्चिम बंगाल और रांची सहित 23 जगहों पर छापे मारे हैं।रांची में इनकम टैक्स विभाग के प्रमुख सचिव तपस दत्ता के कोलकाता स्थित घर पर सीबीआई ने छापा मारा है। उनका आवास कोलकाता के

झारखंड: सारंडा में आदिवासियों की हालत बदतर, क्षेत्र से गायब हैं मूलभूत सुविधाएँ

झारखंड के कोल्हान क्षेत्र अंतर्गत सारंडा एवं आसपास के क्षेत्रों में आदिवासियों की हालत चिंताजनक है. आदिवासियों की स्थिति को नजदीक से जानने-समझने के लिए झारखंड के विनोबा भावे विश्वविद्यालय के एलएलबी के छात्र संजय मेहता इन दिनों नक्सल प्रभावित सारंडा वन क्षेत्र में हैं. वे गाँव

गोरक्षकों की गुंडागर्दी जारी, गोमांस के शक में वैन ड्राइवर को पीट-पीट कर मार डाला

गुरुवार को झारखंड के रामगढ़ में कथित गोरक्षकों ने गोमांस ले जाने के शक में एक वैन ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या कर दी. एक मारुति वैन से बड़ी मात्रा में मांस लेकर कुछ लोग चितरपुर से नई सराय जा रहे थे. इस बीच रामगढ़ बाजार टांड के पास बजरंग दल और गोरक्षा समिति के

केंद्रीय मंत्री नकवी ने बाहर से खाना मंगवा कर आदिवासी के घर खाया

मोदी सरकार के तीन साल के अचीवमेंट्स गिनाने यूनियन माइनॉरिटी वेलफेयर मिनिस्टर मुख्तार अब्बास नकवी सोमवार को झारखंड के पाकुड़ के हिरणपुर पहुंचे. यहां उन्होंने आदिवासी वर्कर के घर खाना खाया. लेकिन ये खाना आदिवासी के घर नहीं पका बल्कि बाहर से लाया गया था. जानकार


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.