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जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर: त्राल में ग्रेनेड ब्लास्ट से 2 लोगों की मौत, 14 जवानों समेत 24 लोग घायल

कश्मीर में आतंकियों ने आज एक और हमले को अंजाम दिया. आतंकियों ने त्राल में बस स्टैंड के पास पीडीपी के मंत्री नईम अख्तर के काफिले पर हैंड ग्रेनेड फेंका. इस हमले में 2 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा 24 लोग घायल भी हुए हैं जिसमें आम लोग और पुलिसकर्मी शामिल हैं. हमले में पीडब्ल्यूडी

कश्मीर : आतंकियों का SSB कैंप पर हमला, 1 जवान शहीद, बनिहाल टनल की सुरक्षा में लगे थे जवान

बुधवार को जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने एक और हमले को अंजाम दिया. आतंकियों ने रामबन जिले के बनिहाल में सशस्त्र सीमा बल कैंप पर हमला किया. इसमें हमले में 1 जवान शहीद हो गया, जबकि एक घायल हो गया. पुलिस ने यह जानकारी दी. जानकार

जम्मू-कश्मीर के DGP बोले- सुना है लश्कर कमांडर की जगह खाली है, पर कोई आने को तैयार नहीं

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद ने कश्मीर में एक्टिव आतंकी संगठन लश्करे-तैयबा पर सोमवार को चुटकी ली. उन्होंने कहा कि सुना है कि लश्कर कमांडर की जगह खाली है, लेकिन कोई लेने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि कश्मीर में शांति कायम होने तक आतंकियों आतंकवादि

जम्मू-कश्मीर : कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, 2 आतंकी ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में सीमापार से की गई घुसपैठ की कोशिश को एक बार फिर सुरक्षाबलों ने नाकाम किया है. घाटी में तैनात सेना की 15वीं कोर के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि सीमा पर तैनात सुरक्षाबलों ने घुसपैठ कर रहे 2 आ

अमरनाथ यात्रियों पर हमले का मास्टरमाइंड ढेर, जानिये अबू इस्माइल के एन्काउन्टर की पूरी घटना

अमरनाथ यात्रियों पर हमले का मास्टरमाइंड लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर अबु इस्माइल बड़ी आसानी से सुरक्षाबलों ने मार गिराया। वह 10 लाख का इनामी था।दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में अबू इस्माइल को साथी संग सुरक्षा बलों ने वीरवार को मुठभेड़ में मार गिराया। वह ए डबल प्लस कैटगरी का आतंकी था। पुलिस

नापाक हरकत से बाज नहीं आया पाक, किया सीजफायर का उल्लंघन, 1 जवान शहीद

शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा सेक्टर में पाकिस्तान ने सीजफायर वॉयलेशन किया. इसमें BSF का एक जवान शहीद हो गया और एक सिविलियन जख्मी हुआ है. ये गोलीबारी देर रात करीब 12 बजे की गई. जानकारी के मुताबिक

‘जम्मू-कश्मीर के लिए खतरा हैं रोहिंग्या मुसलमान, अवैध शरणार्थियों पर कार्रवाई करेंगे’ : राजनाथ सिंह

रोहिंग्या मुसलमानों पर यूएन की टिप्पणी के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मुसलमानों को जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. जम्मू-कश्मीर दौरे पर पहुंचे राजनाथ ने रोहिंग्या को देश से बाहर करने के लिए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए. उन्

LoC के पास रहने वाले 5000 कश्मीरियों ने की मांग, कहा- हमें अपने बंकर चाहिए

पाकिस्तान आर्मी लगातार सीमा पार से फायरिंग करती है. ऐसे में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास रहने वाले करीब 5000 कश्मीरियों को अपने लिए खुद के बंकर चाहिए. सीज फायर वायलेशन की वजह से ये लोग अब स्कूल में बनाए गए कैम्प में रह रहे हैं. राजौरी डिस्ट्रिक्ट के नौशेरा सेक्टर में रहने

लद्दाख में हुआ 'लव जिहाद' बौद्ध लड़की ने बदला धर्म, मुस्लिम युवक से की शादी

लद्दाख बौद्ध असोसिएशन (एलबीए) ने जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी पीडीपी-बीजेपी सरकार के खिलाफ सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं. एलबीए ने राज्य में बौद्ध-मुस्लिम तनाव को सुलझाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से मदद लेने का फैसला किया है. लद्दाख में ये तनाव एक 30 साल की बौद्ध महिला ने 32 सालवर्

केंद्र जम्मू-कश्मीर की भावना के खिलाफ नहीं उठाएगा कोई कदम : राजनाथ सिंह

सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगी. उनका यह बयान संविधान के अनुच्छेद 35ए पर हो रही चर्चा के बीच आया

कश्मीर के दौरे पर पहुंचे राजनाथ ने दिया बयान, सुधर रहे हैं हालात तेजी से

राजनाथ सिंहने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो एक साल में 50 बार कश्मीर आऊंगा। राजनाथ ने कश्मीर की समस्या के हल के लिए 4C कम्पैशन (क्षमा), कम्युनिकेशन (बातचीत), कोएग्जिसटेंस (साथ मिलकर रहना) और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग एंड कंसिस्टेंसी (भरोसा कायम करन

कश्मीर में सेना की बड़ी कार्रवाई, एनकाउंटर में 2 हिजबुल आतंकियों को किया ढेर 1 गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सोमवार को सिक्युरिटी फोर्स ने एनकाउंटर में हिजबुल मुजाहिदीन के 2 आतंकियों को मार गिराया। एक आतंकी को अरेस्ट किया गया है। यह भी पढ़ें:

कश्मीर पहुंचेंगे राजनाथ सिंह 4 दिन के दौरे पर, लेंगे सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा

राजनाथ सिंहशनिवार से 4 दिन के दौरे पर कश्मीर जा रहे हैं। वे राज्य के हालात का जायजा लेंगे। राजनाथ, सीएम महबूबा मुफ्ती और गवर्नर एनएन वोहरा से मुलाकात भी करेंगे। बता दें कि 10 जुलाई को अमरनाथ यात्रियों पर हमले


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.