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जम्मू-कश्मीर

अलगाववादियों पर आर्मी चीफ का वार, कहा- 'उन्हें लगता है PAK छीन लेगा कश्मीर, ये अलगाववादियों का ख्याली पुलाव है'

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों के लिए आर्मी चीफ बिपिन रावत ने अपने तेवर बेहद तीखे कर लिए हैं. शुक्रवार को उन्होंने कहा कि जो ऐसा सोचते हैं कि पाकिस्तान हमसे कश्मीर ले लेगा, ये उनका ख्याल है. आतंकवाद से किसी का भला नहीं होने वाला है और इसकी कीमत लोकल लोगों को चुकानी पड़ रही है.

जम्मू-कश्मीर : हजारों की भीड़ ने शहीद गुलाम मोहिउद्दीन को दी विदाई

हम सुरक्षित खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं, इसके लिए हमें सीमा पर खड़े जवानों का शुक्रिया अदा करना चाहिए. वह हमारी सुरक्षा के लिए अपने प्राण देने से भी पीछे नहीं हटते. खबर है कि शुक्रवार को कश्मीर के बिजबेहारा में शहीद लांस नायक गुलाम मोहिउद्दीन राठेर को अंतिम विदाई देने के लिए

जम्मू-कश्मीर : फिर शुरू हुई मुठभेड़, मारे गए 3 आतंकी

आतंकी लगातार भारत में घुसपैठ की कोशिश करते रहते हैं. वहीं, भारतीय जवान भी उनकी इस गुस्ताखी का मुंहतोड़ जवाब देते हैं. इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने 12 घंटे के अंदर दूसरी बार घुसपैठ की कोशिश की है. भारतीय सैनिकों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है. खबर मिल रही है कि इस

जम्मू-कश्मीर : बांदीपुर में आर्मी और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी, 2 जवान घायल

आए दिन भारतीय सैनिकों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबरें सुर्खियों में बनी रहती है. इसी कड़ी में खबर है कि जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के हाजिन इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है. इस मुठभेड़ में 2 जवान घायल हो गए हैं, जबकि 1 आतंकी मारा गया है.

कुलगाम मुठभेड़ः आतंकियों से लोहा लेते हुए इन दो बहादुरों ने न्यौछावर कर दिए प्राण, अलगाववादियों ने बुलाया घाटी बंद

जम्मू कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से लोहा लेते हुए भारतीय सेना ने अपने दो जाँबाज खो दिए। अहमदाबाद निवासी लांस नायक भंडोरिया गोपाल सिंह और उत्तराखंड के चमौली के रहने वाले सिपाही रघुवीर सिंह। इस हमले में तीन जवान घायल हुए और दो आम नागरिकों की भी मौत हो गयी। कुलगाम एनकाउंटर में

J&K: कुलगाम मुठभेड़ में चार आतंकवादी ढेर, दो जवान शहीद

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में रविवार तड़के एक मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने हिज्बुल मुजाहिदीन के चार आतंकवादियों को मार गिराया जबकि सेना के दो जवान शहीद हो गए और एक नागरिक की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान एक अधिकारी सहित सेना के तीन जवान घायल हो गए,

जम्मू-कश्मीर : बर्फ़बारी-बारिश की वजह से 2 लोगों की मौत, एवलांच की वॉर्निंग

पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हुए हिमस्खलन से 114 लोगों की मौत हो गई है. वहीं, भारत के जम्मू-कश्मीर में ताजा बर्फबारी-बारिश और आंधी की वजह से एक बच्चे समेत दो लोगों की मौत हो गई है. डोडा रामबाण में 180 मकान ढहने की खबर है. जानकारी के मुताबिक, लैंडस्लाइड की वजह से जम्म

कश्मीर के एथलीटों को अमेरिका ने वीजा देने से किया इनकार

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद संभालते ही हरकत में दिख रहे हैं. उनके 7 देशों पर बैन के निर्णय ने समूचे विश्व को चौंका दिया है. वहीं, अब खबर मिल रही है कि कश्मीर घाटी के दो स्नोशुअर (एथलीट) खिलाड़ियों को अमेरिका ने कथित रूप से वीजा देने से इनकार कर दिया है

कश्मीर में हिमस्खलन में दबे सेना के 5 जवानों को निकाला गया, हालत गंभीर

एक बार फिर जम्मू कश्मीर में एवलांच आने की खबर हैं. इस बार ये हिमस्खलन उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में हुआ है. कुपवाड़ा के मचैल सेक्टर में हुए इस हिमस्खलन में सेना की 56 राष्ट्रीय राइफल्स के 5 जवान दब गए थे. जिसके बाद चले रेस्क्यू ऑपरेशन में बर्फ के नीचे दबे भारतीय सेना के प

कश्‍मीर में हिमस्खलन, 4 जवानों के शव बरामद, अब तक 15 शहीद

लगातार कई हफ्तों से बर्फबारी की मार झेल रहे जम्मू-कश्मीर के गुरेज में शुक्रवार को चार जवानों के शव बरामद किए गए हैं और चार अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।मौसम विभाग ने तेज बर्फबारी की चेतावनी जताई है। बता दें कि गुरुवार को हिमस्खलन में 11 जवानों की मौत


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  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.
     

  • स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    कहते हैं जिसने अपनी मातृभाषा में पकड़ मजबूत करली वही इंसान जीवन में सफल है और मातृभाषा के उत्थान के लिए हमें ही कदम उठाने पड़ेंगे. 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा हासिल है और हिंदी भारत में बोलचाल के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया था. हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 

    1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी को जनमानस की भाषा बताया था. साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि ‘संघ की राज-भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था. इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी लागू की गई तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोगों के बीच से विरोध के सुर भी उठने लगे और फिर अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. यही कारण रहा है कि हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा.

    आज पूरा विश्व ग्लोबल हो गया है. इस दौर में भाषा ने भी अपना रूप बदल लिया है. हिंदी की जगह अंग्रेजी हो गया है. मज़े की बात है जिसे हिंदी नहीं बोलनी आती उसे भी अच्छी नौकरी मिलती है क्यूंकि उसे अंग्रेजी बोलनी आती है. हिंदी आये या न आये, लेकिन “इंग्लिश” आनी ज़रूरी है. अपनी ही भाषा का अपने ही देश में इस तरह से ह्रास होना निंदनीय है.

    1991 के बाद भारत में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. नई प्रौद्योगिकी और इससे उपजते हुये सेवा और उद्योग देश की अर्थ, नीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव हुए. इस बदलाव का भाषा पर भी जबरदस्त असर पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई को समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से मातृभाषा उजड़ने लगी है. इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाया जाने लगा. इस पूरे सप्ताह सरकारी विभागों और विद्यालयों में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ताकि हिंदी को बढ़ावा दिया जा सके और ज़्यादा लोग इसका प्रयोग उतने ही स्वाभिमान से करे जैसे इंग्लिश का करते हैं. 

    आज सभी जगहों पर इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी का चलन भी बढ़ा है. लेकिन नई पीढ़ी कहीं इससे पूरी तरह से वंचित न रह जाए इसलिए समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए प्रयास कर रहा है. हर तबका अपने-अपने हिसाब से हिंदी का उत्थान करने का प्रयास कर रहा है. कवि अपनी कविताओं के ज़रिये, साहित्यकार अपने साहित्य के ज़रिये, शिक्षक अपनी विद्या के ज़रिये और घर में माता-पिता अपने संस्कारों के ज़रिये. ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है और आगे भी करता रहूँगा. मैं राज महाजन अपने तरीके से हिंदी के उत्थान में जुड़ा हूँ. हो सकता है मेरा करना काफी नहीं होगा. लेकिन मैंने अपने ही बूते पर एक शुरुआत की है जिससे मैं आने वाली पीढ़ी को हिंदी का महत्व समझा सकूँ. मेरा मानना है अगर समाज को उन्नत और उत्कृष्ट बनाना है तो पहले अपनी जड़ों को मजबूत और संमृद्ध बनाना होगा. इसके लिए भाषा को पतन से बचाना होगा. ज़रूरी नहीं कि उत्थान तभी होगा जब हम रोज हिंदी बोलेंगे. उत्थान तब होगा जब हिंदी बोलने पर शर्म महसूस नहीं करेंगे. पूरी आत्मीयता से हिंदी को अपनाएंगे, हिंदुत्व का विकास हिंदी से ही होगा. आज हिंदी दिवस पर मैं सभी को इस ओर प्रेरित करता हूँ और आने वाली पीढ़ी से एक 
    गुज़ारिश करता हूँ कि अंग्रेजी का प्रयोग तो करें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें जिनमें  हिन्द और हिंदी समाई है. हिंदी से जुड़ना मेरे लिए गौरव का विषय है.    

  • श्रद्धा और उल्लास का प्रतीक है जन्माष्टमी

    आज है गोकुल के नटखट ग्वाले कृष्ण का जन्मदिन यानि “जन्माष्टमी”. कहते हैं जब नन्हे कान्हा ने मामा कंस के  कारागार में जन्म लिया था तब वहां मौजूद सभी पहरेदारों को निद्रा ने अपने वश में कर लिया था. उनके जन्म लेते ही उस कारागार में एक आलौकिक प्रकाश पुंज छा गया था जिससे सभी की आँखे कुछ पलों के लिए चुंधिया गईं थीं. नन्हे कान्हा के तेज के आगे समस्त भू लोक नमन करने लगा था. जैसे-जैसे कान्हा बढ़े होते गए वैसे-वैसे उनकी लीलाएं भी बढ़ती चली गई. जब-जब उनके भक्तों को उनकी आवश्यकता पड़ी, तब-तब भगवान कृष्ण ने सहारा दिया. कभी द्रौपदी का भाई बनकर, कभी अर्जुन का सखा बनकर, कभी सुदामा से अपनी मित्रता निभाकर, कभी डूबते का सहारा बनकर, कभी गोवर्धन उठाकर भक्तों का तारक बनकर, तो कभी कर्तव्य का मोल बताने के लिए महाभारत के युद्ध का आगाज़ कराकर. एक वही इस समस्त जगत में हर रूप में, कण-कण में विद्यमान है. आज का दिन उन्हीं की भक्ति में रमने का है. "गोविन्द मेरो है गोपाल मेरो है, समस्त जगत में इक तू ही मेरो है”  

    भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के ही अवतार हैं जिन्हें सोलह कलाएं प्राप्त हैं. उन्होंने ही प्राणीमात्र को संदेश दिया कि फल की इच्छा रखना व्यर्थ है सिर्फ कर्म ही मनुष्य का अधिकार है. जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जनमोत्स्व और मैं राज महाजन इस पावन पर्व पर कुछ कहना चाहता हूँ जन्माष्टमी की रात्रि को मोह-रात्रि भी कहा गया है क्यूंकि इस रात्रि में मनुष्य मोह-माया के बंधन से मुक्त हो जाता है. ऐसी मान्यता है जन्माष्टमी के दिन व्रत-उपवास रखने से हर मनोकामना पूरी होती है. बाल गोपाल के जन्म से समस्त संसार तर गया था. भगवान श्री कृष्ण ने कर्म को प्रधान कहा था लेकिन आज कलियुगी युग में कर्म की प्रधानता कहीं खो सी गई है, इसलिए भी जन्माष्टमी का महत्व यहाँ और भी ज़्यादा बढ़ गया है. मेरा भी मानना यही है कि कर्महीन मनुष्य को फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए. तो आईये नन्हे गोपाल की भक्ति में आज का यह शुभ दिन अर्पण करदें. सर्वगुण संपन्न मोहन की भक्ति कीजिये क्यूंकि भक्ति में ही शक्ति है. बाल गोपाल को अपने मन में बिठाईये और इस जगतमय बंधन से मुक्त हो जाईए. श्रद्धा और उल्लास से भरे इस पर्व का आनंद उठाईये. एक बार फिर मेरी यानि राज महाजन की तरफ़ से इस पावन पर्व की हार्दिक बधाई.