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हिमाचल प्रदेश

चुनाव से पहले हिमाचल कांग्रेस में बगावत का शोर; CM वीरभद्र ने हाईकमान पर बोला हमला

रविवार को हिमाचल प्रदेश के नाराज मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस हाईकमान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी अपनी पूर्व की नीतियों से अलग दिशा की ओर बढ़ रही है और मनमाफिक तरीके से चयन करने का तरीका इसकी अच्छी संस्कृति का खात्मा कर देगा.

चंडीगढ़-शिमला हाइवे पर लैंडस्लाइड, 6 गाड़ियां मलबे में धंसीं

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते कई इलाकों में लैंडस्लाइड हो रही हैं। शनिवार को धल्ली टनल के पास पहाड़ी दरककर चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाइवे पर जा गिरा। बताया जा रहा है कि लैंडस्लाइड के मलबे में करीब आधा दर्जन गाड़ियां दब गईं। इनमें कोई पैसेंजर था या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिली है। पुलिस और डिजास

शिमला रेप केस : लॉकअप हत्याकांड में IG, DSP समेत 8 पुलिस कर्मी गिरफ्तार

बहुचर्चित गुड़िया दुराचार और कत्ल के मामले में अब तक का सबसे चौंकाने वाला मोड़ आया है. सूरज लॉकअप हत्याकांड मामले में CBI ने IG एस. जहूर जैदी और ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी समेत 8 पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया. ऐसा हिमाचल के प्रशासनिक इतिहास में

शिमला में गिरी सरकारी बिल्डिंग, हुआ करोड़ो का नुकसान

शिमला से करीब 30 किलोमीटर दूर ठियोग में हिमाचल प्रदेश रोड ट्रांसपोर्टेशन ऑफिस की बिल्डिंग गिर गई। हादसे में एक शख्स की मौत हो गई है। छह लोग घायल हुए हैं। इमारत के गिरे हुए मलबे में करीब 10-15 लोगों के दबे होने की आशंका

लगातार बारिश के कारण कुल्लू की सड़कें बनी तालाब, नदियों का भी जलस्तर बढ़ा

पिछले कई दिनों से हो रही बारिश से हिमाचल के कुल्लू में जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. लगातार कई दिनों से तेज़ बारिश होने के कारण नदियों और नालों का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है. बारिश का पानी सड़क पर जमा होने के कारण तालाब जैसा माहौल बन ग

हिमाचल प्रदेश : सतलुज नदी में गिरी बस, 28 की मौत, कई घायल

हिमाचल के खनेरी-रामपुर में शिमला से एक बेहद ही दर्दनाक खबर मिल रही है. खबर है कि शिमला से 120 किलोमीटर दूर 1 बस के सतलुज नदी में बहने से 28 लोगों की मौत हो गई है. जबकि, 7 लोग जख्मी हैं. बता दें कि बस में 43 लोग सवार थे और टायर फटने के चलते ये हादसा हुआ.

हिमाचल : 150 फीट गहरी खाई में जा गिरी बस, 10 की मौत, 51 घायल

गुरुवार की सुबह एक अप्रिय घटना घटित हो गई. खबर है कि हिमाचल के कांगड़ा में एक बस गहरी खाई में गिर गई. इस खाई की गहराई करीब 150 फीट है. इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 51 जख्मी हो गए. इनमें से 12 की हालत काफी नाजुक बताई जा रही है. सभी को टांडा मेडिकल क

शिमला में भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा- डिजिटल करंसी का इस्तेमाल करें हिमाचल के लोग, इससे बढ़ेगा टूरिज्म

पीएम मोदी आज हिमाचल प्रदेश के दौरे पर है. जहाँ आज उन्होंने सस्ती हवाई उड़ानों का शुभारंभ किया. पीएम सुबह नई दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचें, जहां से सेना के हेलीकाप्टर से जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पर पहुंचे. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह प्रधानमंत्री को जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पर रिसीव करने गए. प्रधानमंत्र

PM मोदी: ने शिमला में 'उड़ान' स्कीम के तहत शिमला-दिल्ली मार्ग पर पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई, ढाई हजार रुपए में 500 किलोमीटर की एयर ट्रैवल

प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने गुरुवार को शिमला में बहुप्रतीक्षित उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) स्कीम के तहत शिमला-दिल्ली मार्ग पर पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई. बता दें कि यह योजना पूरी तरह से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) पर केंद्रित है और वैश्विक रूप से अपनी तरह की प

आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी ने सीबीआइ कोर्ट में दायर की याचिका

दिल्ली की एक अदालत ने आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी की याचिका पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी किया. वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने यह याचिका अपने और पति के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में दाखिल आरोपपत्र को लेकर दायर की है. प्रतिभा सिंह ने

ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को समन भेजा

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को दो बड़े झटके लगे हैं। ताजा सूचना के अनुसार ईडी ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से पूछताछ करने के लिए उन्हें समन जारी कर दिया है।ईडी ने सोमवार को वीरभद्र सिंह को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। वीरभद्र को 13 अप्रैल को इस मा

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को दिया दिव्यांग हुए लड़के को 1 करोड़ रुपए मुआवजा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को ऑर्डर दिया है कि वो उस दिव्यांग बच्चे को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दे, जिसके दोनों हाथ हाईटेंशन लाइन से जल गए थे। और बाद में इन्हें काटना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के पहले शिमला हाईकोर्ट ने बच्चे को 1.25 करोड़ रुपए के हर्जाने का ऑर्डर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कह

हिमाचल प्रदेश : सोलन सैन्य छावनी में ISIS के पोस्टर मिले, सुरक्षा एजेंसिया अलर्ट

हिमाचल के सोलन में ISIS नेटवर्क होने का अंदेशा है। यहां एक ही महीने में दूसरी बार ISIS COMING SOON पोस्टर लगे हैं । हैरत की बात तो यह है कि इस बार इस तरह के पोस्टर सुबाथू छावनी के आसपास की दीवारों पर लगाए गए हैं। पोस्टरों में भारत से लेकर नेपाल तक 3 धमाके करने की धमकी दी गई है। <


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  • रोहिंग्या मुसलमान देश में फैला सकते हैं ‘अराजकता’ - राज महाजन

    रोहिंग्या मुसलमान देश में फैला सकते हैं ‘अराजकता’ - राज महाजन

    आजकल रोहिंग्या मुसलमान लाइम-लाइट में आ गये हैं। भई सारा देश उनके बारे में बातें जो कर रहा है। ये आम मुसलमानों की तरह नहीं है ये म्यांमार के रहने वाले हैं। चर्चा का विषय बने इन मुसलमानों को भारत में रहने देना चाहिए या नहीं? ये सवाल आज-कल चहुँ ओर सुनाजा रहा है और हो भी क्यूँ न। इनके भारत में आने से देश में अराजकता का माहौल बन गया है। अभी तो इनका पलायन पूर्ण रूप से हुआ नहीं है, तब हिन्दुस्तान कई गुटों में बंट रहा है। बुद्धिजीवी इसपर अपनी-अपनी राय कायम कर रहे हैं। सब एक-दूसरे को दोषी मानकर कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं।

     देखा जाए तो रोहिंग्या मुसलामानों का रहना या न रहना हिंदुस्तान का मुद्दा नहीं है। अपितु यह एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है, लेकिन हमारे देश में इस पर आजकल हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति हो रही है। हमारे नेताओं को बस एक मौका मिलना चाहिए जिसके जरिये हिन्दू और मुसलमान में अलगाव पैदा किया जा सके। उनमें अराजकता भड़काई जा सके।

    अब सवाल उठता है, असल में कौन है ये रोहिंग्या मुसलमान?

    रोहिंग्या स्वयं को दूसरे मुसलामानों से एक दम अलग मानते हैं। यह एक नस्लीय समूह से आते हैं। इनकी भाषा और संस्कृति सभी देशों से बिल्कुल अलग है। रोहिंग्या खुद को म्यांमार के  रखाइन राज्य का निवासी मानते हैं। खुद को ही एक गढ़े हुए ढ़ांचे में पहले ही फिट कर रखा है।

    रोहिंग्या मुस्लिम काफी संख्या में भारत में पहले से ही रह रहे हैं। इस बीच कुछ सांप्रदायिक लोग उन्हें इन हालातों में म्यांमार वापस भेजने की बात उठा रहे हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय लॉ और इंसानियत दोनों इसकी इजाजत नहीं देते. 

    आपको पता है, इस समय हमारे देश में लगभग 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं। इसी के बाद भी किसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया कि रोहिंग्या मुसलमान भारत में ‘रजिस्टर्ड रिफ्यूजी’ हैं और उन्हें वापस भेजना संविधान के आर्टिकल 14 और आर्टिकल 21 का उल्लंघन है। आर्टिकल 14 में समानता का अधिकार वर्णित है और आर्टिकल 21 जीने का अधिकार उल्लिखित है। इन्हें लेकर सरकार का मानना है कि ये अवैध प्रवासी आंतकवादी संगठनों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए इन्हें वापस भेज देना चाहिए। इनसे देश की सुरक्षा खतरे में आ सकती है।

    इस मामले को लेकर कई ‘बुद्धिजीवियों’ ने अपने-अपने मत रखे हैं। दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर जिस बर्बरता से जुल्म हो रहा है, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। मोदी सरकार से हम उम्मीद करते हैं कि इंसानी हमदर्दी के तहत म्यांमार सरकार पर दबाव बनाएं, ताकि हिंसा और निर्दोष लोगों की मौतों को रोका जा सके।

    जमात-ए-इस्लामी हिंद के महासचिव सलीम इंजीनियर कहते हैं कि हम उम्मीद करते थे पीएम नरेंद्र मोदी रोहिंग्या मुस्लिमों के मामले में खुलकर म्यांमार में बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मायूस किया है। भारत का बर्मा के साथ एक संबंध रहा है। ऐसे में भारत रोहिंग्या मुस्लिम के मुद्दे का समाधान कर सकता है।

    शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे रुशैद कहते हैं, मैं हमेशा से मज़लूम के साथ और जालिम के खिलाफ रहा हूं। किसी भी सरकार को चलाने के लिए दो ही चीजों की आवश्यता है -ईमान और इंसानियत। रोहिंग्या मुस्लिमों की तस्वीर देखकर ये एहसास हुआ कि म्यांमार सरकार जालिम हो चुकी है। वहां न तो इंसानियत है और न ही ईमान बचा है अब लोगों के पास।

    वहीँ, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी कहते हैं, म्यांमार में बहुत समय से रोहिंग्या मुस्लिमों पर जुल्म हो रहा है और सारी दुनिया से लेकर UN तक खामोश है। शांति के लिए आंग सान सू को मिला नोबल पुरस्कार वापस लिया जाना चाहिए। भारत में इन पीड़ितों को धर्म के चश्मे से देखा जा रहा है। इस मामले में  भारत के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रीजिजू का बयान शर्मसार करने वाला है। हिंदुस्तान की तहज़ीब हमेशा पीड़ितों की मदद करने की रही है। फिर चाहे श्रीलंका से आए तमिल हों या अफगानिस्तान के अफगानी। सबको यहाँ शरण दी गई। यहाँ तक कि बंग्लादेश से आए हुए हिंदुओं को तो नागरिकता देने की बात कही गई, लेकिन मजलूम रोहिंग्या मुसलमानों को बाहर खदेड़ने की बात कही जा रही है।

    अब सवाल उठता है कि क्यूँ म्यांमार रोहिंग्या मुसलामानों पर अत्याचार कर रहा है? दरअसल, म्यांमार में 10 लाख से अधिक रोहिंग्या बसते हैं, पर म्यांमार उन्हें अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं है। न ही इस प्रजाति को कोई सरकारी आईडी या चुनाव में भाग लेने का अधिकार दिया गया है। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रही हिंसा का कारण है 25 अगस्त को हुआ हमला। 25 अगस्त को करीब 150 लोगों ने हथियारों के साथ पुलिस के 24 कैम्पस पर हमला बोल दिया था। हमला म्यांमार के रखाइन राज्य में ही हुआ था। इस हमले में 71 लोगों की मौत भी हो गई थी। हमले की ज़िम्मेदारी Arkan Rohingya Salvation Army नामक आंतकवादी संगठन ने ली थी जिसे अता उल्लाह नामक आतंकवादी चलाता है। जोकि खुद एक रोहिंग्या मुस्लिम है।

    भारत में सियासी खेल

    मोदी सरकार गैरकानूनी ढंग से रहे इन 40 हज़ार रोहिंग्या समुदाय को देश से बाहर करने के मूड में है। रोहिंग्या मुसलमानों का वजूद म्यांमार से जुड़ा है, जहाँ से इनकी नागरिकता का अधिकार छीन लिया गया है। जिसके बाद ये अलग-अलग देशों में जा कर बस गए हैं। पर सवाल है कि आखिर म्यांमार के ये मुसलमान असम से लेकर दिल्ली तक के शरणार्थी कैंप में कैसे फ़ैल गये? क्या इसके पीछे भी कोई सियासी साजिश है? सुरक्षा एजेंसी इस समुदाय को देश के लिए खतरा मानती है। इतनी महत्वपूर्ण बातों के चलते कांग्रेस के कुछ नेता इन मुसलमानों के प्रति अपने दिल में सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं। उनका कहना है कि ये समुदाय मुसलमान है, इसलिए इन्हें भारत से बाहर फेंका जा रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या देश की सुरक्षा की कीमत पर सियासत हो रही है?

    मैं तो कहता हूँ कोई इन कांग्रेसी नेताओं से जाकर कहे कि जितने भी रोहिंग्या मुस्लिम बच गये हैं, उन्हें अपने आलीशान घरों में रहने की जगह दें। अरे जिन लोगों ने अपने ही देश में हमला किया हो वो किसी और देश को क्या महफूज़ रहने देंगे। बिलकुल नहीं। यह मामला अन्तर्राष्ट्रीय है और इसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ही हल करना चाहिए। किसी भी समुदाय को शरणार्थी बनाने से पहले भारत को उसके हर प्रभाव या दुष्प्रभाव के बारे में शांत दिमाग से विचार करना होगा।

    यह बात सिर्फ किसी को देश में शरण देने की नहीं बल्कि देश के नागरिकों की सुरक्षा की है, जिससे किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।

  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.