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गोवा

गोवा : कांग्रेस नेता चंद्रकांत कवलेकर के घर पर एसीबी का छापा

गोवा पुलिस के भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो (एसीबी) की एक टीम ने शनिवार को 2013 के अवैध संपत्ति रखने के एक मामले में विपक्षी नेता चंद्रकांत कवलेकर के आवास और अन्य संपत्तियों पर छापा मारा. पुलिस सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मं

गोवा में 4800 वोटों के अंतर से जीते मनोहर पर्रिकर अब देंगे राज्यसभा की सीट से इस्तीफ़ा

गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर ने पणजी सीट से 4,803 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है.पणजी उपचुनाव जीतने के बाद मनोहर पर्रिकर ने कहा कि मैं अगले हफ्ते राज्यसभा से इस्तीफा दे दूंगा. पर्रिकर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एवं कांग्रेस उम्मीदवार गि

दिल्ली, गोवा, आंध्र प्रदेश की 4 सीटों पर उपचुनाव जारी, केजरीवाल-पर्रिकर की साख दांव पर

आज दिल्ली, आंध्र प्रदेश और गोवा की 4 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है. दिल्ली में बवाना, आंध्र प्रदेश में नंद्याल और गोवा के वलपोई और पणजी विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, बवाना

गोवा से आया आपत्ति जनक बयान, चर्च कि मैगजीन में लिखा, मोदी सरकार का शासन हिटलर जैसा

गोवा के एक चर्च की तरफ से निकाली जा रही मैगजीन में मोदी सरकार की आलोचना की गई है। मैगजीन में पब्लिश एक आर्टिकल में एनडीए के राज को जर्मनी के नाजियों जैसा बताया गया है। साथ ही ये भी कहा गया है कि देश में संवैधानिक प्रलय(constitutional holocaust) की स

कंडोम ऐड की वजह से एक बार फिर विवादों में फंसी सनी लियोनी

सनी लियोनी द्वारा किए जाने वाले कंडोम ऐड पर एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस ऐड पर गोवा के एक नेता ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह इस ऐड का प्रचार किया जा रहा है, उसे बंद करना चाहिए। इस ऐड को लेकर उन्होंने ये तक कह दिया कि ये हमें शर्मिंदा कर रहा है। बता दें कि सनी

गोवा : CM पर्रीकर ने बीफ पर दिया विवादित बयान, VHP ने मांगा इस्तीफा

बीफ के मुद्दे पर गोरक्षक लोगों की जान लेने पर तुले हुए हैं. वहीं, राजनीतिक दलों के लिए यह सियासी मुद्दा बना हुआ है. गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के गोवा विधानसभा में बीफ को लेकर दिए गए बयान पर सियासी बवाल मच गया है. VHP वीएच

गोवा के पूर्व सीएम कामत के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

गोवा की एक अदालत ने करोड़ों रुपये के सीवेज घोटाले से जुड़े मामले में अदालत में पेश न होने पर पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत के खिलाफ गुरुवार को गैर जमानती वारंट जारी किया गया है. साल 2007-2012 के बीच कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने वाले दिगंबर कामत अदालत द्वारा समन जारी होने के

गोवा : सनवोरडेम नदी का पुल टूटा, 2 की मौत, 30 लापता

आज गोवा में बेहद ही दर्दनाक हादसा घटित हो गया है. गोवा में सनवोरडेम नदी पर पुर्तगाली दौर के एक पुल के ध्वस्त होने से दो लोगों की मौत हो गई है और 30 लोगों के लापता होने की खबर मिल रही है. जानकारी के मुताबिक, यह पुल दक्षिण गोवा के तहत आता है. राहत एवं बचाव कार्य के लिए नेवी की मदद ली जा र

दिग्विजय का पर्रिकर पर पलटवार, कहा-शर्म कीजिए, सरकार बनाकर गोवा के लोगों के साथ किया धोखा

कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पर हमला बोलते हुए शनिवार को कहा कि वे राज्य के लोगों को धोखा देने के लिए माफी मांगे और विधायकों की खरीदारी के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को धन्यवाद दें जिन्होंने गोवा में सरकार गठित करने मे

राज्यसभा में मनोहर परिकर ने कहा- दिग्विजय सिंह गोवा में घूमते रहे और हमने सरकार बना ली

गोवा का सीएम बनने के बाद मनोहर पर्रिकर पहली बार शुक्रवार को राज्यसभा पहुंचे. गोवा में सबसे ज्यादा सीटों के बावजूद कांग्रेस सरकार बनाने में नाकाम रही थी. पर्रिकर ने दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना कहा, आप गोवा में घूमते रहे और हमने सरकार बना ली. परिकर मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार

शिवसेना ने फिर साधा बीजेपी पर निशाना, कहा- गोवा में है परिकर की अस्थाई सरकार

बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने एक बार फिर बीजेपी पर हमला बोला है. इस बार शिवसेना पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा कि गोवा की जनता ने बीजेपी को नकार दिया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने गोवा में सरकार तो बना ली है, लेकिन यह अस्थाई सरकार है. परिकर सरकार कभी भी गिर सकती है. <

पर्रिकर ने आसानी से बहुमत परीक्षण पास किया, विपक्ष में पड़े 16 वोट

मंगलवार को गोवा में बतौर मुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद आज मनोहर पर्रिकर ने विधानसभा में आसानी से बहुमत साबित कर दिया। अब से कुछ ही देर पहले विधानसभा में पर्रिकर सरकार ने बहुमत परीक्षण पास कर लिया। पर्रिकर सरकार को कुल 23 विधायकों का समर्थन मिला जबकि विरोध में 16 मत पड़े। एनसीपी विधायक चर्चिल अलेमाओ

गोवा : आज होगा फ्लोर टेस्ट, पर्रिकर को 22 MLA का समर्थन

आज विधानसभा में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गोवा की भाजपा गठबंधन सरकार को बहुमत साबित करना होगा. पणजी से बीजेपी विधायक सिद्धार्थ को फ्लोर टेस्ट के लिए गोवा विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है. जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम को नौ मंत्रियों के साथ शपथ लेने वाले पर्रिकर के पा


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.