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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: पुलिस और नक्सालियों के बीच हुई गोलीबारी, 2 नक्सलियों की मौत

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में पुलिस दल ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों को मार गिराया है. सुकमा जिले के पुलिस अधिकारियों ने आज बताया कि जिले के गोलापल्ली थाना क्षेत्र के अंतर्गत रसतोंग गांव के जंगल में डीआरजी के दल ने बीती रात मुठभेड़

बड़ी खबर: छतीसगढ़ में 36 बच्चों पर ब्लू व्हेल गेम के जाल में फंसने का शक, बच्चों के हाथ की कलाई पर मिले कट के निशान

सुसाइड गेम ब्लू व्हेल चैलेंज में फंसकर छत्तीसगढ़ में 36 बच्चों ने कलाई पर कट लगा लिए। गुरुवार को पुलिस ने बालोद के स्कूल में 6 स्टूडेंट्स को ब्लू व्हेल गेम खेलते हुए पकड़ा। वहीं, दंतेवाड़ा के स्कूल प्रिंसिपल ने आला अफसरों को लिखे एक लेटर में बताया कि यहां 30 स्टूडेंट्स के कलाई पर

गोरखपुर के बाद छत्तीसगढ़ में भी ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से 3 बच्चों की मौत

डॉ. भीमराव अंबेडर मेमोरियल हॉस्पिटल में रवीवार देर रात ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से तीन बच्चों की मौत हो गई। यह राज्य का सरकारी अस्पताल है। शुरुआत जांच में हॉस्पिटल की लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त ऑक्सीजन ऑपरेटर शराब पीकर

गौशाला में भूख से तड़प-तड़प कर हुई 27 गायों की मौत, भाजपा नेता गिरफ्तार

गायों की रक्षा का मुद्दा बेहद विवादित हो गया है. एक और सरकार गायों की रक्षा की बात करती है वहीं, दूसरी ओर गौरक्षक इसका नाजायज फायदा उठाकर लोगों की जान ले लेते हैं. इस सब के बाद भी देश में गाय की स्थिति बदतर बनी हुई है. खबर है कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले

NSG कमांडोज ने ली छत्तीसगढ़ के जंगलों में स्पेशल ट्रेनिंग

भारत के सबसे बेहतरीन माने जाने वाले कमांडोज की ट्रेनिंग की तस्वीरें सोशल मीडिया में छाई हुई हैं. छत्तीसगढ़ के कांकेर के काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर (सीटीजेडब्ल्यू) कॉलेज में ट्रेनिंग लेते एनएसजी जवानों पर सोशल मीडिया यूजर्स खूब कॉमेंट कर रहे हैं. भारत के सबसे बेहतरीन माने

5 हजार दिन पूरे करने वाले भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने रमन सिंह, मोदी को छोड़ा पीछे

14 अगस्त को डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर 5 हजार दिन पूरे करने का रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं. वे भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने लगातार इतने दिनों तक सरकार चलाई. जानकारी के मुताबिक , इस माम

CRPF के जवानो ने की ऐसी अश्लील हरकत, शर्मशार हुआ डिपार्टमेंट

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों पर रक्षाबंधन के कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप लगा है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक, 31 जुलाई को हॉस्टल में एक प्राइवेट टीवी चैनल की ओर से रक्षाबंधन पर एक प्रोग्राम र

पतंजलि की एजेंसी देने के नाम पर लाखों की ठगी के दो आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ केमहासमुंद जिले में मंगलवार को पुलिस ने एक गिरोह का भंडाफोड़किया है जो पतंजलि कंपनी की डीलरशिप देने के नाम पर लोगों से ठगी करता था.पुलिस ने नालंदा (बिहार) से दो ठगों को गिरफ्तार किया है. महासमुंद एसपी नेहा चंपावत ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों के नाम विवेक कुम

इंसानियत शर्मशार : अस्पताल ने एंबुलेंस देने से किया इनकार, परिजनों को ठेले पर ले जाना पड़ा बच्ची का शव

एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर सुर्खियों में आई है. खबर है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र राजनंदगांव में एक परिवार को अपनी बच्ची का शव ठेले पर ले जाना पड़ा. जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल हॉ

छत्तीसगढ़: सुकमा में नक्सलियों से मुठभेड़ में 5 जवान घायल, 3 की हालत गंभीर

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शनिवार को दोपहर बाद चिंतागुफा इलाके में एसटीएफ के जवानों और नक्सलियों के बीच हुए गोलीबारी में पांच जवानों के घायल होने की खबर है. बताया जा रहा है कि शनिवार दोपहर चिंतागुफा इलाके के टुंडामरका के जंगलों में गश्त कर रहे एसटीएफ के जवानों पर अचानक नक्सलियों ने फायरिंग शुरू

सीआरपीएफ ने लिया सुकमा हमले का बदला, 15 नक्सलियों को किया ढ़ेर

सीआरपीएफ ने मंगलवार को दावा किया कि बस्तर के दंतेवाड़ा में सघन ऑपरेशन के दौरान 10-15 नक्सलियों को मार गिराया गया. 24 अप्रैल को सुकमा में नक्सलियों से लोहा लेते हुए 25 जवान शहीद हुए थे. इस घटना के बाद ये पहला बड़ा नक्सली ऑपरेशन है. छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने एक अंग्रेजी अखबार क

छत्तीसगढ़ : सुकमा अटैक में शामिल चार नक्सली गिरफ्तार

सुकमा में हुए नक्सली हमले के बाद सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है. गरुवार को पुलिस के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है. पुलिस ने ये गिरफ्तारी सुकमा के ग्रामीण इलाकेसुकमा, चिकपाल और फूलबारी गांव से की है. जो चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं उनमें एक नाबालिग भी शामिल है.ऐस

सुकमा नक्सली हमला: नक्सलियों ने दागे थे तीर बम, हमलावरों में महिलाएं भी थीं शामिल

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को हुए नक्सली हमले में 25 सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के जवान शहीद हो गए.इस नक्सली हमले की ख़बर से सभी हैरान हो गए थे. इतनी बड़ी तादात में नक्सली हमला पहले से रची हुई शाजिस की और संकेत करती है. सभी शहीद जवानों के बलिदान पर पुरे हिंदुस्तान को गर्व ह


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  • रोहिंग्या मुसलमान देश में फैला सकते हैं ‘अराजकता’ - राज महाजन

    रोहिंग्या मुसलमान देश में फैला सकते हैं ‘अराजकता’ - राज महाजन

    आजकल रोहिंग्या मुसलमान लाइम-लाइट में आ गये हैं। भई सारा देश उनके बारे में बातें जो कर रहा है। ये आम मुसलमानों की तरह नहीं है ये म्यांमार के रहने वाले हैं। चर्चा का विषय बने इन मुसलमानों को भारत में रहने देना चाहिए या नहीं? ये सवाल आज-कल चहुँ ओर सुनाजा रहा है और हो भी क्यूँ न। इनके भारत में आने से देश में अराजकता का माहौल बन गया है। अभी तो इनका पलायन पूर्ण रूप से हुआ नहीं है, तब हिन्दुस्तान कई गुटों में बंट रहा है। बुद्धिजीवी इसपर अपनी-अपनी राय कायम कर रहे हैं। सब एक-दूसरे को दोषी मानकर कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं।

     देखा जाए तो रोहिंग्या मुसलामानों का रहना या न रहना हिंदुस्तान का मुद्दा नहीं है। अपितु यह एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है, लेकिन हमारे देश में इस पर आजकल हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति हो रही है। हमारे नेताओं को बस एक मौका मिलना चाहिए जिसके जरिये हिन्दू और मुसलमान में अलगाव पैदा किया जा सके। उनमें अराजकता भड़काई जा सके।

    अब सवाल उठता है, असल में कौन है ये रोहिंग्या मुसलमान?

    रोहिंग्या स्वयं को दूसरे मुसलामानों से एक दम अलग मानते हैं। यह एक नस्लीय समूह से आते हैं। इनकी भाषा और संस्कृति सभी देशों से बिल्कुल अलग है। रोहिंग्या खुद को म्यांमार के  रखाइन राज्य का निवासी मानते हैं। खुद को ही एक गढ़े हुए ढ़ांचे में पहले ही फिट कर रखा है।

    रोहिंग्या मुस्लिम काफी संख्या में भारत में पहले से ही रह रहे हैं। इस बीच कुछ सांप्रदायिक लोग उन्हें इन हालातों में म्यांमार वापस भेजने की बात उठा रहे हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय लॉ और इंसानियत दोनों इसकी इजाजत नहीं देते. 

    आपको पता है, इस समय हमारे देश में लगभग 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं। इसी के बाद भी किसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया कि रोहिंग्या मुसलमान भारत में ‘रजिस्टर्ड रिफ्यूजी’ हैं और उन्हें वापस भेजना संविधान के आर्टिकल 14 और आर्टिकल 21 का उल्लंघन है। आर्टिकल 14 में समानता का अधिकार वर्णित है और आर्टिकल 21 जीने का अधिकार उल्लिखित है। इन्हें लेकर सरकार का मानना है कि ये अवैध प्रवासी आंतकवादी संगठनों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए इन्हें वापस भेज देना चाहिए। इनसे देश की सुरक्षा खतरे में आ सकती है।

    इस मामले को लेकर कई ‘बुद्धिजीवियों’ ने अपने-अपने मत रखे हैं। दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर जिस बर्बरता से जुल्म हो रहा है, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। मोदी सरकार से हम उम्मीद करते हैं कि इंसानी हमदर्दी के तहत म्यांमार सरकार पर दबाव बनाएं, ताकि हिंसा और निर्दोष लोगों की मौतों को रोका जा सके।

    जमात-ए-इस्लामी हिंद के महासचिव सलीम इंजीनियर कहते हैं कि हम उम्मीद करते थे पीएम नरेंद्र मोदी रोहिंग्या मुस्लिमों के मामले में खुलकर म्यांमार में बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मायूस किया है। भारत का बर्मा के साथ एक संबंध रहा है। ऐसे में भारत रोहिंग्या मुस्लिम के मुद्दे का समाधान कर सकता है।

    शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे रुशैद कहते हैं, मैं हमेशा से मज़लूम के साथ और जालिम के खिलाफ रहा हूं। किसी भी सरकार को चलाने के लिए दो ही चीजों की आवश्यता है -ईमान और इंसानियत। रोहिंग्या मुस्लिमों की तस्वीर देखकर ये एहसास हुआ कि म्यांमार सरकार जालिम हो चुकी है। वहां न तो इंसानियत है और न ही ईमान बचा है अब लोगों के पास।

    वहीँ, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी कहते हैं, म्यांमार में बहुत समय से रोहिंग्या मुस्लिमों पर जुल्म हो रहा है और सारी दुनिया से लेकर UN तक खामोश है। शांति के लिए आंग सान सू को मिला नोबल पुरस्कार वापस लिया जाना चाहिए। भारत में इन पीड़ितों को धर्म के चश्मे से देखा जा रहा है। इस मामले में  भारत के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रीजिजू का बयान शर्मसार करने वाला है। हिंदुस्तान की तहज़ीब हमेशा पीड़ितों की मदद करने की रही है। फिर चाहे श्रीलंका से आए तमिल हों या अफगानिस्तान के अफगानी। सबको यहाँ शरण दी गई। यहाँ तक कि बंग्लादेश से आए हुए हिंदुओं को तो नागरिकता देने की बात कही गई, लेकिन मजलूम रोहिंग्या मुसलमानों को बाहर खदेड़ने की बात कही जा रही है।

    अब सवाल उठता है कि क्यूँ म्यांमार रोहिंग्या मुसलामानों पर अत्याचार कर रहा है? दरअसल, म्यांमार में 10 लाख से अधिक रोहिंग्या बसते हैं, पर म्यांमार उन्हें अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं है। न ही इस प्रजाति को कोई सरकारी आईडी या चुनाव में भाग लेने का अधिकार दिया गया है। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रही हिंसा का कारण है 25 अगस्त को हुआ हमला। 25 अगस्त को करीब 150 लोगों ने हथियारों के साथ पुलिस के 24 कैम्पस पर हमला बोल दिया था। हमला म्यांमार के रखाइन राज्य में ही हुआ था। इस हमले में 71 लोगों की मौत भी हो गई थी। हमले की ज़िम्मेदारी Arkan Rohingya Salvation Army नामक आंतकवादी संगठन ने ली थी जिसे अता उल्लाह नामक आतंकवादी चलाता है। जोकि खुद एक रोहिंग्या मुस्लिम है।

    भारत में सियासी खेल

    मोदी सरकार गैरकानूनी ढंग से रहे इन 40 हज़ार रोहिंग्या समुदाय को देश से बाहर करने के मूड में है। रोहिंग्या मुसलमानों का वजूद म्यांमार से जुड़ा है, जहाँ से इनकी नागरिकता का अधिकार छीन लिया गया है। जिसके बाद ये अलग-अलग देशों में जा कर बस गए हैं। पर सवाल है कि आखिर म्यांमार के ये मुसलमान असम से लेकर दिल्ली तक के शरणार्थी कैंप में कैसे फ़ैल गये? क्या इसके पीछे भी कोई सियासी साजिश है? सुरक्षा एजेंसी इस समुदाय को देश के लिए खतरा मानती है। इतनी महत्वपूर्ण बातों के चलते कांग्रेस के कुछ नेता इन मुसलमानों के प्रति अपने दिल में सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं। उनका कहना है कि ये समुदाय मुसलमान है, इसलिए इन्हें भारत से बाहर फेंका जा रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या देश की सुरक्षा की कीमत पर सियासत हो रही है?

    मैं तो कहता हूँ कोई इन कांग्रेसी नेताओं से जाकर कहे कि जितने भी रोहिंग्या मुस्लिम बच गये हैं, उन्हें अपने आलीशान घरों में रहने की जगह दें। अरे जिन लोगों ने अपने ही देश में हमला किया हो वो किसी और देश को क्या महफूज़ रहने देंगे। बिलकुल नहीं। यह मामला अन्तर्राष्ट्रीय है और इसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ही हल करना चाहिए। किसी भी समुदाय को शरणार्थी बनाने से पहले भारत को उसके हर प्रभाव या दुष्प्रभाव के बारे में शांत दिमाग से विचार करना होगा।

    यह बात सिर्फ किसी को देश में शरण देने की नहीं बल्कि देश के नागरिकों की सुरक्षा की है, जिससे किसी भी कीमत पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।

  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.