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बिहार

लालू ने नीतीश पर साधा निशाना कहा- बिहार में बाढ़ की वजह दो पैर वाले चूहे या चार पैर वाले

आज बिहार में भागलपुर के कहलगांव में करोड़ों की लागत से बना बांध उद्घाटन से पहले ही टूट गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पंप नहर योजना का आज उद्घाटन करने वाले थे. फिलहाल मुख्यमंत्री का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है. इसे लेकर तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार स्टेट गवर्नमेंट

बिहार : कहलगांव में टूटा 800 करोड़ की लागत से बना बांध, CM नीतीश आज करने वाले थे उद्घाटन

बिहार में भागलपुर के कहलगांव में 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बना बांध उद्घाटन से पहले ही टूट गया. बांध के टूटने से कई इलाकों में गंगा का पानी घुस गया है. इस बांध को गंगा पंप नहर योजना के तहत तैयार किया गया था. सूचना मिलते ही जिले के सभी आला अधिकारी मौके घट

बिना नुकसान पहुंचाए बंगला वापिस करें तेजस्वी यादव : सुशील मोदी

सोमवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार ने नेता विपक्ष तेजस्वी यादव से कहा कि वे सरकारी आवास को जल्द से जल्द खाली करे. मोदी ने कहा कि तेजस्वी बंगले को उसी हालत में सौंपे जैसे उन्हें दिया गया था, वे नहीं चाहते कि उसमें कोई भी नुकसान किया गया हो. जानकारी

बिहार : तेजस्वी यादव को खाली करना होगा सरकारी बंगला

बिहार की सत्ता में उथल-पुथल के बाद RJD की हालत बदतर हो गई है. वहीं, अब नीतीश कुमार सरकार ने पूर्व उपमुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को सरकारी बंगला खाली करने का निर्देश जारी किया है. राज्य के भवन निर्माण मंत्री महेश्वरी हजारी का कहना है कि 5

बिहार : हर 3 महीने में नीतीश के कार्यों की समीक्षा करेंगे शाह, बनाएंगे अलग इमेज

एक बार फिर बिहार में नीतीश कुमार के साथ सत्ता में आई BJP इस बार सरकार के कामों में अपनी अलग छाप चाहती है. पार्टी प्रेसिडेंट अमित शाह<

शरद यादव को मिला राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने का नोटिस, सीएम से कहा उचित जवाब देंगे

जनता दल यूनाइटेट के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने पार्टी और राज्यसभा की अपनी सदस्यता पर मंडराते संकट पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उनकी लड़ाई पद की नहीं सिद्धांत और संविधान बचाने की है. यादव ने आज कहा कि उन्हें राज्यसभा से सदस्यता खत्म सम

मुसीबत में लालू परिवार, राबड़ी और उनकी बेटी हेमा की संपत्ति हो सकती है जब्त, जांच के घेरे में तेजप्रताप भी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा से जुड़ने के बाद से आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. खबर है कि उनके परिवार के खिलाफ आयकर विभाग बड़ी कार्रवाई कर सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि कुछ दिनों

जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर लगें आरोपो से विधान परिषद सदस्यता हो सकती है रद्द

बिहार के मुख्यमंत्रीनीतीश कुमारकीविधान परिषदसदस्यता को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुएसुप्रीम कोर्ट नेनिर्वाचन आयोगको नोटिस जारी किया है। इस मामले में जवाब देने के लिए कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को चार

बिहार : मुजफ्फरपुर में बेकाबू ट्रक ने पुलिस टीम को रौंदा, 5 की मौत, दो घायल

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बेकाबू ट्रक की चपेट में चैकिंग के दौरान जांच कर रही पुलिस टीम आ गई है. ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हादसे में 4 पुलिसकर्मी समेत 5 की मौत हो गई है,वहीं दो पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं. चश्मदीदों न

इस वजह से राज्यसभा से डिस्क्वालिफाई हुए JDU के बागी नेता शरद यादव

बिहार की सियासत में जनता दल (यूनाइडेट) के महागठबंधन से अलग होते ही बागी रुख अख्तियार करने वाले वरिष्ठ नेता शरद यादव के खिलाफ पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है. जिसके बाद शरद यादव को राज्यसभा से भी करारा झटका लगा है और सदन में उनकी सदस्यता को अयोग्य ठहरा दिया गया है. आपक

लालू-तेजस्वी को CBI का समन, रेलवे टेंडर मामले में 2 महीने पहले दर्ज हुई थी FIR

RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. CBI ने रेलवे जमीन आवंटन मामले में लालू यादव और तेजस्वी यादव को समन किया है. लालू यादव को CBI के सामने 11 सितंबर और तेजस्वी यादव को 12 सितंबर को पेश होन

बिहार : आदित्य सचदेवा मर्डर केस में JDU नेता के बेटे समेत 3 को उम्रकैद

बुधवार को बिहार के आदित्य सचदेवा हत्याकांड में ADJ कोर्ट ने JDU की MLC मनोरमा देवी के बेटे रॉकी समेत 3 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई. बिंदी यादव को 5 वर्ष की कैद हुई है. जानकारी के मुताबिक ,

बिहार कांग्रेस में टूट के डर से राहुल गांधी ने सभी विधायकों को बुलाया दिल्ली

बिहार कांग्रेस में टूट की खबरों के बीच पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सभी विधायकों और विधान पार्षदों को राजधानी दिल्ली बुलाया है. आपको याद दिला दें कि


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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.