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वृष – Taurus

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सितारों की चाल प्रतिकूल है। वाहन प्रयोग में सावधानी बरतना आवश्यक होगा। पारिवारिक संबंध में मनमुटाव संभव तथा वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। धन का अपव्यय बढ़ेगा। बनते कार्यों में बाधा आ सकती है।

वृष – Taurus

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वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई माह का तृतीय सप्ताह उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है। 

16-17 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। दाम्पत्य सुख सामान्य रहेगा। आपस में किसी विषय को लेकर विचारों में मतभेद हो सकता है। वाद-विवाद से बचें यदि जरूरी न हो तो लम्बी यात्रा न करें। नौकरी करने वालों को अधिकारी व साथियों से सहयोग में कमी रहने के कारण मानसिक अशांति हो सकती है।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि अष्टम भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है विरोधी पक्ष दबाने की कोशिश करेगा। सभी कार्यों में रुकावट व परेशानी महसूस होगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। शरीर मे थकावट महसूस होगी। पूंजी निवेश के लिए समय अनुकूल नहीं है इसलिए निवेश से बचें। परिवारिक सदस्य व रिश्तेदारों के साथ रिश्तों में कटुता नजर आ रही है इसलिए सचेत रहे धैर्य से काम लें। 

20-21 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि नवम भाव से गोचर कर रहे हैं। समय धीरे-धीरे अनुकूलता की तरह है आप प्रयत्नशील रहे सफलता प्राप्त होगी। बेरोजगारों को रोजगार की प्राप्ति संभव है। बड़े का आशीर्वाद प्राप्त होगा धर्म में आस्था बढ़ेगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि दशम भाव से गोचर करेंगे। समय पूर्णरूप से अनुकूल है। साथियों के सहयोग से व्यवसाय में आ रही रुकावटें दूर होंगी। राजनीतिक समीकरणों में सुधार होगी। अधिकारी वर्ग से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। सरकारी कार्यों को निपटाने की कोशिश करना रुके कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। घर में सुख-शांति बढ़ेगी।
 

वृष – Taurus

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वृष राशि वालों के लिए जुलाई माह का मासिक साप्ताहिक भविष्य

वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई माह के प्रारंभ में चन्द्रमा वृषभ राशि प्रथम में सूर्य, बुध व शुक्र मिथुन राशि द्वितीय भाव में, गुरु-राहु सिंह राशि चतुर्थ भाव में, मंगल तुला राशि षष्ठ भाव में, शनि वृश्चिक राशि सप्तम भाव में, केतु कुंभ राशि दशम भाव से गोचर करेंगे।

1-7 जुलाई वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई माह का प्रथम सप्ताह अति उत्तम फल देने वाला है। इस सप्ताह चन्द्रमा लग्न से तृतीय भाव तक गोचर करेंगे।  1-2 जुलाई को चन्द्रमा वृषभ राशि प्रथम भाव से गोचर कर रहे हैं। इसलिए समय अनुकूल है। आप तनाव मुक्त रहेंगे और तनाव मुक्त रहने के कारण अपने आप को भीतर से मजबूत महसूस करेंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। काम में सुधार आयेगा।

3-4 जुलाई को चन्द्रमा मिथुन राशि द्वितीय भाव से गोचर करेंगे। आप की मानसिक शांति बढ़ेगी। आप अपने लोगों के साथ रहेंगे। घर में सुख-शांति का वातावरण बनेगा आर्थिक लाभ होगा। यात्रा लाभ देने वाली रहेगी।

5 जुलाई दोपहर तक समय लाभ देने की स्थिति में है। उपहार में कीमती वस्तु प्राप्त हो सकती है।

6-7 जुलाई को चन्द्रमा कर्क राशि तृतीय भाव से गोचर करेंगे। यह सप्ताह आपके लिए शानदार, जानदार व यादगार रहेगा क्योंकि कम प्रयत्न में अधिक सफलता प्राप्त होगी। आय के साधनों में वृद्धि होगी। भाई-बहनों का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। उनके सहयोग से रुके हुए कार्य बनेंगे। जिससे आप का मनोबल बढ़ेगा और रुका हुआ धन प्राप्त होगा। परिवार के साथ यात्रा का अच्छा योग है। सभी कार्यों में पूंजी निवेश के लिए समय अनुकूल है।

8-15 जुलाई वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई माह का द्वितीय सप्ताह शुभ फलदायी रहेगा। क्योंकि चन्द्रमा चतुर्थ भाव से अष्टम भाव तक गोचर करेंगे।  8-9 जुलाई को चन्द्रमा चतुर्थ भाव सिंह राशि से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है इसलिए थोड़ा सचेत रहें। अपने कार्य क्षेत्र पर पूरा ध्यान रखें। ये दो दिन कलहकारी हो सकते हैं इसलिए वाद-विवाद से बचें। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें। धन हानि की संभावना है।

10-11 जुलाई को चन्द्रमा कन्या राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। यह समय संतान पक्ष की तरफ से अति शुभ फल देने वाला है और संतान का पूरा सहयोग प्राप्त होगा। उनके रुके हुए कार्य पूरे होंगे। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह समय विशेष है। आपको कोचिंगस्टिट्यूट में थोड़े प्रयत्न से सफलता मिलेगी। आप जितना कड़ी मेहनत करेंगे उसी के अनुसार अच्छे परिणाम आयेंगे। 12 जुलाई दोपहर तक समय मनोनुकूल है इसका लाभ उठाएं।

13-14 जुलाई को चन्द्रमा तुला राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। चन्द्रमा नीच अभिलाषी होने के कारण प्रयत्न करने से सफलता देगा। आने कार्यक्षेत्र में सभी कार्यों में परेशानी महसूस होगी। नौकरी करने वालों के लिए समय अच्छा नहीं है क्योंकि अधिकारियों व साथियों से सहयोग में कमी रहेगी। संघर्ष से ही सफलता एवं लाभ होगा। परंतु शत्रु पक्ष कमजोर रहेगा।

दिनांक 15 जुलाई को समय अनुकूल नहीं रहेगा इसलिए 13-14 जुलाई में ही सभी जरूरी कार्यों को निबटाने की कोशिश करें। आगे समय प्रतिकूल है। अधिक प्रयत्न करने के बावजूद कम सफलता का योग है।

16-23 जुलाई वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई माह का तृतीय सप्ताह उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है। 16-17 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। दाम्पत्य सुख सामान्य रहेगा। आपस में किसी विषय को लेकर विचारों में मतभेद हो सकता है। वाद-विवाद से बचें यदि जरूरी न हो तो लम्बी यात्रा न करें। नौकरी करने वालों को अधिकारी व साथियों से सहयोग में कमी रहने के कारण मानसिक अशांति हो सकती है।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि अष्टम भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है विरोधी पक्ष दबाने की कोशिश करेगा। सभी कार्यों में रुकावट व परेशानी महसूस होगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। शरीर मे थकावट महसूस होगी। पूंजी निवेश के लिए समय अनुकूल नहीं है इसलिए निवेश से बचें। परिवारिक सदस्य व रिश्तेदारों के साथ रिश्तों में कटुता नजर आ रही है इसलिए सचेत रहे धैर्य से काम लें। 

20-21 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि नवम भाव से गोचर कर रहे हैं। समय धीरे-धीरे अनुकूलता की तरह है आप प्रयत्नशील रहे सफलता प्राप्त होगी। बेरोजगारों को रोजगार की प्राप्ति संभव है। बड़े का आशीर्वाद प्राप्त होगा धर्म में आस्था बढ़ेगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि दशम भाव से गोचर करेंगे। समय पूर्णरूप से अनुकूल है। साथियों के सहयोग से व्यवसाय में आ रही रुकावटें दूर होंगी। राजनीतिक समीकरणों में सुधार होगी। अधिकारी वर्ग से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। सरकारी कार्यों को निपटाने की कोशिश करना रुके कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। घर में सुख-शांति बढ़ेगी।

24-31 जुलाई वृष राशि वालों के लिए जुलाई माह का चौथा सप्ताह शुभ फल देने वाला रहेगा। बीच में थोड़ी परेशानी हो सकती है। वैसे सामान्य तौर पर अच्छा रहेगा। 24-25 जुलाई को चन्द्रमा मीन राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। समय मनोनुकूल है। आप की बड़े व्यक्तियों से मेल मुलाकात होगी। घर में सुख-शांति बढ़ेगी। आय के साधनों में वृद्धि होगी। भवन संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।

26 जुलाई की दोपहर के बाद से समय प्रतिकूल है थोड़ा सचेत रहें। 26-27 को चन्द्रमा मेष राशि द्वादश भाव से गोचर करेंगे। आपके मन में निराशा का भाव रहेगा। जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। किसी भी कार्य में पूंजी निवेश न करें।

28 जुलाई की दोपहर के बाद से समय अनुकूल होगा। व्यवसाय में परेशानियां दूर होंगी और साथियों व कर्मचारी वर्ग से सहयोग मिलेगा। जिस कारण मानसिक परेशानी से राहत महसूस करेंगे।

29-30 जुलाई को चन्द्रमा वृषभ राशि लग्न भाव से गोचर करेंगे। समय आपके मनोनुकूल है। कार्यक्षेत्र की गतिविधियां अनुकूल रहेंगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। यात्रा लाभकारी रहेगी। चन्द्रमा उच्च राशि में होने के कारण सभी कार्यों में कम प्रयत्न करने में अधिक सफलता प्राप्त होगी। पूंजी निवेश के लिए समय अनुकूल है।

31 जुलाई को चन्द्रमा मिथुन राशि द्वितीय भाव से गोचर करेंगे। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। अनावश्यक खर्चों से मुक्ति मिलेगी। परिवार का सहयोग प्राप्त होगा और आर्थिक सहयोग मजबूत होगी।
 

वृष – Taurus

वृष – Taurus

वृषभ राशि के वालो के लिए 2016 शुभ और मंगलमय हो। हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

• वृषभ राशि वालों के लिए सन् 2016 संपूर्ण ग्रह योगायोगों के प्रभाव से सुख पूर्वक व शांति से बीतेगा।
• वर्ष के प्रारंभ में कारोबार संबंधी संपूर्ण उठा-पटक समाप्त होगी।
• लाभ प्राप्ति के साधन उपलब्ध होंगे।
• वर्ष के प्रारंभ में चर्तुथ स्थान का बृहस्पतिदेव सुखद पारिवारिक खर्चों में वृद्धि कराएगा।
• परंतु साथ ही धन का आगमन भी होगा।
• लेकिन स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
• परंतु शनिदेव सप्तम भाव में विराजित होकर संपूर्ण कष्टों से छुटकारा दिला रहे हैं।
• चिराभिलाषित मनोकामनाओं की पूर्ति होगी। धन प्राप्ति के एक से अधिक साधन उपलब्ध होंगे।
• राशि अधिपति शुक्रदेव वर्ष के आरंभ में श्रीशनिदेव के साथ सप्तम स्थान में भ्रमण कर रहे हैं।
• इन ग्रह योगायोगों में कारोबार व कॅरियर संबंधी समस्याओं का निवारण होगा।
• उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। सुख और ऐश्वर्य में वृद्घि होगी।
• आमोद-प्रामोद और विलासिता में जीवन व्यतीत होगा। महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल होगी।
• इस वर्ष आपको मान-सम्मान, यश और प्रतिष्ठा की भी प्राप्ति होगी।
• माता-पिता का पूर्ण सहयोग होगा। कॅरियर और रोजगार संबंधी समस्याओं का निवारण होगा।
• मनोनुकूल परीक्षा परिणाम प्राप्त होंगे और परीक्षा और प्रतियोगिताओं में मनोनुकूल सफलता भी हासिल होगी।
• जीवन साथी का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। साझेदारी के कार्यों में लाभ मिलेगा।
• जीवन साथी के वैचारिक मतभेदों की समाप्ति के साथ-साथ कानूनी मसलों में भी सफलता हासिल होगी।
• भले ही वर्ष की शुरुआत में कार्य गति और लाभ थोड़ी धीमी गति से रहेंगे।
• परंतु 11 अगस्त 2016 में जब बृहस्पतिदेव कन्या राशि में प्रवेश कर पंचम भाव से गोचर करेंगे।
• तब आ रही सभी छोटी-मोटी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• कारोबार में वृद्घि और कारोबार में मनोनुकूल लाभ की प्राप्ति होगी। लेन-देन के मसलें निपटेंगे।
• यदि आप नौकरी में है तो यह वर्ष आपके लिए सफलताओं से भरा रहेगा।
• हां, मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि इस साल साझेदारी में कारोबार करने वाले व्यापारियों को यह वर्ष सफलताओं से भरा रहेगा।
• परंतु वे लोग जो नौकरी में है उन्हें 8 जनवरी से लेकर 9 मई के मध्य तक थोड़ा सा अपनी नौकरी को बना कर रखना होगा।
• बॉस से रखना होगा। सहकर्मियों को साथ लेकर चलना पड़ेगा तो बहुत अच्छा रहेगा।
• परंतु मेहनत और परिश्रम के लाभ में कोई कमी नहीं आएगी।
• फिर भी ऐसी अवस्था में व्यापारियों को थोड़ी सी सावधानी बरतनी पड़ेगी।
• विशेष रूप से लेनदेन में सावधानी बरतें। धन उधार न दें।
• इस दौरान कोई व्यापार शुरू नहीं करें। बुजुर्गों की सलाह को अनदेखा न करें।
• शनिदेव इस वर्ष आपको कोर्ट कचहरी के मसलों में विजयी दिलाएंगे।
• थोड़ा सा धैर्य और संयम रखेंगे तो आपको संपूर्ण सफलताओं का योग नजर आ रहा है। लेकिन इस वर्ष नैतिकता का दामन पकड़े रखना बहुत जरूरी होंगे।
• अपनों के साथ विश्वासघात न करें। विवाहित मर्यादाओं को नहीं तोड़ेंगे तो बहुत अच्छा रहेगा।
• अन्यथा कानूनी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
• स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से विचार करें तो वर्ष का प्रारंभ अनुकूल नजर आ रहा है।
• फिर भी 25 मार्च से 13 अगस्त के मध्य थोड़ी सी सावधानी बरतनी पड़ेगी।
• खान-पान पर ध्यान दें। मानसिक तनाव से बचें तो बहुत अच्छा रहेगा।
• पत्नी, माता, बहन एवं किसी महिला सहयोगी की वजह से इस वर्ष आपकी किस्मत चमक सकती हैं।
• कॅरियर के दृष्टिकोण से यह वर्ष मनोनुकूल सफलताओं से भरा रहेगा। लाभदायक व महत्वपूर्ण बदलाव होंगे।
• सहजता, गंभीरता और संजिदगी से कार्य करने की शैली की वजह से परिणाम आपके पक्ष में अवश्य रहेंगे।
• आप अपने लक्ष्य की पूर्ति बड़े आराम से कर लेंगे। सरकारी मसलों में पूर्ण लाभ प्राप्त होगा।
• राजनीतिक वर्चस्व बढ़ेगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होने से पैसों की आवाक् बढ़ेगी।
• चल-अचल संपत्ति का लाभ बढ़ेगा। अपनों का पूर्ण सहयोग पारिवारिक सदस्यों एवं रिश्तेदारों का साथ लाभदायक रहेगा।
• संपूर्ण सफलता के साथ-साथ फिर भी कारोबार में अपनी पैनी नजर रखना आपके लिए लाभदायक रहेगा।
• स्व: अनुभव यह भी संकेत देता है कि 2016 में किसी अपने का साथ छुटेगा या बिछोह झेलना पड़ सकता है।

व्यवसाय एवं कॅरियर के दृष्टिकोण से

• वृषभ राशि के व्यापारी वर्ग के जातक-जातिकाओं के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा।
• वर्ष के प्रारंभ में चतुर्थ भाव में सिंह राशि के बृहस्पतिदेव और सप्तम भाव में वृश्चिक राशि के शनिदेव का चर्तुदशम योग इस वर्ष आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाएगा।
• कॅरियर, कारोबार एवं व्यावसायिक वर्ग को अपेक्षा के अनुकूल धन लाभ होगा।
• पुराने व्यवसाय मनोनुकूल सफलता देंगे।
• साथ ही कारोबार में आप नए कीर्तिमान भी स्थापित कर सकते हैं।
• 25 मार्च से लेकर 13 अगस्त 2016 तक नये व्यवसाय विस्तार का मनोनुकूल अवसर प्राप्त होगा।
• आय के साधनों में बढ़ोतरी होगी। सरकारी अधिकारियों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
• राजनीतिक सहयोगियों की वजह से कारोबार में सफलता मिलेगी।
• चल-अचल संपत्ति खरीदने में सफलता मिलेगी। कारोबार में लाभ मिलेगा।
• वैसे साझेदारी में व्यापार करने वाले जातक-जातिकाओं के लिए वर्ष का प्रारंभ सफलताओं से भरा रहेगा।
• यदि आप किसी फैक्ट्री के मालिक है या आपका वस्त्रों का व्यापार है या आप भोजन या होटल संबंधी कारोबार से जुड़े हुए है तो यह वर्ष आपको मनोनुकूल धन लाभ की प्राप्ति कराएगा।
• परंतु यदि आप नौकरी में है तो 8 जनवरी से लेकर 9 मई 2016 के बीच में थोड़ा सा सावधानी बरतनी होगी।
• कॅरियर को लेकर थोड़ी सी उठापटक की समस्या नजर आ रही है।
• परंतु 9 मई 2016 के बाद नौकरी और कॅरियर संबंधी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• स्वपराक्रम और कठिन परिश्रम और मित्रों के सहयोग से रुके हुए कार्य बनेंगे।
• अकस्मात धन लाभ होगा। सुख और सौभाग्य में वृद्घि होगी।
• कॅरियर के दृष्टिकोण से नौकरी में प्रमोशन, अनुकूल स्थानांतरण और आर्थिक स्थिति मनोनुकूल रहेगी।

सावधानी

• इस वर्ष व्यवसाय में बहुत जरूरी है कि लोगों पर अंधा विश्वास न करें।
• सरकारी नियमों की अवहेलना नुकसान देगी।
• अनजान लोगों के साथ कारोबारी संबंध आपके लिए मंहेंगे साबित हो सकते हैं या आपको मोटा नुकसान भी हो सकता है।
• बहुत जरूरी है व्यवसाय में व्यक्तिगत जीवन और व्यवसायिक जीवन पर हावी न हो इस बात पर ध्यान रखना होगा।

उपाय

• इस वर्ष किसी भी प्रकार की समस्या आने पर अपने घर में महामृत्युजय यंत्र स्थापित करें। धूप-दीप, नैवेद्य व पुष्प अर्पित करके प्रतिदिन पाशुपत स्तोत्र का विधिवत दो पाठ सुबह व शाम करें।
• 17 मार्च 2016 के आस-पास पीपल व बड़ का वृक्ष किसी धार्मिक स्थान, किसी संस्थान या सार्वजनिक स्थल पर लगाने से भी लाभ प्राप्त होगा।
• सात मुखी रूद्राक्ष के दो दाने, आठ मुखी रूद्राक्ष के दो दानें और तेरह मुखी एक दाना रूद्राक्ष लाल धागे में धारण करें।

पारिवारिक दृष्टिकोण से

• वृषभ राशि के जातक-जातिकाओं के लिए वर्ष 2016 पारिवारिक दृष्टिकोण से शुभ व अनुकूल बीतेगा।
• अनावश्यक पारिवारिक समस्याओं का निवारण होगा।
• पारिवारिक सदस्य, रिश्तेदारों व अपनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
• वर्ष प्रारंभ से लेकर 9 जनवरी 2016 तक राहुदेव चतुर्थ भाव से गोचर कर रहे हैं।
• यह समय पैतृक संपत्ति के बंटवारे के लिए भी ठीक नहीं है। उसके बाद का समय अनुकूल रहेगा।
• जीवन साथ की पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। पारिवारिक सामंजस्य अनुकूल रहेगा।
• संतान की शिक्षा संबंधी समस्याओं का निवारण भी होगा।
• लेकिन अप्रैल से 30 जून 2016 के बीच में जब मंगलदेव वक्री अवस्था में रहेगा तो किसी पारिवारिक सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर परेशानी आ सकती है।
• वैसे यह वर्ष आपके लिए मनोनुकूल रहेगा।
• घर परिवार में मांगलिक कार्य संपन्न होंगे। शादी-विवाह के मसले हल होंगे।
• वर्ष के बीच में परिवार में कोई न कोई खुशखबरी प्राप्त होगी।

उपाय 

• पारिवारिक तनाव की शांति के लिए मिट्टी के मटके में चीनी भर कर मिट्टी का ढक्कन लगा कर कहीं सुनसान जगह में बरगद के पेड़ के नीचे दबा दें।
• घर में दुर्गा सप्तशति का पाठ कराएं।

युवा वर्ग के लिए

• वृषभ राशि के युवा वर्ग के जातक-जातिकाओं के लिए यह वर्ष संपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहेगा।
• युवा वर्ग को वर्ष 2016 में कॅरियर संबंधी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• मेहनत के अनुरूप फल की प्राप्ति अवश्य होगी।
• भ्रम, भय, भ्रांतियों से पीछा छुटेगा।
• नौकरी में सफलता का योग है।
• अपने अधिकारियों से अच्छे संबंध बनेंगे।
• नया व्यवसाय शुरु कर सकते हैं।
• मित्र व भाई बंधुओं के सहयोग से सफलता का योग है।
• समय का लाभ उठाएं।

विद्यार्थी वर्ग के लिए

• विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष शिक्षा के दृष्टिकोण से लाभदायक एवं सफलताओं से भरा रहेगा।
• वर्ष के प्रारंभ में चतुर्थ स्थान का बृहस्पतिदेव शिक्षा में पूर्ण सफलता का संकेत दे रहा है।
• फिर भी व्यर्थ का भटकाव, आलस्य और प्रमाद से अपने आपको कुसंगति से बचाकर रखेंगे तो यह साल आपके लिए नई दिशा प्रदान करेगा।
• पढ़ाई के अच्छे साधन उपलब्ध होंगे।
• मनोनुकूल अभिलाषाएं पूरी होंगी।
• हां, एक बात का विद्यार्थियों को विशेष ध्यान देना होगा कि अधिक देर तक रात्रि भ्रमण न करें।
• और अपने चारों ओर के कुटिल मित्रों से बचकर रहें।
• मित्रमंडली आपको डुबो सकती है।

 युवा वर्ग व विद्यार्थियों के लिए उपाय

• प्रात:काल तुलसी के पौधे में जल दें व सायं काल उसके नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं। पारिवारिक सदस्यों का स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा।

विशेष

• अप्रैल से लेकर 30 जून 2016 के बीच में जमीन, घर, मकान आदि खरीदने और बेचने के मामले में जल्दबाजी न करें। यदि सम्भव हो तो न खरीदें और न बेचें।
• चार मुखी, छ: मुखी, सात मुखी और तेरह मुखी रूद्राक्ष लाल धागे में पिरोकर गले में धारण करें।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से

• वृषभ राशि के जातक-जातिकाओं के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सन् 2016 मनोनुकूल खुशियां दे रहा है।
• स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। क्योंकि सप्तम स्थान में देवाधिदेव श्रीशनिदेव उत्तम स्वास्थ्य का संकेत दे रहे हैं।
• परंतु 25 मार्च से 13 अगस्त 2016 के बीच थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• वृद्घ व्यक्तियों के लिए यह वर्ष स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी देने वाला होगा।
• जिन जातक-जातिकाओं को निजकृत कर्मों की वजह से चतुर्थ भाव में अनुकूल ग्रह स्थित नहीं हैं उन्हें स्वास्थ्य सम्बन्धी विशेष परेशानी हो सकती है।
• जिनके चतुर्थ भाव में सूर्य-मंगल बैठा है, उन्हें छाती में दिक्कत हो सकती है।
• इसलिए इनको खान-पान का ध्यान रखना होगा व वाद-विवाद से बचना होगा।
• वाहन आदि को सावधानी से चलाना होगा।
• शेष समय आपके लिए अनुकूल व लाभदायक रहेगा।

उपाय

• अपने घर में शनि एवं मंगल यंत्र की स्थापना करें, प्रतिदिन नियमित रूप से घी और तेल का दीपक जलाएं तथा दशरथकृत शनि स्तोत्र के तीन पाठ सुबह व शाम करें साथ ही एक माला हनुमत गायत्री का भी जाप करें।
 

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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.