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राशिफल

सिंह – Leo

समय मध्यम है। संतान की पढ़ाई-लिखाई आदि की व्यवस्था में व्यस्त होंगे। धर्म-कर्म में आस्था बढ़ेगी। तीर्थ यात्रादि करना संभव होगा। कार्य व्यवस्था आदि के प्रति सचेत रहें। शेयर व लाटरी आदि में धन न लगाएं।

सिंह – Leo

सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह का तृतीय सप्ताह सामान्य शुभ फल देने वाला रहेगा। चन्द्रमा चतुर्थ भाव से सप्तम भाव तक गोचर करेंगे। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है।  

16-17 जुलाई को चन्द्रमा चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे। आपके सभी कार्यों में अड़चन व परेशानी महसूस होगी। दिल लगाकर प्रयत्न करने से सफलता का योग बनगा। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें। वाहन ध्यान से चलाएं दुर्घटना की संभावना है। किसी भी कार्य में पूंजी निवेश करने के लिए समय अनुकूल नहीं है।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। समय धीरे-धीरे अनुकूलता की तरफ बढ़ रहा है। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। संतान की तरफ से मन प्रसन्नचित रहेगा। संतान के कार्य मनोनुकूल बनने की संभावना है। बच्चों की पढ़ाई की सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। आय के साधनों में वृद्धि होगी।

20-21 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। आपका संपत्ति विवाद किसी की मध्यस्थता से हल हो सकता है। रोजगार को लेकर आप नई संभावनाएं व नये अवसर तलाशेंगे। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। वाद-विवाद से बचें। शत्रु पक्ष नुकसान पहुंचा सकता है। 

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। आपके स्वास्थ्य में सुधार होगा। कारोबारी भागीदारी सामान्य रहेगी। व्यवसाय बढ़ेगा। प्रेम प्रसंग परेशानी दे सकता है। इसलिए सचेत रहें। यात्रा लाभकारी रहेगी। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। आपस में वाद-विवाद समाप्त होगा और प्रेममय वातावरण रहेगा। 

सिंह – Leo

सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह का मासिक साप्ताहिक भविष्य

सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह के प्रारंभ में चन्द्रमा वृषभ राशि दशम भाव में, सूर्य, बुध व शुक्र मिथुन राशि एकादश भाव में, गुरु-राहु सिंह राशि प्रथम भाव में, मंगल तुला राशि तृतीय भाव में, शनि वृश्चिक राशि चतुर्थ भाव से गोचर कर रहे हैं।

1-7 जुलाई सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह का प्रथम सप्ताह शुभ फल देने वाला रहेगा। समय प्रतिकूलता का संकेत दे रहा है। 1-2 जुलाई को चन्द्रमा वृषभ राशि दशम भाव से गोचर करेंगे। आप नई परियोजनाओं, उद्यमों व कार्य कलापों को मूर्त रूप प्रदान करेंगे। उच्च अधिकारी व राजनीतिक लोगों के साथ व्यस्त  रहेंगे। उनके सहयोग से रुके हुए काम बनेेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

3-4 जुलाई के मध्य चन्द्रमा मिथुन राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय अनुकूल है। आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। आप व्यापार में ठोस व महत्वपूर्ण निणर्य लेंगे। जिससे व्यापार व कारोबार में आप को लाभ प्राप्त होगा। नौकरी में तरक्की मिलने के योग है, समय का लाभ उठाएं। दिनांक -5 जुलाई को दोपहर के बाद से समय प्रतिकूल रहेगा।

6-7 जुलाई को चन्द्रमा कर्क राशि द्वादश भाव से गोचर करेंगे। चन्द्रमा स्वराशि कर्क में होने के कारण शुभ फल दाता है परंतु द्वादश भाव के कारण चन्द्रमा प्रयत्न करने से फल देगा। आपकी व्यवसाय के विष्ज्ञय में लम्बी यात्रा हो सकती है। आप आयात-निर्यात के कार्यों में व्यस्त रहेंगे। अनावश्यक खर्चों में वृद्धि होगी। आप के किसी रिश्तेदार के साथ कोई अप्रिय घटना घट सकती है। आपके अपने लोग ही आपके साथ विश्वासघात कर सकते हैं। कृपया वाद-विवाद से बचें और जरूरी न हो तो यात्रा न करें।

8-15 जुलाई सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह का द्वितीय सप्ताह सामान्य शुभ फल देगा। चन्द्रमा लग्न से चतुर्थ भाव तक गोचर करेंगे। सप्ताह के अंत में किसी परेशानी से गुजरना पड़ सकता है। 8-9 जुलाई को चन्द्रमा प्रथम भाव सिंह राशि से गोचर करने वाले हैं। इसलिए पीछे से चली आ रही परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होंगी। आप की मेहनत व परिश्रम आप को सफलता देगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। परंतु क्रोध एवं जल्दबाजी से बचना। अधिकारी वर्ग का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा।

10-12 जुलाई के बीच चन्द्रमा कन्या राशि द्वितीय भाव से गोचर करेंगे। इसलिए आय के स्रोत अच्छे होंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होने के कारण आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार का पूरा सहयोग प्राप्त होगा। आपका मनोबल बढ़ेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। 

13-14 जुलाई को चन्द्रमा तृतीय भाव तुला राशि से गोचर करेंगे। समय आपके अनुकूल है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। भाई-बहनों के साथ आपस में मन मुटाव दूर होगा। उनके सहयोग से कारोबारी बेहतरी होगी। नौकरी वालों के लिए समय अनुकूल है आपके अधिकारी व साथियों से संबंध लाभकारी होंगे। आयात-निर्यात के कार्यों में ज्यादा व्यस्तता रहेगी। धन के लेन-देन के मामलों में सचेत रहें। क्रोध एवं जल्दबाजी से बचना। दिनांक 15 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है इसलिए सचेत रहें। सभी कार्यों में परेशानी व रुकावटें आयेंगी। मानसिक परेशानी बढ़ेगी। मकान-प्रोपर्टी व वाहन आदि से पूंजी निवेश न करें। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें।

16-23 जुलाई सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह का तृतीय सप्ताह सामान्य शुभ फल देने वाला रहेगा। चन्द्रमा चतुर्थ भाव से सप्तम भाव तक गोचर करेंगे। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है।  16-17 जुलाई को चन्द्रमा चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे। आपके सभी कार्यों में अड़चन व परेशानी महसूस होगी। दिल लगाकर प्रयत्न करने से सफलता का योग बनगा। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें। वाहन ध्यान से चलाएं दुर्घटना की संभावना है। किसी भी कार्य में पूंजी निवेश करने के लिए समय अनुकूल नहीं है।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। समय धीरे-धीरे अनुकूलता की तरफ बढ़ रहा है। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। संतान की तरफ से मन प्रसन्नचित रहेगा। संतान के कार्य मनोनुकूल बनने की संभावना है। बच्चों की पढ़ाई की सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। आय के साधनों में वृद्धि होगी।

20-21 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। आपका संपत्ति विवाद किसी की मध्यस्थता से हल हो सकता है। रोजगार को लेकर आप नई संभावनाएं व नये अवसर तलाशेंगे। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। वाद-विवाद से बचें। शत्रु पक्ष नुकसान पहुंचा सकता है। 

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। आपके स्वास्थ्य में सुधार होगा। कारोबारी भागीदारी सामान्य रहेगी। व्यवसाय बढ़ेगा। प्रेम प्रसंग परेशानी दे सकता है। इसलिए सचेत रहें। यात्रा लाभकारी रहेगी। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। आपस में वाद-विवाद समाप्त होगा और प्रेममय वातावरण रहेगा।

24-31 जुलाई सिंह राशि वालों के लिए जुलाई माह का अंतिम सप्ताह उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। चन्द्रमा अष्टम भाव से एकादश भाव तक गोचर करेंगे।  24-25 जुलाई को चन्द्रमा मीन राशि अष्टम भाव से गोचर करेंगे। 26 जुलाई दोपहर को नवम भाव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। समय पूर्ण रूप से प्रतिकूल है इसलिए सचेत रहें। अपने कार्यक्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यात्रा यदि जरूरी न हो तो न करें। आपके सभी कार्यों में विघ्र-वाधा रहेगी। अनावश्यक खर्चों में वृद्धि होगी। सरकारी नौकरी में तनाव रहेगा। अधिकारी वर्ग से सहयोग में कमी रहेगी।

26-27 जुलाई को चन्द्रमा मेष राशि नवम भाव से गोचर करेंगे। आपकी धर्मकार्य में रुचि बढ़ेगी। विद्यार्थी वर्ग को विशेष सफलता प्राप्त होगी। माता-पिता की तरफ से चिंता होगी। उनका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। धार्मिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ेगी। आपके कार्यक्षेत्र की प्रशंसा होगी। विरोधी पक्ष कमजोर होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

28-30 जुलाई को चन्द्रमा दशम भाव वृषभ राशि से गोचर करेंगे। 28 जुलाई दोपहर से सभी रुके हुए कार्य बनने लगेंगे। आपका उच्च राजनीतिक व्यक्तियों से संपर्क बनेगा। जिनकी मदद से कुछ नयी परियोजनाओं पर कार्य शुरू होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

31 जुलाई को चन्द्रमा मिथुन राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। समय मनोनुकूल है। आय के साधनों में वृद्धि होगी। नये मित्रों से भेंट मुलाकात होगी। यात्रा लाभकारी रहेगी। आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण मानसिक शांति बढ़ेगी। 

सिंह – Leo

सिंह राशि वालो के लिए 2016 शुभ और मंगलमय हो। हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

• सिंह राशि वालों के लिए वर्ष 2016 में बृहस्पतिदेव और शनिदेव का चर्तुदशम संबंध होने के कारण सफलताओं से भरा रहेगा।
• सिंह राशि वालों के लिए 2016 श्रीशनिदेव वृश्चिक राशि में चतुर्थ थाव से पूरे साल गोचर करेंगे।
• निजी अनुभव और मेरे मतानुसार सिंह राशि को देवाधिदेव श्रीशनिदेव की ढैय्या को लेकर किसी भी रूप से परेशान होने की जरूरत नहीं है।
• घर-परिवार का सहयोग मिलेगा।
• सफलता पूर्वक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रहेंगे।
• बस इस वर्ष सामाजिक, वैवाहिक और मानवीय रिश्तों की कद्र करें।
• नैतिकता का दामन पकड़ रखें।
• तो पूरा साल सफलता आपका दामन चूमेगी।
• 11 अगस्त से बृहस्पतिदेव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और शनिदेव से त्रिएकादश संबंध स्थापित करेंगे।
• कारोबारी समस्याओं का निवारण होगा। कारोबार विस्तार में सुअवसर मिलेगा।
• आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
• सिंह राशि के सभी जातक-जातिकाओं के लिए इस वर्ष शनिदेव कृपा की बरसात करेंगे।
• व्यावसायिक संबंधी सफलताओं से मन उत्साह से भरा रहेगा।
• संपूर्ण कारोबारी विघ्र दूर होंगे। व्यवसाय विस्तार का अवसर भी मिलेगा।
• रुके हुए धन की प्राप्ति होगी। आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
• आय के नये साधनों की प्राप्ति भी होगी।
• यह अलग बात है कि वर्ष के प्रारंभ में थोड़ी सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
• मन में बेचैनी व असंतोष के भाव भी रह सकते हैं।
• यह समय अधिक देर तक नहीं रहेगा।
• भयभीत होने की जरूरत नहीं है।
• भाग्य का सितारा आपके साथ है।
• मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी।
• वे लोग जिनके पास रोजगार नहीं है, रोजगार संबंधी समस्या का निवारण होगा।
• वे लोग जो नौकरी में है उनकी पदोन्नति होगी।
• मनचाही जगह पर स्थानांतरण होगा।
• कॅरियर और नौकरी संबंधी संपूर्ण समस्याओं का निवारण होगा।
• नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
• जिस विभाग में आप काम करते हैं उसमें आपका महत्व व गरिमा बढ़ेगी।
• धन लाभ के स्रोत बढ़ेंगे।
• इस वर्ष आप लोगों का सामाजिक, मान-सम्मान, सुयश बढ़ेगा।
• संपूर्ण किए गए प्रयास और प्रयत्न मनोनुकूल फल प्रदान करेंगें।
• व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह वर्ष आपके लिए अत्यधिक लाभपूर्ण रहेगा।
• आपका सहज स्वभाव, आपकी कार्यशैली, इस वर्ष आपको सफ लता प्रदान कराने में अत्याधिक सहायक रहेगा।
• इस वर्ष किया गया पूंजी निवेश उत्तम लाभ दिलाएगा।
• पारिवारिक दृष्टिकोण से भी स्थितियां अनुकल रहेंगी।
• पारिवारिक वातावरण सौहार्द्र पूर्ण रहेगा परंतु संतान पक्ष को लेकर सावधानी बरतनी पड़ेगी।
• सिंह राशि वालों के सभी जातक-जातिकाओं को 25 मार्च से 13 अगस्त 2016 के दृष्टिकोण से सावधानी बरतने की जरूरत है।
• स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से विशेष रूप से अप्रैल, जून का महीना कुछ परेशानियों से भरा रहेगा।
• इन महीनों में स्वास्थ्य पर थोड़ा सा ध्यान देना होगा।
• शिक्षा के दृष्टिकोण से विद्यार्थियों को इस वर्ष कठिन परिश्रम करना पड़ेगा।
• परंतु परीक्षाओं व प्रतियोगिताओं में किए गए प्रयास मनोनुकूल रहेंगे और आशानुकूल परिणाम भी प्राप्त होंगे।
• हां, एक बात का अवश्य ध्यान रखें कि आपकी एकाग्रता भंग नहीं हो।

सावधानी

• अत्याधिक आत्मविश्वास के कारण उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इससे बचें।
• वैवाहिक जीवन की मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करे तो समस्याएं नहीं आएगी।
• दैनिक दिनचर्या के साथ खिलवाड़ न करें।
• यदि आप सरकारी कर्मचारी है तो सरकारी विरोधी कार्यों में बचना अति आवश्यक होगा।
• व्यर्थ के अनैतिक संबंधों की वजह से कारोबार, कॅरियर, शिक्षा व परिवार आदि मामलों में आपको जग हंसाई का सामना करना पड़ सकता है।
• आपकी यह प्रवृत्ति की आप अन्याय को सहन नहीं करते हैं इस सच्चाई की वजह से थोड़ी सी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन आप डरे नहीं, सच्चाई पर अड़े रहें। सफलता आपका दामन चूमेगी।       

व्यवसाय और कॅरियर के दृष्टिकोण

• सिंह राशि के जातक-जातिकाओं के लिए व्यवसाय और कैरियर के दृष्टिकोण से वर्ष 2016 ठीक रहेगा।
• इस वर्ष कारोबार में कठिन परिश्रम और कड़ी मेहनत अवश्य करनी पड़ेगी। परंतु कारोबार में अच्छी सफलता मिलेगी।
• कारोबार में मनोनुकूल परिवर्तन का योग हैं। लेकिन किसी के साथ साझेदारी नहीं करें तो अच्छा रहेगा।
• आप व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करें।
• आप को लोगों का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा और तरक्की मिलेगी।
• आपको साथियों व कर्मचारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।
• जिस कारण आगे बढऩे में सफलता मिलेगी।
• नौकरी करने वालों के लिए यह वर्ष अच्छा है।
• इस वर्ष नौकरी में पदोन्नति प्राप्त होगी और आय के साधन बढ़ेंगे।
• अधिकारी वर्ग से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा।
• 9 जनवरी राहुदेव आपकी राशि में आएगें। ऊपर लिखी संपूर्ण सफलताएं आपको हासिल होगी।
• नवीन योजनाएं बनेगी। श्रीशनिदेव की कृपा से कॅरियर व कारोबार संबंधी संपूर्ण परिस्थितियां आपके नियंत्रण में रहेगी।

सावधानी

• आपका कारण क्रोध आपको कॅरियर व कारोबार में आपको नुकसान दे सकता है। सावधानी बरतें।
• व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखें।
• शेयर मार्किट, दलाली, जुआ व सट्टे में मोटे नुकसान की संभावना है। इससे बचकर रहें।
• चल-अचल संपत्ति खरीदते समय दस्तावेजों में हल्की सी चूक मोटे नुकसान का कारण बन सकती है।

उपाय
 
• इस वर्ष किसी भी प्रकार की व्यवसायिक परेशानी आने पर अपने घर में सम्पूर्ण महालक्ष्मी यंत्र श्रद्धापूर्वक स्थापित करें। धूप-दीप नैवेद्य, पुष्प अर्पित करने के बाद ú ह्रीं श्रीं क्लीं नमो भगवति माहेश्वरि अन्नपूर्णे स्वाहा। मंत्र की पांच माला सुबह व शाम अवश्य करें।
• कारोबारी, पारिवारिक व शरीरिक समस्याओं के निवारण के लिए प्रतिदिन घी और तेल का दीपक जला कर एक माला गायत्री मंत्र की और चार माला मंगलकारी शनि मंत्र की अवश्य करें।

पारिवारिक दृष्टिकोण से

• सिंह राशि के जातक-जातिकाओं के लिए वर्ष 2016 पारिवारिक दृष्टिकोण से मंगलमय और शुभ रहेगा।
• वृश्चिक राशि में शनिदेव चतुर्थ भाव में और सिंह राशि में बृहस्पतिदेव लग्न भाव में गोचर कर रहे हैं। इस कारण कोई भी पारिवारिक समस्या ज्यादा देर परेशान नहीं कर सकती इस वर्ष में।
• हां, संतान पक्ष को लेकर इस वर्ष आप अधिक उत्साहित रहेंगे।
• संतान पक्ष के कॅरियर और शिक्षा में मनोनुकूल सफलता हासिल होने से मन प्रफुल्लित रहेगा।
• पारिवारिक मसले एवं पैतृक संपत्ति के बंटवारें में यदि सूझ-बूझ और संयम से काम लेंगे तो विवादों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
• भूमि, भवन और वाहन सुख की प्राप्ति होगी।
• सुख और सौहार्द्र के वातावरण में बढ़ोतरी होगी।
• पूरे वर्ष किसी भी कार्य की सफलता के लिए आपको स्वयं जूझना होगा।
• लोगों के भरोसे नहीं रहेंगे तो और सफलता मिलेगी।
• लेकिन परिवार का सहयोग इस साल आपके लिए सराहानीय रहेगा।

उपाय 

• सिंह राशि वालों में 2016 में हर शनिवार और मंगलवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक अवश्य करना चाहिए।
• शनि पत्नी नाम स्तुति मंत्र की दो माला सुबह और शाम तेल का दीपक जला कर प्रतिदिन करें।
 
युवा वर्ग के लिए

• सिंह राशि वालें युवा वर्ग के लिए वर्ष 2016 प्रारंभ में थोड़ा सा मध्यम रहेगा।
• सफलता के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा।
• दैनिक दिनचर्या को नियमित रखना होगा।
• बुजुर्गों की सलाह पर ध्यान देना होगा।
• साथ ही पारिवारिक सदस्यों के भावनाओं की भी कद्र करनी पड़ेगी और रिश्तों को लेकर सावधानी बरतनी पड़ेगी।
• वर्ष के प्रारंभ में ऐसा नजर आ रहा है कि निरर्थक भटकाव भी हो सकता है।
• परंतु 9 मई 2016 के बाद संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• रोजगार की समस्याओं का निवारण होगा।
• अच्छी कंपनियों में नौकरी मिलने की संभावना है।
• यदि आप लोग अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो भी यह समय आपके लिए अनुकूल व लाभकारी रहेगा।

विद्यार्थी वर्ग के लिए

• सिंह राशि के विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष शिक्षा के दृष्टिकोण से कठिन परिश्रम करने का संकेत दे रहा हैं।
• प्रयास व परिश्रम के बावजूद ही मनोनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसीलिए प्रयासों में कोई कमी न रखें।
• व्यर्थ का रात्रि भ्रमण और निक्कमें मित्रों की मंडली से दूर रहना होगा।
• परंतु पारिवारिक पूर्ण सहयोग की प्राप्ति होगी।
• आवश्यकता के अनुसार धन की प्राप्ति भी होगी।
• गुरुजनों से टकराव से बचना चाहिए।
• साथ ही अनैतिक कार्यों व अनैतिक संबंधों से बचना होगा, अन्यथा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

युवा वर्ग व विद्यार्थियों के लिए उपाय

• शिवजी जी का पूजन पंचाक्षरी मंत्रों के साथ करना बहुत ही अनुकूल रहेगा।
• चावल, चान्दी, दूध आदि का दान करना।

विशेष

• जनवरी से मई 2016 के बीच आपकी लंबी यात्रा या विदेश यात्रा के योग हैं जिसमें व्यय की अधिकता रहेगी। इस वर्ष आपके लिए एक अनुकूल बात जरूरी होगी कि घर में किसी नये मेहमान का आगमन हो सकता है।
• इस वर्ष सिंह राशि के जातकों को किसी भी प्रकार की समस्या आने पर दो मुखी, चार और सात मुखी रुद्राक्ष लाल धागे में धारण करना उत्तम रहेगा। 

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से

• सिंह राशि के जातक-जातिकाओं के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह वर्ष मनोनुकूल रहेगा।
• मेरे अनुभव अनुसार कोई लंबी बीमारी का योग मुझे नजर नहीं आ रहा है।
• फिर भी आपको विशेष रूप से खान-पान पर ज्यादा देना होगा।
• ऐसा भोजन न करें जो गरिष्ठ हो, जो अभक्ष्य  हो।
• मार्च, जून और अक्टूबर महीने में विशेष रूप से उदर पीड़ा, कब्ज, गैस,चर्म रोग, पीलिया आदि जैसी बीमारियों से थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है।
• साथ ही झोला छाप डाक्टरों से मोटा नुकसान हो सकता है।
• इस बात पर ध्यान दें।
• पारिवारिक सदस्यों का इन महीनों में विशेष रूप से ध्यान रखें।
• साथ ही वो महिलाएं जो गर्भवती हं, उन्हें खास खयाल रखना चाहिए इन महीनों में ।

उपाय

• मकान के चारों कोनो पर चाँदी की चार किल गाड़ दें।
• चाँदी का चन्द्रमा बनाकर उसमें सवा छ: रती मोती लगाकर नीचे में दो मुखी रूद्राक्ष लगाकर धारण करें।
 
 

  • Aries
    मेष
  • Taurus
    वृष
  • GEIMINI
    मिथुन
  • Cancer
    कर्क
  • Leo
    सिंह
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  • Scorpio
    वृश्चिक
  • Sagittarius
    धनु
  • CAPRICORN
    मकर
  • Aquarius
    कुंभ
  • Pisces
    मीन
  • होली उन्माद, गरिमा और मर्यादा से भरा पर्व है, पहचाने इसकी सार्थकता

    सारा...रा...रा...रा...जोगी जी, सारा...रा...रा...रा...फागुन मास की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष मनाये जाने वाला होली का यह पावन त्यौहार सर्दी के अन्त और ग्रीष्म के प्रारम्भ के सन्धिकाल में तथा वसंत ऋतु की श्रीवृद्धि समृद्धि के मादक वातावरण में अपनी उपस्थिति देता है. फाल्गुन की पूर्णमासी को होने के कारण इसे फाग भी कहते हैं.

    पूर्णमासी से एक दिन पहले रात को लोग होली जलाते हैं और उसमें गेहूं की बालें तथा चने के छोले भुनते हैं. रंगों और संगीत का उन्माद लोगों को उत्साह और उमंग से भर देता है. वासंती पवन के साथ फागुनी रंगों की बौछार लिये होली का यह त्योहार प्रेम, हर्ष, उल्लास, हास्य विनोद, समानता चेतनता, जागति का पर्व है. यद्यपि इस पर्व के मनाये जाने के पीछे कुछ पौराणिक कथाएं हैं, तथापि इसे मनाये जाने के सामाजिक, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं. इस पर्व की सबसे ख़ास बात है कि यह मौसम और रंगों के अनुकूल होता है.

    होली के साथ एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है. एक राजा हिरण्यकष्यप था. जो चाहता था सभी उसे भगवान मानकर उसकी पूजा करें. उनका पुत्र प्रह्लाद उन्हें ईश्वर नहीं मानता था. बहुत समझाने पर भी वह नहीं समझा तो उन्होंने उसे मारने के कई उपाय किये, पर वह नहीं मरा. हिरण्यकष्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वर मिला हुआ था. होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गयी. ईश्वर की कृपा से होलिका जल गयी और प्रह्लाद सकुशल बच गया. इसी की याद में होली जलायी जाती है.

    इस पर्व को सम्पन्नता के लिहाज से भी बड़ा माना गया है. होली के अवसर पर किसानों की फसल पक जाती है. अतः लहलहाती फसलें देखकर किसान खुशी से झूम उठते हैं और आग में अनाज की बालों को भूनकर खाते एवं खिलाते हैं.

    अगले दिन सुबह अर्थात दुलहंडी के दिन होली खेली जाती है. सब लोग वैर-विरोध भूल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं, मिठाइयां खाते और खिलाते हैं तथा प्यार के रंगों में रंग जाते हैं. सभी एक दूसरे पर रंग डालते और गुलाल मलते हैं. गुंजिया और तरह-तरह की मिठाइयों से वातावरण में मिठास घुल जाती है. इसलिए कहते हैं ‘बुरा न मानो...होली है’.

    होली की सार्थकता तब तक नहीं हो सकती जब तक इसमें भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज की होली की बात न हो. ब्रज की होली तो सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु विश्व भर में प्रसिद्ध है. वहाँ मनाई जाने वाली होली बेहद ख़ास होती है क्यूंकि स्वयं प्रभु इस उत्सव को बड़े ही चाव से मानते थे और कहा जाता है आज भी श्रीकृष्ण इस पर्व को मानने आते हैं.

    आज के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो सभी वस्तुओं में मिलावट हो गयी है. आजकल अच्छे रंगों का प्रयोग न करके रासायनिक लेपनों, नशे आदि का प्रयोग करके इसकी गरिमा को समाप्त कर रहे हैं. आज के व्यस्त जीवन के लिए होली चुनौती है. इसे मंगलमय रूप देकर मनाया जाना चाहिए. तभी इसका भरपूर आनंद लिया जा सकेगा. इसके विपरीत पहले टेसू के रंगों का इस्तेमाल किया जाता था. कहते हैं टेसू के  प्रभाव से चेचक माता जैसी बीमारियों का शमन भी किया जाता है.

    होली का पर्व मनाये जाने के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक महत्त्व में से यह प्रमुख है कि होली समानता, सदभाव में वृद्धि करने, शत्रुता को मित्रता में बदलने का पर्व है. इस दिन छोटे-बड़े सभी अपनी सामाजिक पद-प्रतिष्ठा भूलकर मनोमालिन्य दूर करते हैं. अपने विरोधी भावों को छोड़ स्नेही भाव तरंगों में सराबोर हो हास्य-विनोद करते हैं, फगुवा गाते हैं .

    होली के इस पवित्र त्यौहार में समय परिवर्तन के साथ-साथ कुछ विकृतियों का प्रवेश हो गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसा भी प्रतीत होता है कि कहीं हम इसके मूल स्वरूप को विस्मृत न कर जायें. होली के दिन स्वाभाविक सहज हास्य-विनोद के स्थान पर कुरुचिपूर्ण अश्लील, भद्दे, पतनकारी मनोभावों का प्रयोग होने लगा है. किसी सभ्य सुसंस्कृत समाज के लिए इसे छेड़छाड़ का रूप देना उचित नहीं है .

    कई अवसरों पर अपने से सम्मानीय स्त्रियों के प्रति अमर्यादापूर्ण आचरण करते हुए इसकी गरिमा, महता को यदूल जाते हैं. होलिका को गाली देने का आशय कुछ दूसरे अर्थो में लेने लगे हैं. कुछ तो होली के अवसर पर अपनी बुराइयों को पवित्र अग्नि में होम करने की बजाये प्रतिशोध की भावनाओं में जलकर अमानवीय कृत्य करते हैं. मदिरा और भांग का आवश्यकता से अधिक सेवन असन्तुलित बना देता है.

    यदि हम इन दोषों से दूर रहकर होली के वास्तविक परम्परागत स्वरूप को कायम रखते हैं, तो इस त्योहार की जो महिमा है, गरिमा है, वह बनी रहेगी; क्योंकि होली तो जीवन को उल्लासमय, उज्जल बनाने का पर्व है.

    यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि हमारे देश ने त्योहारों की माला पहन रखी है. शायद कोई ऐसी महत्त्वपूर्ण अतिथि हो, जो किसी न किसी त्योहार, पर्व से सम्बन्धित न हो. छोटे-बड़े त्योहारों को लेकर चर्चा की जाए, तो हमारी सभी तिथियां किसी-न-किसी घटना का ही प्रतीक और स्मृति हैं. 

    यदि हम अपने पर्वों का सही मूल्यांकन करके उनकी गरिमा को बनाये रखेंगे तो उन्माद और हर्ष हमेशा बना रहेगा. 

  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.
     

  • स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    कहते हैं जिसने अपनी मातृभाषा में पकड़ मजबूत करली वही इंसान जीवन में सफल है और मातृभाषा के उत्थान के लिए हमें ही कदम उठाने पड़ेंगे. 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा हासिल है और हिंदी भारत में बोलचाल के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया था. हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 

    1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी को जनमानस की भाषा बताया था. साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि ‘संघ की राज-भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था. इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी लागू की गई तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोगों के बीच से विरोध के सुर भी उठने लगे और फिर अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. यही कारण रहा है कि हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा.

    आज पूरा विश्व ग्लोबल हो गया है. इस दौर में भाषा ने भी अपना रूप बदल लिया है. हिंदी की जगह अंग्रेजी हो गया है. मज़े की बात है जिसे हिंदी नहीं बोलनी आती उसे भी अच्छी नौकरी मिलती है क्यूंकि उसे अंग्रेजी बोलनी आती है. हिंदी आये या न आये, लेकिन “इंग्लिश” आनी ज़रूरी है. अपनी ही भाषा का अपने ही देश में इस तरह से ह्रास होना निंदनीय है.

    1991 के बाद भारत में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. नई प्रौद्योगिकी और इससे उपजते हुये सेवा और उद्योग देश की अर्थ, नीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव हुए. इस बदलाव का भाषा पर भी जबरदस्त असर पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई को समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से मातृभाषा उजड़ने लगी है. इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाया जाने लगा. इस पूरे सप्ताह सरकारी विभागों और विद्यालयों में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ताकि हिंदी को बढ़ावा दिया जा सके और ज़्यादा लोग इसका प्रयोग उतने ही स्वाभिमान से करे जैसे इंग्लिश का करते हैं. 

    आज सभी जगहों पर इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी का चलन भी बढ़ा है. लेकिन नई पीढ़ी कहीं इससे पूरी तरह से वंचित न रह जाए इसलिए समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए प्रयास कर रहा है. हर तबका अपने-अपने हिसाब से हिंदी का उत्थान करने का प्रयास कर रहा है. कवि अपनी कविताओं के ज़रिये, साहित्यकार अपने साहित्य के ज़रिये, शिक्षक अपनी विद्या के ज़रिये और घर में माता-पिता अपने संस्कारों के ज़रिये. ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है और आगे भी करता रहूँगा. मैं राज महाजन अपने तरीके से हिंदी के उत्थान में जुड़ा हूँ. हो सकता है मेरा करना काफी नहीं होगा. लेकिन मैंने अपने ही बूते पर एक शुरुआत की है जिससे मैं आने वाली पीढ़ी को हिंदी का महत्व समझा सकूँ. मेरा मानना है अगर समाज को उन्नत और उत्कृष्ट बनाना है तो पहले अपनी जड़ों को मजबूत और संमृद्ध बनाना होगा. इसके लिए भाषा को पतन से बचाना होगा. ज़रूरी नहीं कि उत्थान तभी होगा जब हम रोज हिंदी बोलेंगे. उत्थान तब होगा जब हिंदी बोलने पर शर्म महसूस नहीं करेंगे. पूरी आत्मीयता से हिंदी को अपनाएंगे, हिंदुत्व का विकास हिंदी से ही होगा. आज हिंदी दिवस पर मैं सभी को इस ओर प्रेरित करता हूँ और आने वाली पीढ़ी से एक 
    गुज़ारिश करता हूँ कि अंग्रेजी का प्रयोग तो करें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें जिनमें  हिन्द और हिंदी समाई है. हिंदी से जुड़ना मेरे लिए गौरव का विषय है.