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राशिफल

मिथुन – Gemini

मिथुन – Gemini

सितारों की चाल अनुकूल है अत: मनोवांछित कार्य बनेंगे। नौकरी पेशे में उन्नति के अवसर होंगे तथा अर्थ संकट भी समाप्त होंगे। कारोबार में मित्रों से सहयोग होगा तथा ससुराल पक्ष से शुभ समाचार व लाभ की प्राप्ति होगी।

मिथुन – Gemini

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मिथुन राशि वालों के लिए जुलाई माह का तीसरा सप्ताह थोड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। सप्ताह के मध्य में कुछ परेशानी आने की संभावना है। चन्द्रमा षष्ठ भाव से नवम भाव तक गोचर करेंगे। 

16-17 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। प्रतिस्पर्धा में शत्रुओं से सावधान रहें। पूंजी निवेश करते समय सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि धोखा-धड़ी होने की संभावना है।  नौकरी को लेकर कुछ तनाव रहेगा। साथियों के सहयोग की कमी रहेगी।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। इसलिए दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। आपसी तालमेल अच्छा रहेगा। आप शादी-विवाह से संबंधित कार्य में व्यस्त रहेंगे। यात्रा पर जा सकते हैं। यात्रा के दौरान आनंद से परिपूर्ण होगी।

20-21 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि अष्टम भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है व्यवसाय में थोड़ी सी भी असावधानी से भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। संपत्ति को लेकर वाद-विवाद बढऩे की संभावना है। इसलिए धैर्य से काम लें। अनावश्यक खर्चों से बचें। वाहन ध्यान से चलाएं दुर्घटना होने की संभावना है। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें और किसी भी कार्य में पूंजी निवेश न करें।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि नवम भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूलता की तरफ अग्रसर है। धीरे-धीरे पीछे से चली आ रही परेशानी दूर होगी। नये साथियों से मेल मुलाकात होगी। जिस कारण व्यवसाय में आ रही रुकावटें दूर होंगी। नौकरी करने वालों को अपने अधिकारी वर्ग व साथियों से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
 

मिथुन – Gemini

मिथुन – Gemini

मिथुन राशि वाले लोगो के लिए 2016 शुभ और मंगलमय हो। हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

• मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2016 महत्वकांक्षाओं की पूर्ति का वर्ष है। 
• कारोबार के दृष्टिकोण से अनुकूल और लाभदायक रहेगा।
• धन लाभ के स्रोत बढ़ेंगे। कारोबार में विस्तार का अवसर मिलेगा।
• आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
• अनावश्यक व्यावसायिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का निवारण होगा।
• छुट-पुट समस्याओं के अलावा वर्ष का प्रारंभ मिथुन राशि वालों के लिए सफलताओं से भरा रहेगा। शत्रु परास्त होंगे।
• कारोबार में नए साझेदार प्राप्त होंगे। पारिवारिक वातावरण में अनुकूलता और परिवार से खुशी की खबर भी प्राप्त हो सकती है।
• काम काज में किए गए परिणाम मनोनुकूल रहेंगे।
• यदि आप नौकरी में है तो आपके लिए समय अनुकूल रहेगा। कॅरियर संबंधी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• नौकरी में मनोनुकूल उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। जीवन साथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
• यदि विवाह संबंधी कोई समस्या है तो उसका निवारण होगा। भाग्य आपके पक्ष में करवट ले रहा हैं।
• इसीलिए आपके आसपास का वातावरण मनोनुकूल रहेगा।
• जीवन में आ रही हर समस्या का समाधान बुद्घि व विवेक से निकाल लेंगे।
• परंतु  फिर भी इस वर्ष शत्रु पक्ष से सावधान रहना बहुत जरूरी है।
• अपने आसपास के लोगों पर पैनी नजर रखना बहुत जरूरी है।
• कोई आपका फायदा न उठाएं और कोई आपको षडयंत्र में फसां न दें इसका अवलोकन हमेशा करते रहें।
• बृहस्पतिदेव तीसरे भाव से गोचर कर रहा है।
• पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति ध्यान देना बहुत जरूरी है।
• अन्यथा कलह की संभावना है। वैसे ग्रह गोचर संकेत दे रहे हैं कि आपकी दैनिक दिनचर्या सुव्यवस्थित रहने के कारण स्वास्थ्य भी आपका अनुकूल रहेगा।
• 9 जनवरी 2016 के उपरांत राहुदेव बृहस्पतिदेव के साथ गोचर करेगा और यह समय शत्रु पक्ष को लेकर थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• चल-अचल संपत्ति खरीदते समय कानूनी दांव-पेंच का विशेष ध्यान रखें।
• साथ ही पारिवारिक संबंधों को भी संभाल कर रखें।
• लेन-देन के मामलों में किसी पर अंधाविश्वास नहीं करें।
• क्योंकि 8 जनवरी से लेकर 9 मई 2016 के बीच बृहस्पतिदवे वक्री अवस्था में रहेंगे।
• इसीलिए थोड़ी सी सावधानी अवश्य बरतें।
• विशेष रूप से बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतें।
• परंतु 9 मई 2016 के बाद पुन: समय अनुकूल व सफलताओं से भरा हुआ।
• भूमि-भवन व वाहन का प्रबल योग। अचल संपत्ति की खरीद फरोख्त में लाभ।
• विवाह संबंधी परेशानियों का निवारण।
• यदि आप अध्ययनरत विद्यार्थी है तो शिक्षा के दृष्टिकोण से यह साल आपके लिए खुशियों से भरा रहेगा।
• अविवाहितों का विवाह का योग।
• जीवन साथी के साथ तालमेल बिठा कर रखें तो आने वाला समय खुशियों से भरा रहेगा।
• फिर भी कुछ बातें में आपको बता रहा हूं इन पर सावधानी अवश्य बरतें।

सावधानी

• शत्रु षडयंत्रों से जरूर सावधान रहें।
• साझेदारी के कार्यों में लापरवाही न बरतें।
•लेन-देन के मामलों को लेकर अंधाविश्वास न करें।

व्यवसाय एवं कॅरियर के दृष्टिकोण से

• मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2016 कारोबार व कॅरियर के दृष्टिकोण से खुशियों से भरा रहेगा।
• कारोबार में सफलता मिलेगी। कॅरियर संबंधी परेशानियों का निवारण होगा।
• नये आय के साधन उपलब्ध होंगे।
• साथ ही लाभ के मार्ग प्रशस्त होगें, साझेदारी के कार्यो में विशेष लाभ की संभावना।
• साथ ही आप पुराने साझेदारों को हटा कर नए साझेदार भी बना सकते हैं।
• देव गुरु बृहस्पति की भाग्य स्थान पर दृष्टि सफलता का अनुकूल संकेत दे रही है। 
• व्यवसाय में परिवर्तन करने से भी लाभ प्राप्त होगा। व्यापार की दृष्टि से समय आपके साथ है।
• समय का पूरा लाभ उठाएं। व्यापार के सम्बन्ध में लम्बी यात्राओं का योग भी बन सकता है।
• नौकरी कर रहे जातकों का इस वर्ष पदोन्नति मिलने की सम्भावना है।
• मित्रों व अधिकारी वर्ग का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा।
• नौकरी तलाश रहे जातकों को इस वर्ष प्रयत्न करने से सफलता भी प्राप्त हो सकती है।
• चल-अचल संपत्ति का लाभ मिलेगा।
• साथ ही अगस्त 2016 में आपको भूमि-भवन आदि के नियमित कोई बड़ा धन लाभ भी हो सकता है।
• कॅरियर के दृष्टिकोण से समय अनुकूल नजर आ रहा है।
• नौकरी में अनुकूल सफलता मिलेगी। अधिकारी आपसे खुश रहेंगे।
• वर्ष के प्रारंभ में आपका प्रमोशन या मनोनुकूल स्थान परिवर्तन भी कर सकते हैं।

उपाय

• इस वर्ष कारोबार में किसी भी प्रकार की समस्या या रूकावट आने पर अपने व्यापारिक स्थान पर दुर्गा यंत्र स्थापित करें। धूप-दीप, नैवेद्य और पुष्प अर्पित करने के बाद ú ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। मंत्र की पाँच माला सुबह व शाम करें।
• 21 बुधवार चौपायों को हरी घास या हरा चारा देना अनुकूल रहेगा।
• दुर्गा सप्तशती का पाठ करना आपके लिए अनुकूल रहेगा।

पारिवारिक दृष्टिकोण से

• मिथुन राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए वर्ष 2016 पारिवारिक दृष्टिकोण से अनुकूल उपलब्धियों से भरा रहेगा।
• आपकी पारिवारिक स्थिति अनुकूल रहेगी। परिवार में सामंजस्य बना रहेगा।
• परिवार के सभी सदस्य आपस में मिलकर कार्य करेंगे।
• साथ ही सुख शांति व सौहाद्रपूर्ण वातावरण भी बना रहेगा।
• परिवार के सभी सदस्यों में आपसी मेल-जोल भी अनुकूल रहेगा।
• दांपत्य संबंधों में मधुरता रहेगी। जीवन साथी के साथ उत्पन्न गलतफहमियों का निवारण होगा।
• 8 जनवरी से 9 मई 2016 के बीच में समय थोड़ा सा सावधानी का है।
• इस समय संतान की शिक्षा व व्यवहार को लेकर आप थोड़े से चिंतित हो सकते हैं।
• परंतु पारिवारिक सदस्यों, बुजुर्गों एवं मित्रों के सहयोग से समस्याओं का निवारण अवश्य होगा।
• 9 जनवरी 2016 से अगस्त 2016 तक बृहस्पतिदेव और राहुदेव की युति यह संकेत दे रही है कि नैतिकता का दामन पकड़ कर रखें।
• वैवाहिक जीवन की मर्यादाओं का पालन करें।
• जिससे आपको सामाजिक आलोचनाओं का शिकार नहीं होना पड़े। स्वभाव में सरलता लानी पड़ेगी।
• यदि इन बातों का ध्यान दिया तो यह वर्ष पारिवारिक दृष्टिकोण से बहुत शुभ व अनुकूल बीतेगा।
• फिर भी 2016 में माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता हैं।
• माता-पिता के साथ वैचारिक मतभेद भी नजर आ रहे हैं। इस पर थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• 2016 में मिथुन राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए विवाह का भी सुन्दर योग नजर आ रहा है।

उपाय

• विष्णु सहस्र नाम का पाठ करें।
• सूर्य को प्रतिदिन जल अर्पण करें।

युवा वर्ग के लिए

• मिथुन राशि के युवा वर्ग के लिए वर्ष 2016 लाभ व सफलताओं से भरा रहेगा।
• कॅरियर संबंधी परेशानियों का निवारण होगा
• नौकरी और व्यवसाय में कठिन परिश्रम का अनुकूल फल प्राप्त होगा।
• चारों ओर किये गये परिश्रम के अनुकूल सफलताएं प्राप्त होगी।
• सरकार से लाभ मिलेगा।
• परंतु बहुत जरूरी है अनैतिक कार्यों से दूर रहें।
• सरकार विरोधी कोई कार्य न करें।
• अन्यथा परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
• मित्र मंडली आपको गलत कार्यों से जोड़ सकती है, उनसे भी सावधान रहें।

विद्यार्थी वर्ग के लिए

• विद्यार्थी वर्ग के लिए पढ़ाई में अच्छी सफलता का समय है।
• अध्यापकों व माता-पिता का सहयोग प्राप्त होगा।
• विद्यार्थी वर्ग को पूर्ण मेहनत करनी चाहिए। सफलता इनके कदम चूमेंगी।
• सामान्यत: वर्ष का पूर्वाद्र्ध शिक्षा के दृष्टिकोण से पूर्ण सफलता प्रदान करेगा।
• फिर भी देर तक घर से बाहर रहना व गलत संगत व खान-पान समस्या का कारण बन सकता है।
• समय अच्छा है, इसलिए यदि प्रयत्न करते हैं तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

युवा वर्ग व विद्यार्थियों के लिए उपाय

• प्रतिदिन जरूरतमंद गरीब कन्या को भोजन अवश्य कराएं।

विशेष 

• कारोबारी, पारिवारिक व शरीरिक समस्याओं के निवारण के लिए चार मुखी, छ: मुखी और आठ मुखी रूद्राक्ष लाल धागे में धारण करना मिथुन राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए बहुत ही अनुकूल रहेगा।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से

• स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वर्ष 2016 आपके लिए अच्छा रहेगा।
• परंतु कभी कभार पुराना रोग परेशानी दे सकता है।
• 8 जनवरी से 9 मई 2016 के मध्य में खान-पान व दैनिक दिनचर्या को नियमित नहीं रखा तो रक्तचाप, मधुमेह, पेट संबंधी बीमारी, सर्दी-जुकाम, मौसमी बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
• परंतु ग्रह योगायोगों के अनुसार इस वर्ष मेरी दृष्टि में किसी गंभीर या घातक बीमारी की संभावना नजर नहीं आ रही है।
• फिर भी बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और उनका आशीर्वाद लेते रहें। उनके आशीर्वाद से आप अवश्य सुखी रहेंगे।

उपाय

• स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी के निवारण के लिए व्यक्ति को सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए व पीपल का पेड़ किसी धर्म स्थान या अन्य किसी संस्थान आदि में लगाना चाहिए।
• मूंग साबुत, हरी चीज़ें दान देना या जल प्रवाह करना।
• तांबे के छेद वाले पैसे को हर बुधवार को चलते पानी में बहाना।
 

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  • होली उन्माद, गरिमा और मर्यादा से भरा पर्व है, पहचाने इसकी सार्थकता

    होली उन्माद, गरिमा और मर्यादा से भरा पर्व है, पहचाने इसकी सार्थकता

    सारा...रा...रा...रा...जोगी जी, सारा...रा...रा...रा...फागुन मास की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष मनाये जाने वाला होली का यह पावन त्यौहार सर्दी के अन्त और ग्रीष्म के प्रारम्भ के सन्धिकाल में तथा वसंत ऋतु की श्रीवृद्धि समृद्धि के मादक वातावरण में अपनी उपस्थिति देता है. फाल्गुन की पूर्णमासी को होने के कारण इसे फाग भी कहते हैं.

    पूर्णमासी से एक दिन पहले रात को लोग होली जलाते हैं और उसमें गेहूं की बालें तथा चने के छोले भुनते हैं. रंगों और संगीत का उन्माद लोगों को उत्साह और उमंग से भर देता है. वासंती पवन के साथ फागुनी रंगों की बौछार लिये होली का यह त्योहार प्रेम, हर्ष, उल्लास, हास्य विनोद, समानता चेतनता, जागति का पर्व है. यद्यपि इस पर्व के मनाये जाने के पीछे कुछ पौराणिक कथाएं हैं, तथापि इसे मनाये जाने के सामाजिक, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं. इस पर्व की सबसे ख़ास बात है कि यह मौसम और रंगों के अनुकूल होता है.

    होली के साथ एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है. एक राजा हिरण्यकष्यप था. जो चाहता था सभी उसे भगवान मानकर उसकी पूजा करें. उनका पुत्र प्रह्लाद उन्हें ईश्वर नहीं मानता था. बहुत समझाने पर भी वह नहीं समझा तो उन्होंने उसे मारने के कई उपाय किये, पर वह नहीं मरा. हिरण्यकष्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वर मिला हुआ था. होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गयी. ईश्वर की कृपा से होलिका जल गयी और प्रह्लाद सकुशल बच गया. इसी की याद में होली जलायी जाती है.

    इस पर्व को सम्पन्नता के लिहाज से भी बड़ा माना गया है. होली के अवसर पर किसानों की फसल पक जाती है. अतः लहलहाती फसलें देखकर किसान खुशी से झूम उठते हैं और आग में अनाज की बालों को भूनकर खाते एवं खिलाते हैं.

    अगले दिन सुबह अर्थात दुलहंडी के दिन होली खेली जाती है. सब लोग वैर-विरोध भूल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं, मिठाइयां खाते और खिलाते हैं तथा प्यार के रंगों में रंग जाते हैं. सभी एक दूसरे पर रंग डालते और गुलाल मलते हैं. गुंजिया और तरह-तरह की मिठाइयों से वातावरण में मिठास घुल जाती है. इसलिए कहते हैं ‘बुरा न मानो...होली है’.

    होली की सार्थकता तब तक नहीं हो सकती जब तक इसमें भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज की होली की बात न हो. ब्रज की होली तो सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु विश्व भर में प्रसिद्ध है. वहाँ मनाई जाने वाली होली बेहद ख़ास होती है क्यूंकि स्वयं प्रभु इस उत्सव को बड़े ही चाव से मानते थे और कहा जाता है आज भी श्रीकृष्ण इस पर्व को मानने आते हैं.

    आज के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो सभी वस्तुओं में मिलावट हो गयी है. आजकल अच्छे रंगों का प्रयोग न करके रासायनिक लेपनों, नशे आदि का प्रयोग करके इसकी गरिमा को समाप्त कर रहे हैं. आज के व्यस्त जीवन के लिए होली चुनौती है. इसे मंगलमय रूप देकर मनाया जाना चाहिए. तभी इसका भरपूर आनंद लिया जा सकेगा. इसके विपरीत पहले टेसू के रंगों का इस्तेमाल किया जाता था. कहते हैं टेसू के  प्रभाव से चेचक माता जैसी बीमारियों का शमन भी किया जाता है.

    होली का पर्व मनाये जाने के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक महत्त्व में से यह प्रमुख है कि होली समानता, सदभाव में वृद्धि करने, शत्रुता को मित्रता में बदलने का पर्व है. इस दिन छोटे-बड़े सभी अपनी सामाजिक पद-प्रतिष्ठा भूलकर मनोमालिन्य दूर करते हैं. अपने विरोधी भावों को छोड़ स्नेही भाव तरंगों में सराबोर हो हास्य-विनोद करते हैं, फगुवा गाते हैं .

    होली के इस पवित्र त्यौहार में समय परिवर्तन के साथ-साथ कुछ विकृतियों का प्रवेश हो गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसा भी प्रतीत होता है कि कहीं हम इसके मूल स्वरूप को विस्मृत न कर जायें. होली के दिन स्वाभाविक सहज हास्य-विनोद के स्थान पर कुरुचिपूर्ण अश्लील, भद्दे, पतनकारी मनोभावों का प्रयोग होने लगा है. किसी सभ्य सुसंस्कृत समाज के लिए इसे छेड़छाड़ का रूप देना उचित नहीं है .

    कई अवसरों पर अपने से सम्मानीय स्त्रियों के प्रति अमर्यादापूर्ण आचरण करते हुए इसकी गरिमा, महता को यदूल जाते हैं. होलिका को गाली देने का आशय कुछ दूसरे अर्थो में लेने लगे हैं. कुछ तो होली के अवसर पर अपनी बुराइयों को पवित्र अग्नि में होम करने की बजाये प्रतिशोध की भावनाओं में जलकर अमानवीय कृत्य करते हैं. मदिरा और भांग का आवश्यकता से अधिक सेवन असन्तुलित बना देता है.

    यदि हम इन दोषों से दूर रहकर होली के वास्तविक परम्परागत स्वरूप को कायम रखते हैं, तो इस त्योहार की जो महिमा है, गरिमा है, वह बनी रहेगी; क्योंकि होली तो जीवन को उल्लासमय, उज्जल बनाने का पर्व है.

    यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि हमारे देश ने त्योहारों की माला पहन रखी है. शायद कोई ऐसी महत्त्वपूर्ण अतिथि हो, जो किसी न किसी त्योहार, पर्व से सम्बन्धित न हो. छोटे-बड़े त्योहारों को लेकर चर्चा की जाए, तो हमारी सभी तिथियां किसी-न-किसी घटना का ही प्रतीक और स्मृति हैं. 

    यदि हम अपने पर्वों का सही मूल्यांकन करके उनकी गरिमा को बनाये रखेंगे तो उन्माद और हर्ष हमेशा बना रहेगा. 

  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.
     

  • स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    कहते हैं जिसने अपनी मातृभाषा में पकड़ मजबूत करली वही इंसान जीवन में सफल है और मातृभाषा के उत्थान के लिए हमें ही कदम उठाने पड़ेंगे. 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा हासिल है और हिंदी भारत में बोलचाल के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया था. हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 

    1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी को जनमानस की भाषा बताया था. साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि ‘संघ की राज-भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था. इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी लागू की गई तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोगों के बीच से विरोध के सुर भी उठने लगे और फिर अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. यही कारण रहा है कि हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा.

    आज पूरा विश्व ग्लोबल हो गया है. इस दौर में भाषा ने भी अपना रूप बदल लिया है. हिंदी की जगह अंग्रेजी हो गया है. मज़े की बात है जिसे हिंदी नहीं बोलनी आती उसे भी अच्छी नौकरी मिलती है क्यूंकि उसे अंग्रेजी बोलनी आती है. हिंदी आये या न आये, लेकिन “इंग्लिश” आनी ज़रूरी है. अपनी ही भाषा का अपने ही देश में इस तरह से ह्रास होना निंदनीय है.

    1991 के बाद भारत में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. नई प्रौद्योगिकी और इससे उपजते हुये सेवा और उद्योग देश की अर्थ, नीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव हुए. इस बदलाव का भाषा पर भी जबरदस्त असर पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई को समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से मातृभाषा उजड़ने लगी है. इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाया जाने लगा. इस पूरे सप्ताह सरकारी विभागों और विद्यालयों में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ताकि हिंदी को बढ़ावा दिया जा सके और ज़्यादा लोग इसका प्रयोग उतने ही स्वाभिमान से करे जैसे इंग्लिश का करते हैं. 

    आज सभी जगहों पर इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी का चलन भी बढ़ा है. लेकिन नई पीढ़ी कहीं इससे पूरी तरह से वंचित न रह जाए इसलिए समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए प्रयास कर रहा है. हर तबका अपने-अपने हिसाब से हिंदी का उत्थान करने का प्रयास कर रहा है. कवि अपनी कविताओं के ज़रिये, साहित्यकार अपने साहित्य के ज़रिये, शिक्षक अपनी विद्या के ज़रिये और घर में माता-पिता अपने संस्कारों के ज़रिये. ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है और आगे भी करता रहूँगा. मैं राज महाजन अपने तरीके से हिंदी के उत्थान में जुड़ा हूँ. हो सकता है मेरा करना काफी नहीं होगा. लेकिन मैंने अपने ही बूते पर एक शुरुआत की है जिससे मैं आने वाली पीढ़ी को हिंदी का महत्व समझा सकूँ. मेरा मानना है अगर समाज को उन्नत और उत्कृष्ट बनाना है तो पहले अपनी जड़ों को मजबूत और संमृद्ध बनाना होगा. इसके लिए भाषा को पतन से बचाना होगा. ज़रूरी नहीं कि उत्थान तभी होगा जब हम रोज हिंदी बोलेंगे. उत्थान तब होगा जब हिंदी बोलने पर शर्म महसूस नहीं करेंगे. पूरी आत्मीयता से हिंदी को अपनाएंगे, हिंदुत्व का विकास हिंदी से ही होगा. आज हिंदी दिवस पर मैं सभी को इस ओर प्रेरित करता हूँ और आने वाली पीढ़ी से एक 
    गुज़ारिश करता हूँ कि अंग्रेजी का प्रयोग तो करें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें जिनमें  हिन्द और हिंदी समाई है. हिंदी से जुड़ना मेरे लिए गौरव का विषय है.