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राशिफल

मिथुन – Gemini

मिथुन – Gemini

सितारों की चाल अनुकूल है अत: मनोवांछित कार्य बनेंगे। नौकरी पेशे में उन्नति के अवसर होंगे तथा अर्थ संकट भी समाप्त होंगे। कारोबार में मित्रों से सहयोग होगा तथा ससुराल पक्ष से शुभ समाचार व लाभ की प्राप्ति होगी।

मिथुन – Gemini

मिथुन – Gemini

मिथुन राशि वालों के लिए जुलाई माह का तीसरा सप्ताह थोड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। सप्ताह के मध्य में कुछ परेशानी आने की संभावना है। चन्द्रमा षष्ठ भाव से नवम भाव तक गोचर करेंगे। 

16-17 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। प्रतिस्पर्धा में शत्रुओं से सावधान रहें। पूंजी निवेश करते समय सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि धोखा-धड़ी होने की संभावना है।  नौकरी को लेकर कुछ तनाव रहेगा। साथियों के सहयोग की कमी रहेगी।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। इसलिए दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। आपसी तालमेल अच्छा रहेगा। आप शादी-विवाह से संबंधित कार्य में व्यस्त रहेंगे। यात्रा पर जा सकते हैं। यात्रा के दौरान आनंद से परिपूर्ण होगी।

20-21 जुलाई को चन्द्रमा मकर राशि अष्टम भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है व्यवसाय में थोड़ी सी भी असावधानी से भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। संपत्ति को लेकर वाद-विवाद बढऩे की संभावना है। इसलिए धैर्य से काम लें। अनावश्यक खर्चों से बचें। वाहन ध्यान से चलाएं दुर्घटना होने की संभावना है। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें और किसी भी कार्य में पूंजी निवेश न करें।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि नवम भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूलता की तरफ अग्रसर है। धीरे-धीरे पीछे से चली आ रही परेशानी दूर होगी। नये साथियों से मेल मुलाकात होगी। जिस कारण व्यवसाय में आ रही रुकावटें दूर होंगी। नौकरी करने वालों को अपने अधिकारी वर्ग व साथियों से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
 

मिथुन – Gemini

मिथुन – Gemini

मिथुन राशि वाले लोगो के लिए 2016 शुभ और मंगलमय हो। हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

• मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2016 महत्वकांक्षाओं की पूर्ति का वर्ष है। 
• कारोबार के दृष्टिकोण से अनुकूल और लाभदायक रहेगा।
• धन लाभ के स्रोत बढ़ेंगे। कारोबार में विस्तार का अवसर मिलेगा।
• आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
• अनावश्यक व्यावसायिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का निवारण होगा।
• छुट-पुट समस्याओं के अलावा वर्ष का प्रारंभ मिथुन राशि वालों के लिए सफलताओं से भरा रहेगा। शत्रु परास्त होंगे।
• कारोबार में नए साझेदार प्राप्त होंगे। पारिवारिक वातावरण में अनुकूलता और परिवार से खुशी की खबर भी प्राप्त हो सकती है।
• काम काज में किए गए परिणाम मनोनुकूल रहेंगे।
• यदि आप नौकरी में है तो आपके लिए समय अनुकूल रहेगा। कॅरियर संबंधी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• नौकरी में मनोनुकूल उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। जीवन साथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
• यदि विवाह संबंधी कोई समस्या है तो उसका निवारण होगा। भाग्य आपके पक्ष में करवट ले रहा हैं।
• इसीलिए आपके आसपास का वातावरण मनोनुकूल रहेगा।
• जीवन में आ रही हर समस्या का समाधान बुद्घि व विवेक से निकाल लेंगे।
• परंतु  फिर भी इस वर्ष शत्रु पक्ष से सावधान रहना बहुत जरूरी है।
• अपने आसपास के लोगों पर पैनी नजर रखना बहुत जरूरी है।
• कोई आपका फायदा न उठाएं और कोई आपको षडयंत्र में फसां न दें इसका अवलोकन हमेशा करते रहें।
• बृहस्पतिदेव तीसरे भाव से गोचर कर रहा है।
• पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति ध्यान देना बहुत जरूरी है।
• अन्यथा कलह की संभावना है। वैसे ग्रह गोचर संकेत दे रहे हैं कि आपकी दैनिक दिनचर्या सुव्यवस्थित रहने के कारण स्वास्थ्य भी आपका अनुकूल रहेगा।
• 9 जनवरी 2016 के उपरांत राहुदेव बृहस्पतिदेव के साथ गोचर करेगा और यह समय शत्रु पक्ष को लेकर थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• चल-अचल संपत्ति खरीदते समय कानूनी दांव-पेंच का विशेष ध्यान रखें।
• साथ ही पारिवारिक संबंधों को भी संभाल कर रखें।
• लेन-देन के मामलों में किसी पर अंधाविश्वास नहीं करें।
• क्योंकि 8 जनवरी से लेकर 9 मई 2016 के बीच बृहस्पतिदवे वक्री अवस्था में रहेंगे।
• इसीलिए थोड़ी सी सावधानी अवश्य बरतें।
• विशेष रूप से बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतें।
• परंतु 9 मई 2016 के बाद पुन: समय अनुकूल व सफलताओं से भरा हुआ।
• भूमि-भवन व वाहन का प्रबल योग। अचल संपत्ति की खरीद फरोख्त में लाभ।
• विवाह संबंधी परेशानियों का निवारण।
• यदि आप अध्ययनरत विद्यार्थी है तो शिक्षा के दृष्टिकोण से यह साल आपके लिए खुशियों से भरा रहेगा।
• अविवाहितों का विवाह का योग।
• जीवन साथी के साथ तालमेल बिठा कर रखें तो आने वाला समय खुशियों से भरा रहेगा।
• फिर भी कुछ बातें में आपको बता रहा हूं इन पर सावधानी अवश्य बरतें।

सावधानी

• शत्रु षडयंत्रों से जरूर सावधान रहें।
• साझेदारी के कार्यों में लापरवाही न बरतें।
•लेन-देन के मामलों को लेकर अंधाविश्वास न करें।

व्यवसाय एवं कॅरियर के दृष्टिकोण से

• मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2016 कारोबार व कॅरियर के दृष्टिकोण से खुशियों से भरा रहेगा।
• कारोबार में सफलता मिलेगी। कॅरियर संबंधी परेशानियों का निवारण होगा।
• नये आय के साधन उपलब्ध होंगे।
• साथ ही लाभ के मार्ग प्रशस्त होगें, साझेदारी के कार्यो में विशेष लाभ की संभावना।
• साथ ही आप पुराने साझेदारों को हटा कर नए साझेदार भी बना सकते हैं।
• देव गुरु बृहस्पति की भाग्य स्थान पर दृष्टि सफलता का अनुकूल संकेत दे रही है। 
• व्यवसाय में परिवर्तन करने से भी लाभ प्राप्त होगा। व्यापार की दृष्टि से समय आपके साथ है।
• समय का पूरा लाभ उठाएं। व्यापार के सम्बन्ध में लम्बी यात्राओं का योग भी बन सकता है।
• नौकरी कर रहे जातकों का इस वर्ष पदोन्नति मिलने की सम्भावना है।
• मित्रों व अधिकारी वर्ग का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा।
• नौकरी तलाश रहे जातकों को इस वर्ष प्रयत्न करने से सफलता भी प्राप्त हो सकती है।
• चल-अचल संपत्ति का लाभ मिलेगा।
• साथ ही अगस्त 2016 में आपको भूमि-भवन आदि के नियमित कोई बड़ा धन लाभ भी हो सकता है।
• कॅरियर के दृष्टिकोण से समय अनुकूल नजर आ रहा है।
• नौकरी में अनुकूल सफलता मिलेगी। अधिकारी आपसे खुश रहेंगे।
• वर्ष के प्रारंभ में आपका प्रमोशन या मनोनुकूल स्थान परिवर्तन भी कर सकते हैं।

उपाय

• इस वर्ष कारोबार में किसी भी प्रकार की समस्या या रूकावट आने पर अपने व्यापारिक स्थान पर दुर्गा यंत्र स्थापित करें। धूप-दीप, नैवेद्य और पुष्प अर्पित करने के बाद ú ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। मंत्र की पाँच माला सुबह व शाम करें।
• 21 बुधवार चौपायों को हरी घास या हरा चारा देना अनुकूल रहेगा।
• दुर्गा सप्तशती का पाठ करना आपके लिए अनुकूल रहेगा।

पारिवारिक दृष्टिकोण से

• मिथुन राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए वर्ष 2016 पारिवारिक दृष्टिकोण से अनुकूल उपलब्धियों से भरा रहेगा।
• आपकी पारिवारिक स्थिति अनुकूल रहेगी। परिवार में सामंजस्य बना रहेगा।
• परिवार के सभी सदस्य आपस में मिलकर कार्य करेंगे।
• साथ ही सुख शांति व सौहाद्रपूर्ण वातावरण भी बना रहेगा।
• परिवार के सभी सदस्यों में आपसी मेल-जोल भी अनुकूल रहेगा।
• दांपत्य संबंधों में मधुरता रहेगी। जीवन साथी के साथ उत्पन्न गलतफहमियों का निवारण होगा।
• 8 जनवरी से 9 मई 2016 के बीच में समय थोड़ा सा सावधानी का है।
• इस समय संतान की शिक्षा व व्यवहार को लेकर आप थोड़े से चिंतित हो सकते हैं।
• परंतु पारिवारिक सदस्यों, बुजुर्गों एवं मित्रों के सहयोग से समस्याओं का निवारण अवश्य होगा।
• 9 जनवरी 2016 से अगस्त 2016 तक बृहस्पतिदेव और राहुदेव की युति यह संकेत दे रही है कि नैतिकता का दामन पकड़ कर रखें।
• वैवाहिक जीवन की मर्यादाओं का पालन करें।
• जिससे आपको सामाजिक आलोचनाओं का शिकार नहीं होना पड़े। स्वभाव में सरलता लानी पड़ेगी।
• यदि इन बातों का ध्यान दिया तो यह वर्ष पारिवारिक दृष्टिकोण से बहुत शुभ व अनुकूल बीतेगा।
• फिर भी 2016 में माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता हैं।
• माता-पिता के साथ वैचारिक मतभेद भी नजर आ रहे हैं। इस पर थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• 2016 में मिथुन राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए विवाह का भी सुन्दर योग नजर आ रहा है।

उपाय

• विष्णु सहस्र नाम का पाठ करें।
• सूर्य को प्रतिदिन जल अर्पण करें।

युवा वर्ग के लिए

• मिथुन राशि के युवा वर्ग के लिए वर्ष 2016 लाभ व सफलताओं से भरा रहेगा।
• कॅरियर संबंधी परेशानियों का निवारण होगा
• नौकरी और व्यवसाय में कठिन परिश्रम का अनुकूल फल प्राप्त होगा।
• चारों ओर किये गये परिश्रम के अनुकूल सफलताएं प्राप्त होगी।
• सरकार से लाभ मिलेगा।
• परंतु बहुत जरूरी है अनैतिक कार्यों से दूर रहें।
• सरकार विरोधी कोई कार्य न करें।
• अन्यथा परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
• मित्र मंडली आपको गलत कार्यों से जोड़ सकती है, उनसे भी सावधान रहें।

विद्यार्थी वर्ग के लिए

• विद्यार्थी वर्ग के लिए पढ़ाई में अच्छी सफलता का समय है।
• अध्यापकों व माता-पिता का सहयोग प्राप्त होगा।
• विद्यार्थी वर्ग को पूर्ण मेहनत करनी चाहिए। सफलता इनके कदम चूमेंगी।
• सामान्यत: वर्ष का पूर्वाद्र्ध शिक्षा के दृष्टिकोण से पूर्ण सफलता प्रदान करेगा।
• फिर भी देर तक घर से बाहर रहना व गलत संगत व खान-पान समस्या का कारण बन सकता है।
• समय अच्छा है, इसलिए यदि प्रयत्न करते हैं तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

युवा वर्ग व विद्यार्थियों के लिए उपाय

• प्रतिदिन जरूरतमंद गरीब कन्या को भोजन अवश्य कराएं।

विशेष 

• कारोबारी, पारिवारिक व शरीरिक समस्याओं के निवारण के लिए चार मुखी, छ: मुखी और आठ मुखी रूद्राक्ष लाल धागे में धारण करना मिथुन राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए बहुत ही अनुकूल रहेगा।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से

• स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वर्ष 2016 आपके लिए अच्छा रहेगा।
• परंतु कभी कभार पुराना रोग परेशानी दे सकता है।
• 8 जनवरी से 9 मई 2016 के मध्य में खान-पान व दैनिक दिनचर्या को नियमित नहीं रखा तो रक्तचाप, मधुमेह, पेट संबंधी बीमारी, सर्दी-जुकाम, मौसमी बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
• परंतु ग्रह योगायोगों के अनुसार इस वर्ष मेरी दृष्टि में किसी गंभीर या घातक बीमारी की संभावना नजर नहीं आ रही है।
• फिर भी बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और उनका आशीर्वाद लेते रहें। उनके आशीर्वाद से आप अवश्य सुखी रहेंगे।

उपाय

• स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी के निवारण के लिए व्यक्ति को सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए व पीपल का पेड़ किसी धर्म स्थान या अन्य किसी संस्थान आदि में लगाना चाहिए।
• मूंग साबुत, हरी चीज़ें दान देना या जल प्रवाह करना।
• तांबे के छेद वाले पैसे को हर बुधवार को चलते पानी में बहाना।
 

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  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.