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कर्क– Cancer

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ग्रह-गोचर की अनुकूलता से समय शुभ फलों के देने में समर्थ है, मामूली प्रयास से भी कार्य सफल होंगे किसी शुभ कार्य की योजना बनेगी तथा पारिवारिक संबंध से सुख व प्रसन्नता होगी। व्यवसाय व नौकरी आदि में विशेष उन्नति होगी।

कर्क – Cancer

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कर्क राशि वालों के लिए जुलाई माह का तीसरा सप्ताह उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। चन्द्रमा पंचम भाव से अष्टम भाव से गोचर करेंगे। 

16-17 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। आप बच्चों के रुके हुए कार्यों को लेकर चिंतित रहेंगे। अनावश्यक खर्चों में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। पेट खराब रहने की संभावना है।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूल है। आपकी अर्थ दशा में सुधार होगा। शत्रु परास्त होंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आपके मन में नये विचार और परिकल्पनाएं जन्म लेंगी। आपको घर के बजुर्गों का प्यार व आशीर्वाद प्राप्त होगा। जीवन के उतार चढ़ाव को अच्छी तरह समझ पायेंगे। 

20-21 जुलाई को चन्द्रमा सप्तम भाव से गोचर करेंगे। व्यवसाय में भागीदारी सामान्य रहेगी। वाणिज्य व्यवसाय में लाभ की स्थिति रहेगी। अचानक यात्रा का योग बन सकता है। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। आपसी मनमुटाव दूर होगा।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा अष्टम भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय प्रतिकूलता का संकेत दे रहा है सचेत रहने की जरूरत है। अपने कार्यक्षेत्र पर पूरा ध्यान रखें। अचानक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिस कारण आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें। किसी नये कार्य में पूंजी निवेश न करें। नौकरी करने वालों के लिए संयम रखना अच्छा रहेगा।
 

कर्क – Cancer

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कर्क राशि वालों के लिए जुलाई का मासिक साप्ताहिक भविष्य

कर्क राशि वालों के लिए जुलाई माह के प्रारंभ में चन्द्रमा वृषभ राशि एकादश भाव मे, सूर्य, बुध व शुक्र मिथुन राशि द्वादश भाव में, गुरु-राहु सिंह राशि द्वितीय भाव में, मंगल तुला राशि सप्तम भाव में, शनि वृश्चिक राशि पंचम भाव में और केतु कुंभ राशि अष्टम भाव से गोचर कर रहे हैं। 

1-7 जुलाई कर्क राशि वालों के लिए जुलाई माह का प्रथम सप्ताह सामान्य शुभ फल देने वाला रहेगा। चन्द्रमा द्वितीय भाव से चतुर्थ भाव तक गोचर करेंगे।  1-2 जुलाई को चन्द्रमा वृषभ राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। सप्ताह का प्रथम दिन शुभता दिखा रहा है। इसलिए समय अनुकूल है। इस वक्त आप सुखद यात्रा कर सकते हैं। बच्चों के लिए पढ़ाई से संबंधित स्कूल/कॉलेज तलाशने में सफलता मिलेगी। आय के साधन अच्छे रहेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

3-4 जुलाई को चन्द्रमा मिथुन राशि द्वादश भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है इसलिए सचेत रहें। आपको अचानक परेशानी आने की संभावना है कि शत्रु छुप कर फंसा सकता है। बिना सोचे-समझे किसी निर्णय पर न पहुंचे और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करें। अनावश्यक खर्चों से बचें और वाद-विवाद से दूर हैं। आर्थिक पक्ष कमजोर रहेगा और मानसिक परेशानी रहने की संभावना है।

5-7 जुलाई को चन्द्रमा मेष राशि लग्न से गोचर करेंगे। चन्द्रमा स्वराशि लग्न में होने के कारण प्रयास व प्रयत्न करने से सभी कार्य पूरे होंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होगा जिस कारण आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। यात्रा लाभकारी सुखद रहेगी। सरकारी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। उच्च अधिकारी व राजनेताओं से मेल-मुलाकात से मान-सम्मान में वृद्धि होगी। मानसिक शांति बनी रहेगी।

8-15 जुलाई कर्क राशि वालों के लिए जुलाई माह का दूसरा सप्ताह शुभ फल देने वाला है। 8-9 जुलाई को चन्द्रमा सिंह राशि द्वितीय भाव से गोचर करेंगे। समय पूर्ण रूप से अनुकूल है, भौतिक समृद्धि बढ़ेगी।  आय के नये साधनों में वृद्धि होगी। अपने साथियों व परिवार से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। यात्रा लाभकारी रहेगी।

10-12 जुलाई तक चन्द्रमा कन्या राशि से तृतीय भाव से गोचर करेंगे। आपको अपने भाई-बहन का अच्छा प्यार व सहयोग प्राप्त होगा। आप की मुलाकात किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से संभव है जो आगे चलकर आर्थिक लाभ देने वाली होगी। नौकरी करने वालों को अधिकारी व कर्मचारी वर्ग से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। समय अनुकूल है इसका लाभ उठाएं। 

13-14 जुलाई को चन्द्रमा तुला राशि से चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय प्रतिकूल है। वाद-विवाद से मानसिक परेशानी बढ़ सकती है। वाहन ध्यान से चलाएं दुर्घटना की संभावना है। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें क्योंकि यात्रा सुखद नहीं रहेगी। मकान-प्रोपर्टी व वाहन आदि में पूंजी निवेश न करें।  

15 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। समय धीरे-धीरे अनुकूल हो रहा है। रुके हुए कार्य बनेंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। संतान की तरफ से परेशानी महसूस करेंगे। बच्चे पढ़ाई-लिखाई में दिक्कतें रहेंगी।

16-23 मई कर्क राशि वालों के लिए जुलाई माह का तीसरा सप्ताह उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। चन्द्रमा पंचम भाव से अष्टम भाव से गोचर करेंगे। 16-17 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। आप बच्चों के रुके हुए कार्यों को लेकर चिंतित रहेंगे। अनावश्यक खर्चों में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। पेट खराब रहने की संभावना है।

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूल है। आपकी अर्थ दशा में सुधार होगा। शत्रु परास्त होंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आपके मन में नये विचार और परिकल्पनाएं जन्म लेंगी। आपको घर के बजुर्गों का प्यार व आशीर्वाद प्राप्त होगा। जीवन के उतार चढ़ाव को अच्छी तरह समझ पायेंगे। 

20-21 जुलाई को चन्द्रमा सप्तम भाव से गोचर करेंगे। व्यवसाय में भागीदारी सामान्य रहेगी। वाणिज्य व्यवसाय में लाभ की स्थिति रहेगी। अचानक यात्रा का योग बन सकता है। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। आपसी मनमुटाव दूर होगा।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा अष्टम भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय प्रतिकूलता का संकेत दे रहा है सचेत रहने की जरूरत है। अपने कार्यक्षेत्र पर पूरा ध्यान रखें। अचानक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिस कारण आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। यदि जरूरी न हो तो यात्रा न करें। किसी नये कार्य में पूंजी निवेश न करें। नौकरी करने वालों के लिए संयम रखना अच्छा रहेगा।

24-31 जुलाई कर्क राशि वालों के लिए जुलाई माह का अंतिम सप्ताह अति उत्तम फल देने वाला है। 24-25 जुलाई  को चन्द्रमा मीन राशि नवम भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूलता की तरफ बढ़ रहा है। आपकी धर्म में रुचि पैदा होगी। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। नौकरी में अच्छी जगह स्थानान्तर हो सकता है। अधिकारी वर्ग से पूर्या सहयोग प्राप्त होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

26-27 जुलाई को चन्द्रमा मेष राशि दशम भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय मनोनुकूल है। आपको ससुराल पक्ष से सहयोग व लाभ प्राप्त होगा। राजनीतिक व्यक्तियों से मेल-मुलाकात बढ़ेगी और उनके सहयोग से रुके हुए कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। धार्मिक यात्रा होने की संभावना है। यात्रा सुखद रहेगी। पूंजी निवेश के लिए समय अच्छा है। नौकरी वालों के लिए पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। 

28-30 जुलाई तक चन्द्रमा वृषभ राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय अनुकूल है। सभी कार्यों में सफलता का योग है। आय के साधनों में वृद्धि होगी। आयात-निर्यात के कार्यों से मानसिक शांति बढ़ेगी। व्यवसाय संबंधी यात्रा हो सकती है। विदेश यात्रा में अच्छी सफलता प्राप्त होगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

31 जुलाई को समय प्रतिकूल है, इसलिए सचते रहें। अनावश्यक खर्चों व वाद-विवाद से दूर रहें।
 

कर्क – Cancer

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कर्क राशि वाले लोगो के लिए 2016 शुभ और मंगलमय हो। हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

• कर्क राशि वाले जातक-जातिकाओं के लिए वर्ष 2016 पिछले वर्ष की अपेक्षा यह वर्ष अति शुभ रहेगा।
• पिछली संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• वर्तमान में ग्रह योगायोग संकेत दे रहे है कि संपूर्ण कारोबारी समस्याओं का निवारण और कारोबार के क्षेत्र में विशेष सफलता हासिल करेंगे।
• व्यवसाय में उत्तम फलों की प्राप्ति होगी।
• वर्ष 2016 जीवन के हर क्षेत्र में अनुकूल और लाभदायक रहेगा।
• वर्ष के प्रारंभ भाग्य का सितारा आपके पक्ष में करवट ले रहा हैं।
• भाग्य का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त होगा। आर्थिक समस्याओं का निवारण होगा।
• आर्थिक स्रोतों में बढ़ोतरी होगी। चल-अचल संपत्ति का लाभ मिलेगा।
• भूमि-भवन और वाहन आदि खरीदने और बेचने का विशेष अवसर प्राप्त होगा।
• व्यावसायिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पिछले वर्ष की अपेक्षा अच्छा रहेगा।
• यदि आपके पास कोई रोजगार नहीं है तो इस वर्ष रोजगार संबंधी परेशानियों का निवारण होगा।
• यदि आप नौकरी में है तो 2016 आपके लिए संपूर्ण अनुकूलताओं से भरा रहेगा।
• मनचाही जगह पर स्थानांतरण, प्रमोशन और आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा।
• यदि आप व्यावसायिक है तो यह वर्ष लाभ के दृष्टिकोण से अति शुभ रहेगा।
• पारिवारिक दृष्टिकोण से भी यह वर्ष 2016 आपके लिए शुभ रहेगा।
• माता-पिता, छोटे-बड़े भाई-बहनों का पूर्ण सहयोग, प्यार भी प्राप्त होगा।
• आप विद्यार्थी है तो शिक्षा के क्षेत्र में आपको मनोनुकूल सफलता हासिल होगी।
• परीक्षा और प्रतियोगिता में अनुकूल परिणाम प्राप्त होगा।
• इस वर्ष मई से लेकर जुलाई के बीच में थोड़ा सा सावधान रहना पड़ेगा।
• इस दौरान शत्रु और विरोधी आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे।
• चल-अचल संपत्ति को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
• 16 अगस्त से 16 सितंबर के मध्य समय सफलताओं से भरा रहेगा।
• कारोबार में वृद्घि का अवसर आएंगे। नवीन योजनाएं बनेगी। कोई नया आर्डर प्राप्त होगा।
• कॅरियर के दृष्टिकोण से ऊंचाईयों को छूने का जबरदस्त समय नजर आ रहा है।
• इन संपूर्ण सफलताओं के बावजूद भी इस वर्ष अपने निजी अनुभव के आधार पर अपनी एक सलाह अवश्य देना चाहूंगा कि चाहे वो नौकरी हो, पारिवारिक निर्णय हो, कारोबारी समझौते या निर्णय हो जल्दबाजी से बचना पड़ेगा।
• वर्ष प्रारंभ 8 जनवरी से लेकर 9 मई 2016 मंगल चतुर्थ भाव में है। इसीलिए बिना वजह क्रोध न करें।
• आक्रोश पर काबू रखें।
• और कोई भी निर्णय बिना बुजुर्गों की सलाह के बगैर न लें तो आपको और सफलता प्राप्त होगी।
• एक बात और विशेष ध्यान रखें जून और अगस्त के महीने में सरकार के साथ कोई विरोध न रखें। और न ही कोई सरकारी विरोधी कार्य करें।
• अन्यथा नुकसान हो सकता है।
• 25 मार्च से 13 अगस्त 2016 के बीच में साझेदारी के कार्यों में अंधा विश्वास न करें क्योंकि साझेदारी में किया गया अंधा विश्वास धन हानि का संकेत दे रहा है।
• 29 अक्टूबर से 15 नवंबर 2016 के बीच में धैर्य और संयम से काम करें।
• पारिवारिक रिश्तों को संभाल कर रखें। माता-पिता की सलाह को नजरअंदाज न करें।
• इन बातों का यदि आप ध्यान रखतें है तो 2016 आपके लिए सफलताओं से भरा रहेगा।
• इस वर्ष आपका स्वास्थ्य भी अनुकूल रहेगा।
• लेकिन वृद्घ लोगों को मेरी सलाह है कि वे स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें। दैनिक दिनचर्या को नियमित रखें।

सावधानी

नव वर्ष 2016 में कर्क राशि वालों को इन बातों पर विशेष ध्यान देना होगा।
• शत्रु षडयंत्रों से सावधान रहना होगा।
• कोर्ट-कचहरी के मामलों को लेकर लापरवाही न बरतें।
• अधिकारी वर्ग से मिलकर चले।
• पैतृक संपत्ति के मामले में जल्दबाजी न करें।

व्यवसाय और कॅरियर के दृष्टिकोण से

• इस वर्ष के प्रारंभ में बृहस्पति देव की स्थिति आपकी राशि से दूसरे भाव सिंह राशि में है।
• शनिदेव पंचम भाव वृश्चिक राशि में गोचर कर रहा हैं।
• राशि अधिपति चंद्र देव कन्या राशि में राहु के साथ तीसरे भाव में गोचर कर रहे हैं।
• यह ग्रह योगायोग कारोबार के दृष्टिकोण से आपके लिए अनुकूलता और लाभ का संकेत दे रहे हैं।
• व्यवसायिक दृष्टि से इस वर्ष आपको अनुकूल फलों की प्राप्ति होगी।
• कारोबार के क्षेत्र में आपका प्रभाव बढ़ेगा।
• कारोबार के क्षेत्र में उच्चाधिकारियों से संबंध बनने के कारण आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
• सुख और ऐश्वर्य में वृद्घि होगी। सरकार से लाभ मिलेगा।
• लाभदायिक व्यवसायिक स्थितियां बनेगी। कारोबार में नए संबंध बनेंगे।
• अकस्मात धन की प्राप्ति होगी। रुके हुए काम भी बनेंगे।
• कॅरियर के दृष्टिकोण से यह वर्ष शुभफलों का संकेत दे रहा है।
• कॅरियर संबंधी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• यदि आप नौकरी में हैं तो मनोनुकूल सफलता के लिए जनवरी, फरवरी, सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीने में विशेष प्रयास करें। विशेष लाभ मिलेगा।
• नये व्यावसायिक परिवर्तन सितंबर से लेकर दिसंबर के महीने में अनुकूल रहेगा।
• देश-विदेश से अनुकूल व्यापारिक संबंध भी बनेंगे।
• दलाली और शेयर मार्किट में भी आपका वर्चस्व रहेगा।
• इस वर्ष व्यावसायिक जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने के कारण लाभ में मनोनुकूल बढ़ोतरी होगी।
• चल-अचल संपत्ति खरीदने का अवसर भी नजर आ रहा हैं।
• परंतु एक बात का ध्यान रखें 9 अप्रैल से लेकर जून के बीच में व्यवसाय में कोई लापरवाही न बरतें अन्यथा लाभ का बड़ा मौका आपके हाथ से निकल भी सकता है।

सावधानियां

• नैतिकता का दामन पकड़ कर रखें।
• यदि आपने नैतिकता का दामन पकड़ रखा है तो कारोबार में आपको लाभ प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता।
• अग्नि संबंधी उपकरणों के प्रयोग में लापरवाही न बरतें।
• हां, एक हल्की सी समस्या अवश्य नजर आ रही है कारोबार में अग्नि भय की।
• इसमें थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• आप लोगों को एक सलाह और दूंगा कि कॅरियर की सफलता के लिए वाणी पर संयम रखें और अपने बॉस से टकराव न रखें।
 
उपाय

• कारोबार में वृद्धि के लिए अपने घर में कुबेर यंत्र स्थापित करें। धूप-दीप, नैवेद्य व पुष्प अर्पित करने के बाद ú श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:। मंत्र का जाप करें।
• नियमित रूप से हर मंगलवार, सोमवार और शनिवार श्री शनिदेव जी का पूजन करें, तैलाभिषेक करें। समस्याओं का निवारण होगा।

पारिवारिक दृष्टिकोण से

• पारिवारिक सुख-समृद्घि की दृष्टि से वर्ष 2016 आपके अनुकूल है।
• पारिवारिक सदस्यों के बीच प्रेम पूर्ण व्यवहार आपमें एक नई स्फूर्ति व उत्साह का संचार करेगा
• और आप अपने कार्यों को और जिम्मेदारी के साथ पूरा करने में संलग्न हो जायेंगे।
• घर का शांत वातावरण आपको व्यापारिक उन्नति के लिए प्रेरित करेगा।
• वर्ष का पूर्वार्ध 25 मार्च से 13 अगस्त 2016 के बीच में संतान पक्ष पर लापरवाही न करें। शादी-विवाह के मसलों में जल्दबाजी न करें।
• खान-पान और दैनिक दिनचर्या को नियमित रखें। व्यर्थ के वाद-विवाद और आलोचनाओं से दूर रहें।
• दांपत्य संबंधों के प्रति लापरवाही नहीं बरतें।
• उसके बाद का समय मनोनुकूल सफलताओं से भरा रहेगा।
• पारिवारिक सदस्यों का सहयोग मिलेगा। पैतृक संपत्ति के मामले सुलझेंगे।
• साथ ही परिवार में किसी नये मेहमान के आगमन से घर-परिवार में खुशी रहेगा।
• मांगलिक कार्य भी संपन्न होंगे।

उपाय

• प्रतिदिन घर में शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ नियमित करने से घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

युवा वर्ग 

• कर्क राशि के युवा वर्ग के जातक-जातिकाओं के लिए हर दृष्टिकोण से यानी पारिवारिक, कॅरियर, कारोबार और राजनीति के क्षेत्र में वर्ष 2016 मनोनुकूल सफलताओं से भरा रहेगा।
• परंतु 8 जनवरी से लेकर 9 मई 2016 के बीच में
• रात्रि में व्यर्थ भ्रमण न करें। स्वयं पर अनुशासन रखें।
• व्यर्थ की मित्र मंडली से दूर रहें। अनैतिक कार्यों से दूर रहें तो आपके लिए अच्छा रहेगा।
• 9 मई के बाद का समय मन में उत्साह और उमंगों का प्रवाह रहेगा। जीवन में नई दिशा और दृष्टि का भान होगा।
• पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहेंगे।
• कॅरियर में अनुकूल सफलता प्राप्त होगी। मित्रों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
• परंतु पारिवारिक सदस्यों के साथ मिलकर रहना बहुत जरूरी होगा।
• बुजुर्गों की सलाह अनदेखा न करें। सरकार विरोधी कार्यों से दूर रहें।
• अनैतिक कार्य से बचें। अपने प्यार के साथ धोखा न करें।

विद्यार्थी वर्ग

• कर्क राशि के जातक-जातिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता हासिल होगी।
• इस वर्ष कॅरियर व नौकरी संबंधी परिक्षाओं के परिणाम मनोनुकूल प्राप्त होंगे।
• प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा में सफलता आपका दामन चूमेगी।
• परंतु 8 जनवरी से 9 मई 2016 के बीच में विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य पर विशेष ध्यान देना होगा।
• व्यर्थ के वाद-विवाद से दूर रहें। अध्ययन में लापरवाही न करें।
• तो इस वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में आपको जबरदस्त सफलता हासिल होगी।
• बस अनावश्यक आलस और प्रमाद का त्याग करें।
• व्यर्थ के भ्रमण व मित्र मंडली से बचकर रहे तो अच्छा रहेगा।
• ग्रह योगायोग मनोवांछित शिक्षण संस्थान में आपके प्रवेश का पूर्ण सफल संकेत दे रहा है।
• विद्यार्थी वर्ग को पढ़ाई में बहुत मेहनत की जरूरत है।

युवा वर्ग व विद्यार्थियों के लिए उपाय

• माणिक्य धारण करना आपके लिए अनुकूल रहेगा। माणिक्य के अभाव में तांबा की अंगूठी पर सूर्य यंत्र खुदवाकर अनामिका अंगुली में धारण करना लाभप्रद रहेगा।

विशेष

• इस वर्ष आपको भूमि संबंधी क्रय-विक्रय का लाभ मिलेगा। 8 जनवरी से 9 मई 2016 के बीच व्यय बढ़ेगा तथा किसी यात्रादि के कारण शारीरिक व मानसिक कष्ट भी बढ़ सकता है। इस वर्ष आपको संतान के विवाह संबंधी या फिर उच्च शिक्षा संबंधी शुभ योग भी प्राप्त होंगे।
• इस वर्ष किसी भी प्रकार की समस्या आने पर कर्क राशि के जातक-जातिकाओं को छ:, नौ और बारह मुखी रूद्राक्ष लाल धागे में धारण करना अनुकूल रहेगा।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से

• कर्क राशि वालों के लिए वर्ष 2016 आपका शारीरिक स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा।
• अनावश्यक परेशानियां एवं मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी।
• 17 अप्रैल से लेकर 30 जून 2016 के बीच में मंगल वक्री अवस्था में रहेंगे।
• वाहनादि सावधानी से चलाएं।
• नशादि से दूर रहें।
• अक्टूबर व नवंबर महीना पेट संबंधी बीमारी मोटापा, रक्तचाप, मधुमेह जैसी बीमारी के प्रति लापरवाही न बरतें।
• विशेष रूप से वृद्घ लोगों को मेरी सलाह है कि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही करना आपके लिए ठीक नहीं रहेगा।
• एक बात का और ध्यान रखें खान-पान में लापरवाही न करें।

उपाय

• गेहूँ, गुड़, तांबा आदि का दान जरूरतमंद व्यक्ति को करना लाभकारी रहेगा।
• गेहूँ, बाजरा और गुड़ ग्यारह रविवार गाय को खिलाना भी आपके लिए अनुकूल रहेगा।
 

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  • यह राखी होगी “इज्ज़त वाली राखी”- राज महाजन

    यह राखी होगी “इज्ज़त वाली राखी”- राज महाजन

    भारत में हर परंपरा और त्योहारों को बड़ी ही मर्यादा के साथ निभाया जाता है. ऐसा ही एक मर्यादा से भरा त्यौहार है रक्षा-बंधन. गुजरे वक्त में इस शब्द का महत्व अपने चरम पर था. लेकिन आज के परिपेक्ष्य में ये भी बाकी त्योहारों की तरह कहीं अपनी मर्यादा और महत्व को खोता नज़र आ रहा है. 

    देखा जाए तो भारत में भाई-बहनों के बीच प्रेम और कर्तव्य इतना मज़बूत है कि ये रिश्ता किसी एक दिन की मोहताज नहीं है, लेकिन इस ख़ास दिन पर हर्षोल्लास देखते ही बनता है. राखी का पर्व सावन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. पवित्र दिन रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की दाहिनी कलाई में राखी बांधती हैं, उनका तिलक करती हैं और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प लेती हैं. हालाँकि, बदले दिनों में इस पर्व के भी मायने बदल चुके हैं और इसीलिए समाजशास्त्री विभिन्न स्तरों पर फिक्रमंद होते हैं, ताकि यह सुन्दर और अर्थपूर्ण पर्व अपना अस्तित्व न खो दे. 

    लेकिन विडंबना तो देखिये कहीं न कहीं से ऐसी तस्वीरें आ ही जाती हैं जिसमें समाज का भयंकर और घृणित चेहरा देखने को मिल ही जाता है. जहाँ बहनों, औरतों और महिलाओं की रक्षा करनी चाहिए वहीँ उनकी आबरू लूटी जाती है. उनके साथ इतना वीभत्स अत्याचार किया जता है कि इंसानियत ही शर्मसार हो जाए.

    सिर्फ अपनी बहन ही बहन नहीं होती अपितु समाज की हर लड़की को बहन के आईने से देखना चाहिए. औरत का दर्जा आदर का होता है. उसे उसी दर्जे से देखना चाहिए. हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक चर्चित और विवादित मॉडल 'कंदील बलोच' की उसके भाई ने ही 'ऑनर किलिंग' कर दी. पाकिस्तान में कहाँ तक इस वीभत्स घटना के जिम्मेदार लोगों पर ऊँगली उठाई जाती है बल्कि कई लोग इसके लिए कंदील बलोच के अश्लील और एक्सपोज़ करने वाले कृत्यों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. ये बात भी बिलकुल सही है कि अश्लीलता को सराहा नहीं जा सकता लेकिन अश्लीलता की चादर ओढ़ कर किसी की हत्या करना सरासर गलत है. 

    मेरी नज़र में तो इस सबके लिए पुरुष ही दोषी है. पुरुष खुद अश्लील फिल्में देखते हैं, इंटरनेट पर सर्च करते हैं, दूसरी लड़कियों को वैसी ही नज़रों से घूरते हैं, छेड़ते हैं. लेकिन जब बात अपने घर की आती है, तो किसी कंदील को गला दबाकर मार डालते हैं, किसी अनीता को पेड़ से लटका दिया जाता है, किसी रजिया को जिंदा जला दिया जाता है. हमारे देश में कई चर्चित मामले ऐसे हुए हैं जहाँ जाति से बाहर प्रेम-विवाह करने पर लड़कियों को उनके ही परिवार के लोगों ने मार डाला. भारत में भी कई जगहों पर लड़कियों को प्रेम करने के जुर्म में उनके ही भाई, परिवार वाले मार डालते हैं.

    इसके उलट अगर ऐतिहासिक सन्दर्भों पर नज़र फिराई जाए तो रक्षाबंधन के किस्से हमारे इतिहास और हिंदू पौराणिक कथाओं में खूब सुनने मिलते हैं. मसलन एक युद्ध के समय मेवाड़ की महारानी कर्मावती ने मुगल राजा हुमायूं को राखी भेज कर मदद मांगी थी और हुमायूं जैसे शासक ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी. इतना ही नहीं, कहते हैं महान सिकंदर की पत्‍‌नी ने अपने पति के हिंदू-शत्रु पुरु को राखी बांधकर उसे अपना भाई बनाया था और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन भी लिया था. राजा पुरु ने इस वचन का मान भी रखा था और उन्होंने सिकंदर को जीवनदान भी दिया. 

    सिर्फ यही नहीं इसके अलावा भी हमारे इतिहास में ऐसी किस्सों की कोई कमी नहीं है. पूरा इतिहास ही ऐसे किस्सों से पटा पड़ा है. अगर इतिहास में ऐसा हो सकता है तो वर्तमान में क्यूँ नहीं? लेकिन लगता है इनसे कुछ सीख लेने की जगह हम सिर्फ औपचारिकता निभाने में लग जाते हैं. रक्षाबंधन के इस अनूठे उत्सव का ही तो यह कमाल है जो यह भाई-बहन के अटूट रिश्ते को मर्यादित करता है. किन्तु अन्य कई बुराइयों के साथ बेटी को गर्भ के अंदर ही मार दिया जाना आखिर रक्षाबंधन की गरिमा को कलंकित नहीं करता है तो और क्या करता है? माँ के गर्भ में अगर बेटी जिन्दा बच भी गयी तो समाज के दरिंदे उसे नोंच न लें इसका डर खाए जाता है और गनीमत रही दरिंदों की नज़र से बच गयी तो दहेज़ के लालची कुत्ते कुत्तों से कैसे बचेगी?

    ऐसी स्थिति में बहनों के लिए पर्व मानाने का दिखावा, औपचारिकता ही प्रतीत होता है, जब हम उन्हें सुरक्षा नहीं दे सकते. अब चाहे वो अपनी बहन हो या किसी और की बहन हो, रक्षाबंधन तो सभी बहनों की रक्षा के दायित्व बोध कराता है. 

    तो इस रक्षाबंधन पर मेरे साथ प्रण लें कि अब से बहनों की रक्षा की सिर्फ बातें ही टीवी पर नहीं होंगी, बल्कि सही मायनों में हम अपनी ज़िन्दगी में भी इसे चरितार्थ करेंगे. ये करना मुश्किल नहीं है सिर्फ नजरिये भर का फर्क है. हमारी बहन की इज्ज़त ही इज्ज़त नहीं होती अपितु सभी महिलाओं को इज्ज़त से जीने का हक़ है. ये राखी होगी ‘इज्ज़त वाली राखी’. 

  • होली उन्माद, गरिमा और मर्यादा से भरा पर्व है, पहचाने इसकी सार्थकता

    होली उन्माद, गरिमा और मर्यादा से भरा पर्व है, पहचाने इसकी सार्थकता

    सारा...रा...रा...रा...जोगी जी, सारा...रा...रा...रा...फागुन मास की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष मनाये जाने वाला होली का यह पावन त्यौहार सर्दी के अन्त और ग्रीष्म के प्रारम्भ के सन्धिकाल में तथा वसंत ऋतु की श्रीवृद्धि समृद्धि के मादक वातावरण में अपनी उपस्थिति देता है. फाल्गुन की पूर्णमासी को होने के कारण इसे फाग भी कहते हैं.

    पूर्णमासी से एक दिन पहले रात को लोग होली जलाते हैं और उसमें गेहूं की बालें तथा चने के छोले भुनते हैं. रंगों और संगीत का उन्माद लोगों को उत्साह और उमंग से भर देता है. वासंती पवन के साथ फागुनी रंगों की बौछार लिये होली का यह त्योहार प्रेम, हर्ष, उल्लास, हास्य विनोद, समानता चेतनता, जागति का पर्व है. यद्यपि इस पर्व के मनाये जाने के पीछे कुछ पौराणिक कथाएं हैं, तथापि इसे मनाये जाने के सामाजिक, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं. इस पर्व की सबसे ख़ास बात है कि यह मौसम और रंगों के अनुकूल होता है.

    होली के साथ एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है. एक राजा हिरण्यकष्यप था. जो चाहता था सभी उसे भगवान मानकर उसकी पूजा करें. उनका पुत्र प्रह्लाद उन्हें ईश्वर नहीं मानता था. बहुत समझाने पर भी वह नहीं समझा तो उन्होंने उसे मारने के कई उपाय किये, पर वह नहीं मरा. हिरण्यकष्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वर मिला हुआ था. होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गयी. ईश्वर की कृपा से होलिका जल गयी और प्रह्लाद सकुशल बच गया. इसी की याद में होली जलायी जाती है.

    इस पर्व को सम्पन्नता के लिहाज से भी बड़ा माना गया है. होली के अवसर पर किसानों की फसल पक जाती है. अतः लहलहाती फसलें देखकर किसान खुशी से झूम उठते हैं और आग में अनाज की बालों को भूनकर खाते एवं खिलाते हैं.

    अगले दिन सुबह अर्थात दुलहंडी के दिन होली खेली जाती है. सब लोग वैर-विरोध भूल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं, मिठाइयां खाते और खिलाते हैं तथा प्यार के रंगों में रंग जाते हैं. सभी एक दूसरे पर रंग डालते और गुलाल मलते हैं. गुंजिया और तरह-तरह की मिठाइयों से वातावरण में मिठास घुल जाती है. इसलिए कहते हैं ‘बुरा न मानो...होली है’.

    होली की सार्थकता तब तक नहीं हो सकती जब तक इसमें भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज की होली की बात न हो. ब्रज की होली तो सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु विश्व भर में प्रसिद्ध है. वहाँ मनाई जाने वाली होली बेहद ख़ास होती है क्यूंकि स्वयं प्रभु इस उत्सव को बड़े ही चाव से मानते थे और कहा जाता है आज भी श्रीकृष्ण इस पर्व को मानने आते हैं.

    आज के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो सभी वस्तुओं में मिलावट हो गयी है. आजकल अच्छे रंगों का प्रयोग न करके रासायनिक लेपनों, नशे आदि का प्रयोग करके इसकी गरिमा को समाप्त कर रहे हैं. आज के व्यस्त जीवन के लिए होली चुनौती है. इसे मंगलमय रूप देकर मनाया जाना चाहिए. तभी इसका भरपूर आनंद लिया जा सकेगा. इसके विपरीत पहले टेसू के रंगों का इस्तेमाल किया जाता था. कहते हैं टेसू के  प्रभाव से चेचक माता जैसी बीमारियों का शमन भी किया जाता है.

    होली का पर्व मनाये जाने के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक महत्त्व में से यह प्रमुख है कि होली समानता, सदभाव में वृद्धि करने, शत्रुता को मित्रता में बदलने का पर्व है. इस दिन छोटे-बड़े सभी अपनी सामाजिक पद-प्रतिष्ठा भूलकर मनोमालिन्य दूर करते हैं. अपने विरोधी भावों को छोड़ स्नेही भाव तरंगों में सराबोर हो हास्य-विनोद करते हैं, फगुवा गाते हैं .

    होली के इस पवित्र त्यौहार में समय परिवर्तन के साथ-साथ कुछ विकृतियों का प्रवेश हो गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसा भी प्रतीत होता है कि कहीं हम इसके मूल स्वरूप को विस्मृत न कर जायें. होली के दिन स्वाभाविक सहज हास्य-विनोद के स्थान पर कुरुचिपूर्ण अश्लील, भद्दे, पतनकारी मनोभावों का प्रयोग होने लगा है. किसी सभ्य सुसंस्कृत समाज के लिए इसे छेड़छाड़ का रूप देना उचित नहीं है .

    कई अवसरों पर अपने से सम्मानीय स्त्रियों के प्रति अमर्यादापूर्ण आचरण करते हुए इसकी गरिमा, महता को यदूल जाते हैं. होलिका को गाली देने का आशय कुछ दूसरे अर्थो में लेने लगे हैं. कुछ तो होली के अवसर पर अपनी बुराइयों को पवित्र अग्नि में होम करने की बजाये प्रतिशोध की भावनाओं में जलकर अमानवीय कृत्य करते हैं. मदिरा और भांग का आवश्यकता से अधिक सेवन असन्तुलित बना देता है.

    यदि हम इन दोषों से दूर रहकर होली के वास्तविक परम्परागत स्वरूप को कायम रखते हैं, तो इस त्योहार की जो महिमा है, गरिमा है, वह बनी रहेगी; क्योंकि होली तो जीवन को उल्लासमय, उज्जल बनाने का पर्व है.

    यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि हमारे देश ने त्योहारों की माला पहन रखी है. शायद कोई ऐसी महत्त्वपूर्ण अतिथि हो, जो किसी न किसी त्योहार, पर्व से सम्बन्धित न हो. छोटे-बड़े त्योहारों को लेकर चर्चा की जाए, तो हमारी सभी तिथियां किसी-न-किसी घटना का ही प्रतीक और स्मृति हैं. 

    यदि हम अपने पर्वों का सही मूल्यांकन करके उनकी गरिमा को बनाये रखेंगे तो उन्माद और हर्ष हमेशा बना रहेगा. 

  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.