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राशिफल

मेष - Aries

समय मध्यम है। तकनीकी व कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे तथा व्यावसायिक उलझनें भी दूर होंगी। उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहें। समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

मेष – Aries

मेष राशि वालों के लिए जुलाई माह का तृतीय सप्ताह अनुकूल रहेगा। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है परंतु आगे समय अच्छा है। चन्द्रमा अष्टम भाव एकादश भाव से गोचर करेंगे। 

16-17 जुलाई को चन्द्रमा अष्टम भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है। आपके सभी कार्यों में अचानक रुकावट व परेशानी महसूस होगी। अनावश्यक वाद-विवाद झगड़े का रूप ले सकता है इसलिए अपने आप पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है धैर्य से काम लें। आगे आने वाला समय अनुकूल है। 

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि नवम भाव से गोचर करेंगे। धीरे-धीरे पीछे से चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखें। नकारात्मकता सोच से दूर रहते हुए आप सकारात्मक सोच बनाएं। धर्म में आस्था बढ़ेगी और लम्बी धार्मिक यात्रा हो सकती है। उच्च अधिकारी वर्ग से मेल-मुलाकात में व्यस्त रहेंगे। समय का फायदा उठाना चाहिए। रुके हुए कार्य बन सकते हैं।

20-21 जुलाई को चन्द्रमा दशम भाव से गोचर करेंगे। पीछे से चली आ रही सफलता आगे भी जारी रहेगी। कारोबार सामान्य बना रहेगा। भाग्य साथ देगा। लाभ की स्थिति बनी रहेगी। आपका राजनीतिक लोगों से मिलना-जुलना जारी रहेगा और उनसे सहयोग प्राप्त होगा। आगे बढऩे का मार्ग प्रशस्त होगा। रुका हुआ धन प्राप्त होगा।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूल है। आपके द्वारा किये गये कार्यों की प्रशंसा होगी। लोगों के साथ मेल-जोल बढ़ेगा जिस कारण कार्यक्षेत्र में तरक्की होगी। घर में मेहमानों का आगमन होगा। आप उनकी आवभगत में व्यस्त रह सकते हैं। लाभ की प्राप्ति होगी।   
 

मेष – Aries

मेष राशि वाले जातकों के लिए जुलाई माह का मासिक साप्ताहिक भविष्य

मेष राशि वालों के लिए जुलाई माह के प्रारंभ में चन्द्रमा वृषभ राशि द्वितीय भाव में,  सूर्य, बुध व शुक्र मिथुन राशि तृतीय भाव में, गुरु-राहु सिंह राशि पंचम भाव में, मंगल तुला राशि सप्तम भाव में, शनि वृश्चिक राशि अष्टम भाव में और केतु कुंभ राशि एकादश भाव से गोचर कर रहे हैं।  

1-7 जुलाई मेष राशि वालों के लिए जुलाई माह का प्रथम सप्ताह अति शुभ फल देने वाला रहेगा। 1-2 जुलाई को चन्द्रमा वृषभ राशि द्वितीय भाव से गोचर करेंगे। इस कारण सरकार की तरफ से लाभ मिलेगा। अधिकारी व कर्मचारी वर्ग मददगार साबित होंगे। तरक्की का अवसर मिलेगा। इच्छा अनुसार तबादला हो सकता है। परिश्रम के अनुसार सफलता जरूर मिलेगी। 

3-4 जुलाई को चन्द्रमा मिथुन राशि तृतीय भाव से गोचर करेंगे। इसलिए आप वाणिज्य व्यवसाय में तरक्की करेंगे। यात्रा लाभकारी रहेगी। मन की शंकाएं दूर होंगी। आप राहत की सांस लेंगे। पारिवारिक लोगों के मध्य विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

5 जुलाई की दोपहर तक समय मनोनुकूल रहेगा परंतु दोपहर बाद समय प्रतिकूल हो जाएगा। इसलिए थोड़ा सचेत रहने की जरूरत है और वाद-विवाद से बचें। 5-6-7 जुलाई को चन्द्रमा कर्क राशि चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे। आप जमीन जायदाद के विवाद से परेशान रहेंगे। कार्यक्षेत्र में मन कम लगेग। पंूजी निवेश ध्यान से करें। मकान प्रोपर्टी आदि में निवेश के लिए समय अनुकूल नहीं है। चन्द्रमा स्वराशि से गोचर करेंगे इसलिए प्रयत्न करने से कार्य बनेंगे अर्थात सफलता तो प्राप्त होगी परंतु अधिक मेहनत करने के बावजूद कम सफलता प्राप्त होगी। इसलिए वाद-विवाद से बचें और जरूरी न हो तो यात्रा न करें।

8-15 जुलाई मेष राशि वालों के लिए जुलाई माह का दूसरा सप्ताह सामान्यतौर पर उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। प्रयत्न करने से लाभ प्राप्त होगा।  8-9 जुलाई को चन्द्रमा सिंह राशि पंचम भाव से गोचर करेंगे। पीछे से चली आ रही परेशानियां धीरे-धीरे दूर होंगी। संतान सुख में वृद्धि होगी। बच्चों की पढ़ाई की सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। वाणिज्य व्यवसाय सामान्य रहेगा। आर्थिक हालात में सुधार होगा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। कुछ अच्छी बातें सीखने-समझने को मिलेगी।

10-12 जुलाई को चन्द्रमा कन्या राशि षष्ठ भाव से गोचर करेंगे। समय मनोनुकूल है और उत्तम संपत्ति दायक दिवस रहेगा। आपको रुका हुआ पैसा मिलेगा। लेन-देन के मामलों में सफलता प्राप्त होगी। प्रतिस्पर्धा आदि कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। घर-परिवार के मामलों में परिवर्तन और संगठन की आवश्यकता हो सकती है। शत्रु पक्ष से सावधान रहें।  

13-14 जुलाई को चन्द्रमा तुला राशि सप्तम भाव से गोचर करेंगे। घर का वातावरण सामान्य रहेगा। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी। साझेदारी के व्यवसाय में साथियों के साथ अच्छा तालमेल रहेगा। आयात-निर्यात संबंधी कार्यों में सफलता मिलेगी। जिस कारण आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

15 जुलाई को चन्द्रमा वृश्चिक राशि अष्टम भाव से गोचर करेंगे। इसलिए समय प्रतिकूल है, सचेत रहें। वाहन ध्यान से चलाएं दुर्घटना की संभावना है। पूंजी निवेश के लिए समय अनुकूल नहीं है।

16-23 जुलाई मेष राशि वालों के लिए जुलाई माह का तृतीय सप्ताह अनुकूल रहेगा। सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है परंतु आगे समय अच्छा है। चन्द्रमा अष्टम भाव एकादश भाव से गोचर करेंगे। 16-17 जुलाई को चन्द्रमा अष्टम भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूल है। आपके सभी कार्यों में अचानक रुकावट व परेशानी महसूस होगी। अनावश्यक वाद-विवाद झगड़े का रूप ले सकता है इसलिए अपने आप पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है धैर्य से काम लें। आगे आने वाला समय अनुकूल है। 

18-19 जुलाई को चन्द्रमा धनु राशि नवम भाव से गोचर करेंगे। धीरे-धीरे पीछे से चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखें। नकारात्मकता सोच से दूर रहते हुए आप सकारात्मक सोच बनाएं। धर्म में आस्था बढ़ेगी और लम्बी धार्मिक यात्रा हो सकती है। उच्च अधिकारी वर्ग से मेल-मुलाकात में व्यस्त रहेंगे। समय का फायदा उठाना चाहिए। रुके हुए कार्य बन सकते हैं।

20-21 जुलाई को चन्द्रमा दशम भाव से गोचर करेंगे। पीछे से चली आ रही सफलता आगे भी जारी रहेगी। कारोबार सामान्य बना रहेगा। भाग्य साथ देगा। लाभ की स्थिति बनी रहेगी। आपका राजनीतिक लोगों से मिलना-जुलना जारी रहेगा और उनसे सहयोग प्राप्त होगा। आगे बढऩे का मार्ग प्रशस्त होगा। रुका हुआ धन प्राप्त होगा।

22-23 जुलाई को चन्द्रमा कुंभ राशि एकादश भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूल है। आपके द्वारा किये गये कार्यों की प्रशंसा होगी। लोगों के साथ मेल-जोल बढ़ेगा जिस कारण कार्यक्षेत्र में तरक्की होगी। घर में मेहमानों का आगमन होगा। आप उनकी आवभगत में व्यस्त रह सकते हैं। लाभ की प्राप्ति होगी।  

24-31 जुलाई मेष राशि वालों के लिए जुलाई माह का चतुर्थ सप्ताह सामान्य फल देने वाला रहेगा। इसलिए सप्ताह की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही है। इस सप्ताह चन्द्रमा द्वादश भाव से तृतीय भाव तक गोचर करेंगे। 24-26 जुलाई के बीच चन्द्रमा द्वादश भाव से गोचर करेंगे। समय प्रतिकूलता दिखा रहा है इसलिए सचेत रहें।  शत्रुओं की संख्या में इजाफा हो सकता है। आप स्वयं को दूसरों से छोटा महसूस करेंगे और समस्याओं से अपने आपको घिरा पायेंगे। यदि जरूरी न हो तो लम्बी यात्रा न करें क्योंकि अचानक खर्चों में वृद्धि होने की संभावना है।

26-27 जुलाई को चन्द्रमा मेष राशि प्रथम भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूलता की तरफ है। ग्रह स्थिति आपके पक्ष में है। थोड़े प्रयास करने से सभी कार्य अच्छी तरह से पूरे होंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपकी चिर अभिलाषित इच्छाएं पूर्ण होंगी। लेकिन इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि हर छोटा-बड़ा निर्णय सोच समझ कर लें और बुजुर्गों की सलाह से करें।

29-30 जुलाई को चन्द्रमा वृषभ राशि द्वितीय भाव से गोचर करेंगे। समय अनुकूल होगा। प्रयत्न और परिश्रम के अनुसार सफलता एवं लाभ होगा और रुका हुआ धन प्राप्त होगा। आय के नये साधन उपलब्ध होंगे। समस्याओं का निवारण होगा। दृढ़ निश्चय से लिये गये निर्णय लाभदायक रहेंगे। परिवार का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।

31 जुलाई को चन्द्रमा मिथुन राशि तृतीय भाव से गोचर करेंगे। भाई-बहनों के बीच आपसी मतभेद दूर होंगे। उनके सहयोग से कार्यक्षेत्र में रुके हुए कार्य बनेंगे। परिवार के साथ यात्रा होगी और यात्रा में पूरा आनंद प्राप्त होगा।
 

मेष – Aries

मेष राशि के वालो के लिए 2016 शुभ और मंगलमय हो। हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

• मेष राशि वालों के लिए यह वर्ष चुनौतियों एवं कठिन परिश्रम के साथ-साथ शुभ फलदायी और उपलब्धियों से भरा होगा।
• भाग्योदय होगा। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। कार्यों में गति रहेगी।
• आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रहेगी। शनि देव और शुक्र देव आपकी राशि में अष्टम भाव से गोचर कर रहे हैं।
• यह ग्रह योगायोग आपकी संपूर्ण मनोकामना को पूरी करवाएंगे।
• परंतु स्वास्थ्य व कारोबार संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कारोबार में सफलता के लिए कठिन परिश्रम कड़ी मेहनत करनी होगी।
• परंतु कठिन परिश्रम व कड़ी मेहनत से मनोवांछित सफलताएं अवश्य हासिल होगी।
• श्रीशनिदेव की ढैय्या से आपको कहीं भयभीत होने की जरूरत नहीं है।
• शोध व साधनाओं के क्षेत्र में प्रगति होगी।
• उच्चाधिकारियों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
• आशा एवं अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य बनेंगे।
• पारिवारिक जीवन खुशियों से भरा रहेगा।
• परिवार में मांगलिक कार्य संपन्न होंगे।
• भवन-भूमि और वाहन प्राप्ति का प्रबल योग।
• मनोनुकूल व्यावसायिक यात्राएं।
• धन प्राप्ति के अनुकूल साधन उपलब्ध होंगे।
• व्यवसाय में आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
• रुके हुए काम बनेंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होगा।
• परंतु बृहस्पतिदेव 11 अगस्त तक पंचम भाव में राहू के साथ गोचर करेंगे। साथ ही 8 जनवरी से 9 मई के  बीच में वक्री अवस्था के दौरान
• साझेदारी के व्यवसाय में धन के डूबने की संभावना नजर आ रही है।
• संतान पक्ष को लेकर परेशानी।
• मान-सम्मान और सुयश में कमी आ सकती है।
• आपकी योजनाएं एवं प्लानिंग में अचानक रुकावट आ सकती है।
• परंतु इन संपूर्ण परेशानियों के बावजूद भी अनेकानेक शुभ समाचारों की प्राप्ति भी होगी।
• सभी कार्य सरलता से बनने लगेंगे।
• रुके हुए कार्य बनने शुरु हो जाएंगे।
• इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें अप्रैल से जून के मध्य मंगलदेव वक्री होंगे।
• इस दौरान सरकार विरोधी कार्य न करें। विवादित सौदों में पूंजी निवेश से बचें।
• नशा आदि करके वाहन न चलाएं।
• विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें तो अच्छा रहेगा।
• जिस तरह के ग्रह योगायोग है इस वर्ष आपके सपने पूरे होंगे।
• यदि आप अविवाहित है तो विवाह का प्रबल योग हैं।
• और यदि आप विवाहित है तो संतान प्राप्ति का प्रबल योग हैं।
• संतान के शादी-विवाह संबंधी सभी मसलें सुंदर तरीके  से निपट जाएंगे।
• पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक व स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अनुकूल व लाभदायक रहेगा।
• यदि आप नौकरी में है तो बॉस आपसे खुश रहेगा।
• आपका मनोनुकूल स्थान परिवर्तन व प्रमोशन के योग बनेगा।
• बुजुर्गों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होगा।
• जिस तरह के ग्रह योगायोग है अपने इष्टदेवता की पूर्ण कृपा आपके ऊपर रहेगी।
• धैर्य और संतोष के साथ इष्टदेवता का भजन करेंगे तो यह वर्ष आपके लिए सफलता से भरा रहेगा।

व्यवसाय एवं कॅरियर के दृष्टिकोण से

• देवाधिदेव श्रीशनिदेव वर्ष प्रारंभ से ही आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचरवश भ्रमण कर रहे हैं।
• बृहस्पतिदेव पंचम भाव से सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं।
• 25 मार्च से 13 अगस्त के बीच देवाधिदेव श्रीशनिदेव वक्री अवस्था में रहेंगे।
• और 11 अगस्त को बृहस्पतिदेव कन्या राशि में छठे भाव से गोचर करेंगे।
• संपूर्ण ग्रह योगायोगों को देखा जाएं तो वर्ष का प्रारंभ आर्थिक दृष्टिकोण से सफलताओं से भरा रहेगा।
• आर्थिकलाभ की दृष्टि से यदि आप अपने व्यवसाय में परिवर्तन या आगे विस्तार करना चाहते हैं तो उसके लिए समय अनुकूल है।
• आप परिवर्तन कर सकते हैं, शुभ रहेगा।
• इस वर्ष आय के साधनों में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी।
• मनोनुकूल आय के साधन और साझेदार उत्पन्न होंगे।
• आयात-निर्यात के व्यवसाय में विशेष सफलता हासिल होगी।
• बृहस्पति देव का यह राशि परिवर्तन पूरे वर्ष आपके लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण से मनोनुकूल रहेगा।
• परिश्रम के अनुकूल लाभ की प्राप्ति होगी।
• यदि आप नौकरी में है तो मार्च से लेकर 13 अगस्त तक मनोनुकूल पदोन्नति, स्थान परिवर्तन और धन लाभ की प्राप्ति होगी।
• यदि आप बेरोजगार है तो आपको रोजगार प्राप्त होगा।
• सितंबर से लेकर नवंबर के बीच समय व्यावसायिक दृष्टिकोण से बहुत अनुकूल हैं।
• ग्रह योगायोग के दृष्टिकोण से मेरे अनुभव में आ रहा है कि आपकी संपूर्ण मनोकामनाएं पूरी होगी। रुके हुए काम बनेंगे।
• चल-अचल संपत्ति का लाभ मिलेगा। कॅरियर संबंधी संपूर्ण परेशानियों का निवारण होगा।
• कारोबार में विस्तार के अवसर भी मिलेंगे।
• कुल मिलाकर यह वर्ष आपके लिए अनुकूल रहेगा।
• आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी, धन का आगमन बना रहेगा भूमि भवन की प्राप्ति का योग है।
• मेष राशि वालों को अच्छे फल तो प्राप्त होंगे।
• कॅरियर में सफलता के लिए 2016 में 12 अगस्त के बाद का समय अनुकूल व सफलताओं से भरा रहेगा।
• वैसे 25 मार्च से लेकर 12 अगस्त तक का समय भी मेष राशि वालों के लिए अनुकूलताओं से भरा रहेगा।
• कहीं भयभीत होने की जरूरत नहीं है।

सावधानी

• किसी भी कार्य में की गई लापरवाही से बड़ी आर्थिक हानि होने की सम्भावना बनी रहेगी।
• अजनबी व्यक्तियों के साथ व्यावसायिक लेन-देन नुकसानदायक रहेगा।
• यदि आप शेयर मार्किट में है तो आपको काफी सोच विचार व सूझबूझ से कार्य करना होगा।
• व्यवसायिक प्रतिद्वंद्वियों की हर हरकत पर अपनी पैनी नजर रखनी होगी।
• व्यापार में उधार लेन-देन नुकसान का कारण बन सकता है।

उपाय

• यदि आपको इस वर्ष व्यवसाय में किसी भी प्रकार की समस्या आ रही हो तो अपने घर में मंगल यंत्र, श्री यंत्र और बगुलामुखी यंत्र स्थापित करें। 
• सात मुखी रूद्राक्ष दो दाने, आठ मुखी रूद्राक्ष दो दाने और गणेश रूद्राक्ष एक दाना लाल धागे में धारण करें।

पारिवारिक दृष्टिकोण से

• मेष राशि का स्वामी वर्ष के प्रारंभ में अपनी राशि से सप्तम भाव में तुला राशि में गोचरवश भ्रमण कर रहे हैं।
• संतान पक्ष को विशेष सफलता हासिल होगी। मनोनुकूल परीक्षा परिणाम प्राप्त होंगे।
• साथ ही भाई बहनों व जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और दाम्पत्य जीवन में भी मधुरता कायम रहेगी।
• परंतु 8 जनवरी से 9 मई के मध्य जब बृहस्पति वक्री अवस्था में रहेंगे तो इन महीनों में रिश्तों को लेकर थोड़ी सी सावधानी बरतें।
• गलतफहमियां नहीं हो इस बात का विशेष ध्यान रखें।
• पिता और पुत्र के संबंधों में कटुता न आए। 
• इस दौरान संतान की शिक्षा को लेकर विशेष चिंता भी रहेगी।
• इस वर्ष एक बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी अनजान व्यक्ति को अपने रिश्तों के बीच में न आने दें। बहुत अच्छा रहेगा।

उपाय

• इस वर्ष विष्णु पूजा पर विशेष ध्यान दें। अपनी वित्तीय स्थिति व समय के अनुसार समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान कराने से लाभ प्राप्त होगा।

युवा वर्ग के लिए

• युवा वर्ग के लिए वर्ष 2016 सफलताओं से भरा रहेगा।
• बृहस्पतिदेव आपकी राशि से पंचम भाव में और शनिदेव आपकी राशि से अष्टम भाव में।
• बृहस्पतिदेव और शनिदेव का चर्तुदशम योग आपको पूर्ण लाभ देगा।
• रोजगार संबंधी समस्याओंं का निवारण होगा।
• नए व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
• नौकरी आदि में आने वाली समस्याओं का निवारण भी होगा।
• अनुकूल समय है। किए गए प्रयास अवश्य सफल होंगे।
• कुटिल व स्वार्थी मित्रों से सावधान रहने की जरूरत है।

विद्यार्थी वर्ग के लिए

• मेष राशि का स्वामी वर्ष प्रारंभ में अपनी राशि से सप्तम भाव से तुला राशि में गोचरवश भ्रमण कर रहे हैं।
• भ्रमण करने के कारण शिक्षा के दृष्टिकोण से मेष राशि के जातक-जातिकाओं के लिए यह वर्ष मनोनुकूल और सफलताओं से भरा रहेगा।
• मां सरस्वती की अपार कृपा रहेगी।
• परिश्रम के अनुकूल परीक्षा परिणाम प्राप्त होंगे।
• 8 जनवरी से लेकर 9 मई के बीच में शिक्षा के क्षेत्र में कठिन परिश्रम करना होगा।
• व्यर्थ का रात्रि भ्रमण मित्र मंडली व लापरवाही नुकसान का कारण बन सकती है।
• परंतु उसके बाद किये गये प्रयासों में मनोनुकूल सफलता अवश्य मिलेगी।
• समय आपके पक्ष में करवट ले रहा है।
• 11 अगस्त से मनोनुकूल शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए किए गए प्रयास सफलता देंगे।
• कठिन परिश्रम का लाभ मिलेगा। परीक्षा परिणाम भी अनुकूल प्राप्त होंगे।

युवा वर्ग व विद्यार्थियों के लिए उपाय

• किसी भी धर्म स्थान में पूजा में व साफ-सफाई में उपयोग में आने वाली वस्तुओं का दान करें।

मेष राशि वालों के लिए विशेष

• अपने आवास या व्यापार स्थल के दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लाल कनेर का पौधा लगाना बहुत ही अनुकूल फल प्रदान करेगा।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से 

• वर्ष प्रारंभ में राशि अधिपति मंगल देव सप्तम भाव से गोचर कर रहे हैं।
• और श्रीशनिदेव आपकी राशि से अष्टम भाव से गोचर कर रहे हैं।
• संपूर्ण ग्रह योगायोग को ध्यान से देखें तो स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी सी सावधानी अवश्य बरतनी पड़ेगी।
• विशेष रूप से अप्रैल से जून के मध्य मंगलदेव वक्री रहेंगे।
• इस समय उदर विकार यानी पेट संबंधी परेशानी, अनावश्यक क्रोध, उच्च रक्तचाप, कमर एवं कमर के निचले हिस्सों में परेशानी अवश्य नजर आ रही हैं।
• परंतु कहीं भी चिंतित होने की जरूरत नहीं हैं।
• यदि समय रहते चिकित्सक का सहारा लेंगे तो बीमारी परेशान नहीं करेगी।
• विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें तो अच्छा रहेगा।

उपाय 

• श्रद्धानुसार साबूत लाल मसूर या गुड़ का तुला दान करने से विशेष लाभ प्राप्त होगा।
 

  • Aries
    मेष
  • Taurus
    वृष
  • GEIMINI
    मिथुन
  • Cancer
    कर्क
  • Leo
    सिंह
  • Vigro
    कन्या
  • Libra
    तुला
  • Scorpio
    वृश्चिक
  • Sagittarius
    धनु
  • CAPRICORN
    मकर
  • Aquarius
    कुंभ
  • Pisces
    मीन
  • होली उन्माद, गरिमा और मर्यादा से भरा पर्व है, पहचाने इसकी सार्थकता

    सारा...रा...रा...रा...जोगी जी, सारा...रा...रा...रा...फागुन मास की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष मनाये जाने वाला होली का यह पावन त्यौहार सर्दी के अन्त और ग्रीष्म के प्रारम्भ के सन्धिकाल में तथा वसंत ऋतु की श्रीवृद्धि समृद्धि के मादक वातावरण में अपनी उपस्थिति देता है. फाल्गुन की पूर्णमासी को होने के कारण इसे फाग भी कहते हैं.

    पूर्णमासी से एक दिन पहले रात को लोग होली जलाते हैं और उसमें गेहूं की बालें तथा चने के छोले भुनते हैं. रंगों और संगीत का उन्माद लोगों को उत्साह और उमंग से भर देता है. वासंती पवन के साथ फागुनी रंगों की बौछार लिये होली का यह त्योहार प्रेम, हर्ष, उल्लास, हास्य विनोद, समानता चेतनता, जागति का पर्व है. यद्यपि इस पर्व के मनाये जाने के पीछे कुछ पौराणिक कथाएं हैं, तथापि इसे मनाये जाने के सामाजिक, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं. इस पर्व की सबसे ख़ास बात है कि यह मौसम और रंगों के अनुकूल होता है.

    होली के साथ एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है. एक राजा हिरण्यकष्यप था. जो चाहता था सभी उसे भगवान मानकर उसकी पूजा करें. उनका पुत्र प्रह्लाद उन्हें ईश्वर नहीं मानता था. बहुत समझाने पर भी वह नहीं समझा तो उन्होंने उसे मारने के कई उपाय किये, पर वह नहीं मरा. हिरण्यकष्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वर मिला हुआ था. होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गयी. ईश्वर की कृपा से होलिका जल गयी और प्रह्लाद सकुशल बच गया. इसी की याद में होली जलायी जाती है.

    इस पर्व को सम्पन्नता के लिहाज से भी बड़ा माना गया है. होली के अवसर पर किसानों की फसल पक जाती है. अतः लहलहाती फसलें देखकर किसान खुशी से झूम उठते हैं और आग में अनाज की बालों को भूनकर खाते एवं खिलाते हैं.

    अगले दिन सुबह अर्थात दुलहंडी के दिन होली खेली जाती है. सब लोग वैर-विरोध भूल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं, मिठाइयां खाते और खिलाते हैं तथा प्यार के रंगों में रंग जाते हैं. सभी एक दूसरे पर रंग डालते और गुलाल मलते हैं. गुंजिया और तरह-तरह की मिठाइयों से वातावरण में मिठास घुल जाती है. इसलिए कहते हैं ‘बुरा न मानो...होली है’.

    होली की सार्थकता तब तक नहीं हो सकती जब तक इसमें भगवान श्रीकृष्ण की ब्रज की होली की बात न हो. ब्रज की होली तो सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु विश्व भर में प्रसिद्ध है. वहाँ मनाई जाने वाली होली बेहद ख़ास होती है क्यूंकि स्वयं प्रभु इस उत्सव को बड़े ही चाव से मानते थे और कहा जाता है आज भी श्रीकृष्ण इस पर्व को मानने आते हैं.

    आज के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो सभी वस्तुओं में मिलावट हो गयी है. आजकल अच्छे रंगों का प्रयोग न करके रासायनिक लेपनों, नशे आदि का प्रयोग करके इसकी गरिमा को समाप्त कर रहे हैं. आज के व्यस्त जीवन के लिए होली चुनौती है. इसे मंगलमय रूप देकर मनाया जाना चाहिए. तभी इसका भरपूर आनंद लिया जा सकेगा. इसके विपरीत पहले टेसू के रंगों का इस्तेमाल किया जाता था. कहते हैं टेसू के  प्रभाव से चेचक माता जैसी बीमारियों का शमन भी किया जाता है.

    होली का पर्व मनाये जाने के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक महत्त्व में से यह प्रमुख है कि होली समानता, सदभाव में वृद्धि करने, शत्रुता को मित्रता में बदलने का पर्व है. इस दिन छोटे-बड़े सभी अपनी सामाजिक पद-प्रतिष्ठा भूलकर मनोमालिन्य दूर करते हैं. अपने विरोधी भावों को छोड़ स्नेही भाव तरंगों में सराबोर हो हास्य-विनोद करते हैं, फगुवा गाते हैं .

    होली के इस पवित्र त्यौहार में समय परिवर्तन के साथ-साथ कुछ विकृतियों का प्रवेश हो गया है, जिसके फलस्वरूप ऐसा भी प्रतीत होता है कि कहीं हम इसके मूल स्वरूप को विस्मृत न कर जायें. होली के दिन स्वाभाविक सहज हास्य-विनोद के स्थान पर कुरुचिपूर्ण अश्लील, भद्दे, पतनकारी मनोभावों का प्रयोग होने लगा है. किसी सभ्य सुसंस्कृत समाज के लिए इसे छेड़छाड़ का रूप देना उचित नहीं है .

    कई अवसरों पर अपने से सम्मानीय स्त्रियों के प्रति अमर्यादापूर्ण आचरण करते हुए इसकी गरिमा, महता को यदूल जाते हैं. होलिका को गाली देने का आशय कुछ दूसरे अर्थो में लेने लगे हैं. कुछ तो होली के अवसर पर अपनी बुराइयों को पवित्र अग्नि में होम करने की बजाये प्रतिशोध की भावनाओं में जलकर अमानवीय कृत्य करते हैं. मदिरा और भांग का आवश्यकता से अधिक सेवन असन्तुलित बना देता है.

    यदि हम इन दोषों से दूर रहकर होली के वास्तविक परम्परागत स्वरूप को कायम रखते हैं, तो इस त्योहार की जो महिमा है, गरिमा है, वह बनी रहेगी; क्योंकि होली तो जीवन को उल्लासमय, उज्जल बनाने का पर्व है.

    यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि हमारे देश ने त्योहारों की माला पहन रखी है. शायद कोई ऐसी महत्त्वपूर्ण अतिथि हो, जो किसी न किसी त्योहार, पर्व से सम्बन्धित न हो. छोटे-बड़े त्योहारों को लेकर चर्चा की जाए, तो हमारी सभी तिथियां किसी-न-किसी घटना का ही प्रतीक और स्मृति हैं. 

    यदि हम अपने पर्वों का सही मूल्यांकन करके उनकी गरिमा को बनाये रखेंगे तो उन्माद और हर्ष हमेशा बना रहेगा. 

  • अगर सुनार के धोखे से बचना है तो जाने क्या होती है 'एक्साइज ड्यूटी' (ED) ?

    मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा. उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए. सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी. आपने खुशी से कहा ठीक है. उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टांका लगा दिया. बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता ये तो सभी जानते हैं. 

    यानी अगर 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया और 2000 रुपये आपसे बनवाई अलग से लेली. तो सीधा-सीधा आपको 5000 रुपये का झटका लग गया. अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम होकर 9 ग्राम शेष बचा.  

    बात यहीं खत्म नहीं हुई. उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या उसी सोने से कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है

    अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना ही बचता है. यानी कि 30 हजार का सोना अब बस 23500 रुपये का बचा.

    आप जानते होंगे कि,

    30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई = 32000 रुपये.

    1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500 रुपये.

    शेष बचा सोना 8.5 ग्राम

    यानी कीमत 32000 - 6500 का घाटा = 25500 रुपये.

    यह वो था जो अब तक होता आया है. लेकिन इसके विपरीत भारत सरकार की मंशा क्या है? एक नज़र डालते हैं इस पर भी.

    एक्साइज ड्यूटी लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा. इतना ही नहीं जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका सोने के तोल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

    जैसा कि आपके सोने का तोल 10 ग्राम है और टांका 1 ग्राम का लगा, तो सुनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा. इससे उपभोक्ता को फायेदा होगा और सुनार अब तक जो प्रपंच करते आयें हैं उस पर लगाम लग सकेगी. इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका धोखाधड़ी का भेद खुल जायेगा.
     

  • स्वयं के उत्थान के लिए भाषा का विकास सबसे ज़रूरी : राज महाजन

    कहते हैं जिसने अपनी मातृभाषा में पकड़ मजबूत करली वही इंसान जीवन में सफल है और मातृभाषा के उत्थान के लिए हमें ही कदम उठाने पड़ेंगे. 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी को राजभाषा का दर्जा हासिल है और हिंदी भारत में बोलचाल के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया था. हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है. 

    1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी को जनमानस की भाषा बताया था. साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि ‘संघ की राज-भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था. इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया. लेकिन जब राजभाषा के रूप में हिंदी लागू की गई तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोगों के बीच से विरोध के सुर भी उठने लगे और फिर अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. यही कारण रहा है कि हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा.

    आज पूरा विश्व ग्लोबल हो गया है. इस दौर में भाषा ने भी अपना रूप बदल लिया है. हिंदी की जगह अंग्रेजी हो गया है. मज़े की बात है जिसे हिंदी नहीं बोलनी आती उसे भी अच्छी नौकरी मिलती है क्यूंकि उसे अंग्रेजी बोलनी आती है. हिंदी आये या न आये, लेकिन “इंग्लिश” आनी ज़रूरी है. अपनी ही भाषा का अपने ही देश में इस तरह से ह्रास होना निंदनीय है.

    1991 के बाद भारत में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. नई प्रौद्योगिकी और इससे उपजते हुये सेवा और उद्योग देश की अर्थ, नीति में कई सारे महत्वपूर्ण बदलाव हुए. इस बदलाव का भाषा पर भी जबरदस्त असर पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई को समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुद्ध बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से मातृभाषा उजड़ने लगी है. इसलिए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए राजभाषा सप्ताह या हिंदी पखवाड़ा मनाया जाने लगा. इस पूरे सप्ताह सरकारी विभागों और विद्यालयों में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है ताकि हिंदी को बढ़ावा दिया जा सके और ज़्यादा लोग इसका प्रयोग उतने ही स्वाभिमान से करे जैसे इंग्लिश का करते हैं. 

    आज सभी जगहों पर इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी का चलन भी बढ़ा है. लेकिन नई पीढ़ी कहीं इससे पूरी तरह से वंचित न रह जाए इसलिए समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इसके लिए प्रयास कर रहा है. हर तबका अपने-अपने हिसाब से हिंदी का उत्थान करने का प्रयास कर रहा है. कवि अपनी कविताओं के ज़रिये, साहित्यकार अपने साहित्य के ज़रिये, शिक्षक अपनी विद्या के ज़रिये और घर में माता-पिता अपने संस्कारों के ज़रिये. ऐसा ही एक छोटा सा प्रयास मैंने भी किया है और आगे भी करता रहूँगा. मैं राज महाजन अपने तरीके से हिंदी के उत्थान में जुड़ा हूँ. हो सकता है मेरा करना काफी नहीं होगा. लेकिन मैंने अपने ही बूते पर एक शुरुआत की है जिससे मैं आने वाली पीढ़ी को हिंदी का महत्व समझा सकूँ. मेरा मानना है अगर समाज को उन्नत और उत्कृष्ट बनाना है तो पहले अपनी जड़ों को मजबूत और संमृद्ध बनाना होगा. इसके लिए भाषा को पतन से बचाना होगा. ज़रूरी नहीं कि उत्थान तभी होगा जब हम रोज हिंदी बोलेंगे. उत्थान तब होगा जब हिंदी बोलने पर शर्म महसूस नहीं करेंगे. पूरी आत्मीयता से हिंदी को अपनाएंगे, हिंदुत्व का विकास हिंदी से ही होगा. आज हिंदी दिवस पर मैं सभी को इस ओर प्रेरित करता हूँ और आने वाली पीढ़ी से एक 
    गुज़ारिश करता हूँ कि अंग्रेजी का प्रयोग तो करें लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें जिनमें  हिन्द और हिंदी समाई है. हिंदी से जुड़ना मेरे लिए गौरव का विषय है.