Movie Review: हाफ गर्लफ्रेंड

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प्रोड्यूसर : बालाजी टेलीफिल्म्स, चेतन भगत, मोहित सूरी
डायरेक्टर : मोहित सूरी
स्टार कास्ट : अर्जुन कपूर, श्रद्धा कपूर, विक्रांत मस्सी, रिया चक्रवर्ती, सीमा बिस्वास
म्यूजिक : मिथुन, तनिष्क बागची, ऋषि रिच, राजू सिंह
रेटिंग **

एक बार फिर राईटर चेतन भगत की एक फेमस नॉवेल पर दर्शकों को फिल्म देखने को मिलने जा रही है. नाम है ‘हाफ गर्लफ्रेंड’. नॉवेल के नाम पर ही डायरेक्टर मोहित सूरी ने इस फिल्म को भी बनाया है. चेतन भगत की कई नॉवेल पर फिल्में बन चुकी हैं. लेकिन क्या ये फिल्म दर्शकों की कसौटी पर खरी उतरेगी? इसमें अर्जुन कपूर और श्रद्धा कपूर लीड रोल में हैं.

कहानी
यह कहानी बिहार के रहने वाले माधव झा(अर्जुन कपूर) की है, जो दिल्ली आकर स्पोर्ट्स कोटे से यूनिवर्सिटी में दाखिला लेता है। यहां उसकी मुलाक़ात रिया सोमानी (श्रद्धा कपूर) से होती है। दोनों का एक इंट्रेस्ट काफी सिमिलर है, बास्केटबॉल। दिल्ली की रहने वाली रिया पर माधव का दिल आ जाता है, लेकिन रिया उसे प्यार नहीं करती। हालांकि, वह माधव की हाफ गर्लफ्रेंड बन जाती है। किन्हीं कारणों से दोनों के बीच मतभेद होते हैं। इसके बाद कहानी बिहार और लंदन तक भी जाती है। माधव की लव स्टोरी में उसके दोस्त शैलेश (विक्रांत मस्सी) का भी अहम योगदान होता है। अब क्या माधव और रिया की लव स्टोरी पूरी हो पाएगी? इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

फिल्म का म्यूजिक
फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और कहानी के साथ-साथ चलता है। 'फिर भी तुमको चाहूंगा' सबसे अच्छा सॉन्ग है। बाक़ी गाने ठीक तो हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले के दौरान कहानी की लय को तोड़ते हैं।

एक्टिंग की बात करें तो अर्जुन कपूर इस कैरेक्टर के लिए कही से भी परफेक्ट नहीं थे लेकिन वो चेतन भगत की पसंद है इसलिए फिल्म में भी मानो उनकी जगह पक्की हो गई. बिहारी एक्सेंट बोलने के चक्कर में अर्जुन की हिंदी को सुनना कानों में दर्द पैदा करता है. अंग्रेजी जुबान के साथ अमीर शहरी लड़की के किरदार श्रद्धा कपूर ने बेहतरीन काम किया है. मोहित सूरी के डायरेक्शन में उनको स्क्रीन पर देखना हमेशा ही खूबसूरत लगता है. माधव के दोस्त का किरदार निभानेवाले विक्रांत मेस्सी ने फिल्म में जान डाल दी है. माधव की मां के किरदार में सीमा बिस्वास ने अपने रोल के साथ पूरा इंसाफ किया है.

रोमांटिक फिल्मों के साथ मोहित सूरी दर्शकों के दिल को छूना बखूबी जानते है. इस फिल्म में भी वो कुछ ऐसा ही करने की कोशिश करते दिखाई दिए है. लेकिन आधे प्यार और अधूरी सी कहानी को लेकर वो पूरी फिल्म बनाने में चूक गए. क्योंकि आशिकी 2 और एक विलेन जैसा करिश्मा इस फिल्म के साथ नहीं दिखाई दे रहा है. डायरेक्शन,कैमरा वर्क, सिनेमेटोग्राफी और लोकेशन बढ़िया है बस कहानी से इमोशन गायब है.

अगर आपने चेतन भगत की नॉवेल ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ नहीं पढ़ी और आप रोमांटिक फिल्मों के शौकीन है तो ये फिल्म आपको इतनी बुरी नहीं लगेगी. खासकर युवाओं को ये फिल्म पसंद आ सकती है. हालांकि थियेटर से बाहर निकलने के बाद चेहरे पर वहीं कंफ्यूज रिएक्शन आ सकता है जैसा फिल्म का नाम सुनने के बाद ज्यादातर लोगों के चेहरे पर आया होगा.



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