चुनाव आयोग कल डेमो देकर दिखाएगा कैसे है EVM बिल्कुल सुरक्षित

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इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के आरोपों के बाद इलेक्शन कमीशन शनिवार को EVM और VVPAT का लाइव डेमो देगा। साथ ही ईवीएम में टेम्परिंग के ओपन चैलेंज को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेगा। बता दें कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस, सपा, बसपा और आप समेत 16 राजनीतिक पार्टियों ने मशीनों पर सवाल उठाए थे। आरोप था कि वोटिंग मशीनें हैक करके बीजेपी ने चुनाव जीते हैं।

9 मई को दिल्ली असेंबली में केजरीवाल सरकार ने EVM जैसी एक मशीन को हैक करने का डेमो दिया था। विधायक सौरभ भारद्वाज मशीन को लेकर आए थे। उन्होंने कोड के जरिए बीजेपी को वोट ट्रांसफर करके दिखाए। दावा किया कि असली EVM भी ऐसे ही हैक होती हैं। भारद्वाज का दावा है कि 90 सेकंड में मदरबोर्ड बदलकर ईवीएम से छेड़छाड़ मुमकिन है।आप ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) पास करने के लिए असेंबली का स्पेशल सेशन बुलाया था, लेकिन उसका इस्तेमाल EVM का डेमो दिखाने के लिए किया।

इलेक्शन कमीशन (EC) ने EVM हैक करने के आप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि EVM का मदरबोर्ड आम आदमी खोल नहीं सकता। जिस मशीन का डेमो दिखाया, वह प्रोग्राम्ड थी। ऐसे नकली गैजेट पर किए कथित डेमो के बहाने लोगों को ईवीएम के खिलाफ नहीं बहका सकते। ईसी पिछले दिनों ईवीएम विवाद को लेकर ऑल पार्टी मीटिंग कर चुका है। मई के आखिर में मशीनों से छेड़छाड़ का ओपन चैलेंज (हैकाथन) भी कराया जा सकता है।

इसी साल 5 राज्यों में वोटिंग के लिए EVM के इस्तेमाल पर मायावती, हरीश रावत, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने सवाल उठाए। इन राज्यों में से यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को भारी बहुमत मिला। EVM विवाद के बाद इलेक्शन कमीशन ने कहा था- मशीन को दो बार चेक किया जाता है। उसे कैंडिडेट के सामने जांचा और सील किया जाता है। काउंटिंग से पहले भी ईवीएम को कैंडिडेट्स के सामने खोला जाता है। बता दें कि 1980 में इलेक्शन कमीशन ने राजनीतिक दलों को EVM दिखाया था। लेकिन 24 साल बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में इसका पूरे देश में इस्तेमाल शुरू हो सका। आज तक कोई भी इलेक्शन कमीशन को EVM में हैकिंग के पुख्ता सबूत नहीं दे पाया।

 इसके बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में बाई इलेक्शन से पहले VVPAT (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) की चेकिंग के दौरान ईवीएम के दो अलग-अलग बटन दबाने पर कथित तौर पर कमल का फूल प्रिंट हुआ। केजरीवाल ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया और एमसीडी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की थी। पिछले महीने दिल्ली नगर निगमों के चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद आप और कांग्रेस ने मशीनों पर फिर से सवाल उठाए। AAP के नेताओं ने कहा था कि ये मोदी नहीं, ईवीएम लहर है।



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