ताज़ा खबर

 

व्यापार

reliance jio की बड़ी छूट, फेस्टिवल सेल में मिल रहा JioFi आधे दाम में

अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स साइट पर जहां फेस्टिवल सेल शुरू हो चुकी है, वहीं रिलायंस जियो ने भी फेस्टिवल सेल लेकर आया है। जियो फेस्टिवल सेलिब्रेशन में तहत JioFi डिवाइस पर भारी छूट दे रहा है। यानी जियो फाई को आप इस समय आधे कीमत पर खरीद सकते ह

GST के दायरे में आएं पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स : धर्मेंद्र प्रधान

कुछ वक्त से देश में पेट्रोल डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है. ऐसे में पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को भी GST के दायरे में लाया जाना चाहिए. इससे टैक्स कितना लगेगा यह तय हो जाएगा. GST काउंसिल इस बारे में तमाम रा

3 साल में भारत के टॉप-50 ब्रांड्स की वैल्यू बढ़ी, 62 फीसदी बढ़ी स्थानीय ब्रांड की वेल्यू

ब्रांड के रूप में भारतीय कंपनियां मल्टीनेशनल कंपनियों पर भारी पड़ रही हैं. देश के 50 सबसे बड़े ब्रांड में 38 भारतीय हैं. केवल 12 ब्रांड मल्टीनेशनल कंपनियों (MNC ) के हैं. 3 वर्ष पहले टॉप 50 ब्रांड में 35 स्थानीय और 15 MNC


ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार, 400 अरब डॉलर के पार

भारत का विदेश मुद्रा भंडार ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. भारत का विदेश मुद्रा भंडार पहली बार 400 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. RBI की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक 8 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में यह 400.726 बिलिय

80 से सीधा 40 रूपए लीटर पर आ जाएगा पेट्रोल! पूरे देश में बिकेगा एक समान कीमत पर

पूरे देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत एकसमान रखने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है. मैन्युफैक्वरिंग सेक्टर में इनपुट के रूप में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल-डीजल जैसे दूसरे ईधनों पर वैट रेट घटाने और नेचरल गैस पर वेट टैक्स 5 फीसदी तक रखने को राज्य

ग्लोबल ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स की रिपोर्ट आई सामने, भारत 103वें स्थान पर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स (वैश्विक मानव पूंजी सूचकांक) में 130 देशों की लिस्ट में भारत 103वें स्थान पर है। ये रैंक ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका) में भी सबसे नीचे है। नॉर्वे इस लिस्ट में टॉप पर है। ये इंडेक्स इस बात का संकेत होता है कि कौ


अरुण जेटली ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां, कहा जनधन में खुले 30 करोड़ बैंक खाते

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बुधवार को बताया कि जनधन योजना के तहत देशभर में 30 करोड़ अकाउंट खोले जा चुके हैं। इसमें से जीरो बैलेंस अकाउंट की संख्या तीन साल में 77%से घटकर 20%पर आ गई है। यूनाइटे

ऑयल मिनिस्ट्री ने बुलाई आपातकाल बैठक, पेट्रोल-डीजल की कीमत 3 साल के हाई पर

मुंबई-दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 3 साल के हाई पर पहुंच गई हैं। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपए और दिल्ली में70.38 रुपए प्रति लीटर तक हो गई हैं। वहीं, कोलकाता और चेन्नई में डीजल की कीमतें अपने 3 साल के हाई पर हैं। क्रूड में कमजोरी और रुपए में मजबूती के बाद जिस तरह से पेट्

Paytm लेकर आ रहा है RuPay डेबिट कार्ड, 2 लाख रुपये का मिलेगा इन्श्योरेंस कवर

जल्द ही Paytm पेमेंट बैंक अपना RuPay डेबिट कार्ड मार्केट में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए कंपनी ने नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ टाईअप किया है. RuPay डेबिट कार्ड सिर्फ उन्हीं लोगों को जारी किया जाएगा, जिनकी KYC


SC ने कहा- हमें जेपी इन्‍फ्राटेक की नहीं लोगों की ‍फ़िक्र, जमा कराएं 2000 करोड़ रूपए

सुप्रीम कोर्ट ने रीयल एस्टेट फर्म JP एसोसिएट्स को 27 अक्टूबर तक न्यायालय की रजिस्ट्री में 2 हजार करोड रुपए जमा कराने का निर्देश दिया. कोर्ट ने इसके साथ ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम समाधान की व्यवस्था के रूप में नियुक्त पेशेवर (आईआरपी) को इस

मझोली-लग्जरी कारें और SUV आज से होंगी महंगी, सेस बढ़ाने का फैसला

मझोली-लग्जरी कारों और SUV पर बढ़ा हुआ सेस आज से लागू हो हो गया है. सी.बी.ई.सी. ने एक ट्वीट में यह जानकारी दी. शनिवार को GST काउंसिल ने मिड-साइज कार पर सेस बढ़ाकर 17 फीसदी , लग्जरी कार पर 20 फीसदी और SUV पर 22 फीसदी करने का फैसला


Page 1 of 37
  • ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    ‘स्कूल’ हैं सबसे ज़्यादा असुरक्षित – राज महाजन

    8 सितम्बर को हुआ इंसानियत को शर्मशार करने वाला  काण्ड. एक बच्चा रोज की तरह अपने स्कूल जाता है. लेकिन उस दिन वह घर वापिस नहीं आता. अपने पीछे छोड़ गया वो खिलखिलाती सी मुस्कान, मीठी बातें और कई ‘अनसुलझे सवाल’. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले प्रद्युम्न का मर्डर क्या सच में बस कंडक्टर अशोक ने किया है? कैसे कंडक्टर स्कूल में चाकू लेकर दाखिल हो जाता है? क्यूँ उसने प्रद्युम्न को ही अपना शिकार बनाया? क्या प्रद्युम्न ने स्कूल में कुछ ऐसा देखा था कि जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया?

    सिर्फ एक प्रद्युम्न के साथ ही ऐसा नहीं हुआ है. पिछले कुछ दिनों में यह फेहरिस्त काफी लम्बी हो गयी है. बेंगलुरु में भी स्कूल के ही चपरासी ने चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. घटना का ख़ुलासा तब हुआ जब बच्ची ने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत घरवालों से की. ऐसी ही एक घिनौनी हरकत देखने को मिली दिल्ली के गांधीनगर के पब्लिक स्कूल में. टैगोर पब्लिक स्कूल के गार्ड ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया. गार्ड ने क्लासरूम में ले जाकर बच्ची को पहले मारने की धमकी दी और फिर उससे दुष्कर्म किया. इसके अलावा नई दिल्ली के वसंतकुंज में छह साल के एक बच्चे की वाटर टैंक में डूबकर मौत हो गई। इससे पहले गाजियाबाद के प्राइवेट स्कूल में एक बच्चा रहस्यमय मौत का शिकार हो चुका है।

    ऐसी घटनाओं के बाहर आने से इंसानियत तो शर्मशार हुई है. साथ ही इन सभी वारदातों से ये बात भी सामने आई है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा किसके जिम्मे है? अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, इसी भरोसे के साथ कि घर के बाहर बच्चा स्कूल में सुरक्षित रहेगा. लेकिन उनके नौनिहालों के साथ इस तरह का कुकृत्य घट जाता है. इसकी जवाबदेही किसकी है?

  • पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    पुलिस द्वारा अपने जुर्म को छिपाने की कोशिश- राज महाजन

    क़ानून का काम होता है समाज की रक्षा करना और गुनह्गारों को सजा दिलाना. लेकिन आजकल के परिपेक्ष्य में क़ानून निर्दोष और मासूमों पर जुल्म करता दिख रहा है. जरा सोचिये अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर समाज का क्या होगा? इस तरह से समाज गर्त में चला जायेगा.

    हाल ही में हुआ मंगलापुरी का संस्करण इसी बात की गवाही देता है कि पुलिस बन गयी है भक्षक. इस मामले में पुलिस एक महिला पत्रकार को जानवरों की तरह मारती है, उसका शोषण करती है, उसे मानसिक रूप से परेशान करती है. इतना ही नहीं अपनी दबंगई दिखाने के चक्कर में पुलिस उसको झूठे आरोपों के तहत फंसाने का प्रयास भी करती है.

    यह घटना घटी है न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. DDA मंगलापुरी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को उनकी झुग्गियों समेत वहां से हटाने गई थी. साथ में सरकारी काम सुचारू रूप से चले इसके लिए पुलिस भी तैनात थी. हालाँकि उस जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद भी DDA वहां पहुँच जाता है. स्टे ऑर्डर के मुताबिक, नवम्बर तक लोगों को वहां से हटाया नहीं जा सकता.

    DDA ने अपना काम करना शुरू कर दिया और पुलिस वालों ने अपना. यहाँ न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार घटना स्थल पर पहुंचकर अपना काम ही कर रही थी कि उसे पुलिस के जुर्म का शिकार होना पड़ा. पुलिस ने प्रीती पर डंडे बरसाए, लाते-घुसे बरसाए. यहाँ तक कि उसे चांटे भी मारे गये. एक महिला होने के बाद उस बुरी तरह से अपमानित किया गया बिना किसी अपराध के.

    इसके बाद शुरू हुआ पुलिस का असली खेल. घटना स्थल पर किसी उपद्रवी ने आग लगा दी जिससे लोग बेकाबू हो गये. इसका ठीकरा भी पुलिस वालों ने प्रीती के सर फोड़ा. पुलिस ने इसी बात का फयेदा उठाकर इस पूरे प्रकरण का इलज़ाम न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर लगा दिया. उसके बाद उसे देशद्रोह और दंगा फ़ैलाने के आरोप में फंसाने के लिए पुलिस ने चालें चलनी शुरू कर दी.

    मारपिटाई के बाद महिला पत्रकार को पुलिस जबरन घसीटकर थाने ले जाती है और अपने जुर्म को छुपाने के लिए उससे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराती है. यह हस्ताक्षर भी जबरन कराये जाते हैं यहाँ तक कि पत्रकार को पढ़ने तक नहीं दिया जाता. जाहिर सी बात है उन कागजों में कुछ तो ऐसा जरूर था जो पुलिस ने उसे पढ़ने नहीं दिया.

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस का जो चेहरा सामने आया काफी भयानक और निंदनीय है. जिसे हमारी रक्षा का दायित्व सौंपा है वही हम पर प्रहार करे तो अंजाम अंत ही होगा.

    मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ और चाहता हूँ कि पुलिस इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाये. क्यूंकि कानून के मुताबिक, किसी भी महिला पर पुरुष पुलिस हाथ नहीं उठा सकता. यहाँ तो महिला और पुरुष दोनों ने मारा है. यहाँ पुलिस दोषी है महिला पत्रकार बेगुनाह.

    इस वीभत्स प्रकरण में पुलिस अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करे और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करे.

  • दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है-राज महाजन

    स्वतंत्रता के बाद, जब समाजीकरण का उदय हुआ तो उस समय महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी. महिला शोषित और अत्याचार का शिकार थी. उस बद्स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने क़ानून-व्यवस्था में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान बनाए. महिलाओं को विशेषाधिकार दिए गए और महिलाओं ने तरक्की भी की. 

    लेकिन, अब समय बदल चुका है. महिलाओं की स्थिति हर मामले में अच्छी है. बल्कि, कुछ मामलों में महिलाएं पुरुषों से भी आगे बढ़कर हैं. अब महिलाओं की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. गृहस्थी से आगे निकलकर महिलाओं की अब अपनी प्राथमिकताएं हैं. अब महिलाएं सुखी-समृद्ध परिवार का हिस्सा बनकर नहीं बल्कि खुद की एक अलग पहचान बनाकर जीना चाहती हैं. परिवार अब बिखराव की ओर हैं.

    इसी दौर में, अब महिलाओं की रूचि {शादी|विवाह) में नहीं है. अगर माता-पिता के दबाब में शादी करनी पड़ गयी या फिर मनमुताबिक परिवार नहीं मिला तो कानून के विशेषाधिकारों का प्रयोग कर परिवार-मर्दन करके महिलाएं अलग हो जाती हैं. ऐसी महिलाएं अपनी शादी तोड़ने के साथ-साथ क़ानून की सहायता से पति से आर्थिक फायदे लेते हुए अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पूरी व्यवस्था कर लेती हैं. अबला नारी नहीं ‘पुरुष’ हो गया है. दमन महिलाओं का नहीं, पुरुषों का हो रहा है. 

    अब 'सिंगल-पैरेंट' का फैशन भी ज़ोरों पर है. शादियाँ टूटने का अनुपात पहले के मुकाबले बहुत ही ज़्यादा बढ़ चुका है जिसका कारण कहीं न कहीं महिलाओं के लिए बनाए गए क़ानून और विशेषाधिकार हैं. इन कानूनों का फायदा असली महिला पीड़ितों को कितना मिला है इसके आंकडें बहुत कम हैं. लेकिन, पुलिस थानों और कोर्ट में 94 प्रतिशत मामले झूठे दर्ज हो रहे हैं. इन कानूनों की वजह से, जो महिलाएं अपने पति, सास-ससुर के प्रति प्रेम-भाव रखते हुए, गृहस्थी का निर्वाह करती थी, उनमें अहंकार और दबंगई की भावना आ गयी. महिलायें मोर्चे की शुरुआत करती हैं बाकी का बचा-खुचा काम मीडिया कर देती है.

    महिला सशक्तिकरण के नाम पर मीडिया और फिल्मकारों ने इन महिलाओं को नकारात्मक सोच का चश्मा पहना दिया, जिसमें उन्हें अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियां अब अत्याचार लगने लगीं हैं. जो महिलाएं अब तक गृहस्थी का निर्वाह करती थीं, वो घर का काम करने में अपने-आपको शोषित समझने लगीं हैं. जो महिलाएं ख़ुशी-ख़ुशी पति के साथ रहती थीं और सास-ससुर की सेवा करती थीं, उनको वही सब अब अपना अपमान और अत्याचार लगने लगा है. बस फिर क्या, अब लग गयी हैं महिलाएं अपने ऊपर हुए 'शोषण' और 'अत्याचार' का बदला लेने में.

    सुखी परिवार की परिभाषा अब 'सिंगल-पैरेंट' तक सीमित होती जा रही है. पुरुषों का दमन इस स्तर तक पहुँच गया कि उन्होंने क़ानून से लड़ने की बजाय टूटकर खुदख़ुशी जैसे निर्णयों को अपना लिया है. जो कुछ बहादुर थे उनको न्याय-व्यवस्था ने तोड़ दिया.

    जब कोई पुरुष किसी थाने में जाता है तो उसे यह सुनने को मिलता है, "भाई तेरा कुछ न होने का. तू अपनी शिकायत लिख कर दे दे. वो तो 'महिला' है उसकी पहले सुनी जायेगी." न्याय-व्यवस्था के संचालकों द्वारा खुलकर ऐसे पुरुषों पर आर्थिक और मानसिक अत्याचार होता है और वो पुरुष अपने-आपको सिर्फ कोसता रह जाता है.

     जब झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई युद्ध लड़ रही थीं तो महिला सशक्तिकरण जैसी कोई नीति नहीं थी और न ही क़ानून-व्यवस्था में कोई विशेषाधिकार. जिसे अत्याचार के खिलाफ लड़ना होता है, उसके लिए कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए मन की शक्तिका प्रबल होना ही काफी होता है. सोचने वाली बात यह है कि अगर समाज में सीता, अहिल्या जैसी देवियाँ थीं तो मंथरा, सुपर्न्खा, ताड़का जैसी शैतान औरतें भी थीं. 

    जब तक स्त्री-पुरुषों के लिए सामान अधिकार नहीं रखे जायेंगे, तब तक हम असल मायनों में विकसित नहीं माने जायेंगे. महिलाओं के लिए कानूनी-विशेषाधिकार इस समाज के लिए दीमक के सामान हैं, जो परिवार और समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने का काम कर रहे हैं.