भारत में डॉक्टरों ने रचा इतिहास, देश में पहली बार किया खोपड़ी का ट्रांसप्लांट

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भारत के पुणे शहर में पहली बार स्कल ट्रांसप्लांट की सर्जरी सफल हुई है. डॉक्टरों ने 4 साल की बच्ची के 60 फीसदी डैमेज हो चुके खोपड़ी की जगह थ्री-डायमेंशनल इंडीविजुअलाइज पॉलिथीन बोन लगाई है. यह एक तरह की हड्डियां हैं जिन्हें अमेरिका स्थित एक कंपनी ने बनाया है. इनकी लंबाई और आकार डैमेज स्कल के बराबर था.

जिस बच्ची की खोपड़ी का ट्रांसप्लांट किया गया है वो सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गई थी. जिसके चलते उसकी खोपड़ी डैमेज हो गया. उसे दो बड़ी सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी. उसे इसी साल दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया और 18 मई को उसकी खोपड़ी ट्रांसप्लांट की सर्जरी हुई. बच्ची की मां का कहना है कि वह स्कूल भी जाती है और दोस्तों के साथ खेलती भी है. वह पहले की तरह खुश रहती है. उसके पिता स्कूल बस के ड्राइवर हैं.

बच्ची का इलाज करने वाले भारती अस्पताल के डॉक्टर जितेंद्र ओस्वाल का कहना है कि एक्सिडेंट का असर बहुत ही घातक था. उसे अचेत अवस्था में अस्पताल में लाया गया. उसके सिर से बहुत खून निकल रहा था. जिसके बाद उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया. सीटी स्कैन में पता चला कि उसकी स्कल के पीछे की हड्डी में फ्रैक्चर आया है जिसके चलते वह सूज गई है.

इस हड्डी को ऑप्टिकल स्कल कहा जाता है. जिसका प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है. इसके कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ यानी एडीमा का अधिक संचय हुआ. जब दाखिल होने के 48 घंटे बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आया तो दोबारा सीटी स्कैन कराया गया जिसमें एडीमा के बारे में पता चला था. कृत्रिम वेंटीलेशन और मेडिकल थेरेपी दी गई लेकिन एडीमा कम नहीं हुआ. जिसके बाद सर्जरी करनी पड़ी. सर्जरी के बाद बच्ची की हालतस्थिति} में सुधार होने लगा है.



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