केरल : निपाह वायरस ने ली 16 की जान, पहली बार मलेशिया में हुआ था वायरस का अटैक

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लगभग 20 साल पहले मलेशिया में आया था खतरनाक वायरस. 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे. इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया. पहले इसका असर सुअरों में देखा गया. अब इस वायरस ने किया है केरल में अटैक. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केरल के कोझीकोड में निपाह वायरस से 16 लोगों की मौत हो गई है. मृतकों में एक ही परिवार के चार लोग शामिल हैं.

चार की हालत गंभीर है. 25 लोगों को निगरानी में रखा गया है. हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है. इस बीच पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने खून के तीन नमूना में निपाह वायरस होने की पुष्टि की है. केरल सरकार ने इस पर केंद्र से तत्काल मदद मुहैया कराने की गुहार लगाई है. इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एनसीडीसी की टीम को केरल का दौरा करने का आदेश दिया है.

ताज़ा खबरों के मुताबिक, राज्य सरकार के कहने पर केंद्र से नेशनल सेंटर फॉर डीसीज कंट्रोल की टीम केरल में निपाह वायरस प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस संबंध में एक कमेटी गठित की है. जो बीमारी की तह तक जाने में जुटी है. पता किया जा रहा हैं कि किस तरह से लोगों को इससे बचाया जा सके. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है.  2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे. 

इसका सीधा असर हमारी स्वास नली पर पड़ता है. इसके बाद दिमाग में जलन का अनुभव होता है. तेज बुखार आता है. सही वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है.

जानकार बताते हैं अभी तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं है. इससे प्रभावित शख्स को आईसीयू में रखकर इलाज करना होता है. लेकिन इतना जरूर है कुछ सावधानियां बरतकर इसे बचा जरूर जा सकता है. इस बीमारी से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए. पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए. बीमार सुअर और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए.



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