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कोटा से एक घिनौनी हरकत सामने आई है. एक भाई का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने बहन को छेड़ने वालों को रोका था. इस घटना की रिपोर्ट लिखवाने जब भाई पुलिस स्टेशन पहुंचा तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से साफ-साफ मना दिया.

दरअसल मामला रंगबाडी के विनोवा भावे नगर में यूआईटी सर्किल के पास का है. जहाँ कुछ बिगड़े हुए लड़के एक लड़की के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे. बहन के छेड़खानी होती देखा भाई के उन मनचलों को समझया लेकिन वो अपनी हरकत से बाज नहीं आये. युवक अपनी बहन के साथ हो रही छेड़छाड व अभद्र व्यवहार की F.I.R. (रिपोर्ट) कराने पुलिस चौकी गया. पुलिस वालों ने उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी और कहा कि ‘कोई बड़ी घटना नहीं है. इसकी रिपोर्ट नहीं लिखेंगे. कोई बड़ी बात हो जाए तो कल कार्रवाई करेंगे.’ 

भाई ने उन्हें समझाया उल्टा लड़के मारपीट पर उतर आये. इतना ही नहीं ये बेशर्म लड़के कुछ देर बाद 3- 4 मोटर साइकिल पर उस लड़की के घर आये और परिवार वालों को गालियाँ देने लगे. गुस्से में तमतमाए 7-8 लड़कों ने भाई पर चाकू व तलवार से तब तक वार किया जब तक वह मर नहीं गया. परिवार वाले मदद के लिए चिल्लाते रहे. लेकिन कोई नहीं आया. पास-पड़ोस वाले भी तमाशबीन बनकर देखते रहे. रही सही कसर पुलिस ने निकाल दी.  

अगर पुलिस सही टाइम पर एक्शन लेती तो आज एक मासूम भाई जिन्दा होता. माँ-बाप के पास उनका बेटा होता.  

इस घटना ने पुलिस के जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए है. क्या पुलिस इन रहीसों के साथ मिली हुई है? क्यूँ पुलिस गुनाह होने देती है? क्या गुंडा-गर्दी से पुलिस भी डरने लगी है? 
 



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